वाशिंगटन: तेजी से फैलने वाले पर्यावरणीय प्रदूषकों की वजह से किडनी के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. एक नए अध्ययन में ये बात सामने आई है.

ये शोध किया है अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने. इसमें बताया गया है कि औद्योगिक प्रक्रियाओं और उपभोक्ता उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले नॉन बायोडिग्रेडेबल (स्वाभाविक तरीके से नहीं सड़ने वाले) पदार्थों का एक बड़ा समूह है, जो पर्यावरण में हर जगह मौजूद है.

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Air Pollution

शोधकर्ताओं ने कहा है कि मनुष्य दूषित मिट्टी, पानी, खाने और हवा के जरिए इनके संपर्क में आते हैं. ड्यूक यूनिवर्सिटी के जॉन स्टेनिफर ने कहा, ‘गुर्दे बेहद संवेदनशील अंग हैं. खासकर जब बात पर्यावरणीय विषैले तत्वों की हो, जो हमारे खून के प्रवाह में प्रवेश कर जाते हैं’.

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अनुसंधानकर्ताओं ने 74 अध्ययनों को देखा, परखा. फिर नॉन बायोडिग्रेडेबल के संपर्क से जुड़े कई प्रतिकूल प्रभावों के बारे में बताया. इन प्रभावों में गुर्दों का सही ढंग से काम ना करना, गुर्दे के पास की नलियों में गड़बड़ी और गुर्दे की बीमारी से जुड़े चयापचय मार्गों का ‍बिगड़ जाना शामिल है.

यह अध्ययन ‘क्लिनिकल जर्नल ऑफ द अमेरिकन सोसायटी ऑफ नेफ्रोलॉजी’ (सीजेएएसएन) में प्रकाशित हुआ है.

(एजेंसी से इनपुट)

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