7-8 साल की उम्र में ही क्यों होने लगा है लड़कियों को पीरियड्स? जानिए पीछे का सबसे बड़ा कारण

Early Menstruation in Girls: आपने देखा होगा कि आजकल छोटी-छोटी बच्चियों को भी मात्र 7-8 साल की उम्र में ही पीरियड्स की समस्या हो जाती है. इतनी कम उम्र में पीरियड्स होने के पीछे कुछ खास कारण मौजूद हैं, जिनके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए.

Published date india.com Published: August 18, 2025 7:58 AM IST
reason behind early menstruation symptoms into small girls in the age of 7-8 in hindi
reason behind early menstruation symptoms into small girls in the age of 7-8 in hindi

Early Puberty Symptoms: आजकल की युवा पीढ़ी में मानसिक और शारीरिक कई तरह के बदलाव देखे जा रहे हैं. शारीरिक तौर पर कई ऐसे बदलाव जो आमतौर पर किशोरावस्था में आते थे, वैसे परिवर्तन बच्चों में 7-8 साल की उम्र में ही देखे जाने लगे हैं.

इसमें सबसे प्रमुखता से बच्चियों के साथ परिवर्तन देखा जा रहा है. छोटी बच्चियां, जिनकी उम्र मात्र 7-8 साल है, उनको भी इतनी सी उम्र में पीरियड्स यानी मासिक धर्म की समस्या होने लगी है. यह चिंता जनक विषय है. आइए जानते हैं कि ऐसा किस वजह से हो रहा है?

प्रीकोशियस प्यूबर्टी का प्रभाव

कम उम्र में ही छोटी लड़कियों में मासिक धर्म यानी पीरियड्स की समस्या हो रही है. इस स्थिति को प्रीकोशियस प्यूबर्टी कहा जाता है. यह न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर भी असर डालता है.

प्रीकोशियस प्यूबर्टी क्या है?

प्रीकोशियस प्यूबर्टी वह स्थिति है, जिसमें बच्चों में यौवन (प्यूबर्टी) सामान्य से पहले शुरू हो जाता है. लड़कियों में यह आमतौर पर 8 साल से पहले पीरियड्स शुरू होने के रूप में दिखाई देता है. यह स्थिति हार्मोनल बदलावों के कारण होती है, जो कई कारकों से प्रभावित हो सकती है.

प्रीकोशियस प्यूबर्टी होने का कारण

इस स्थिति के पीछे कई सारे कारण मौजूद हो सकते हैं. इसमें सबसे प्रमुख रोल आजकल की खराब जीवनशैली निभाती है. साथ ही बदलता पर्यावरण या जलवायु परिवर्तन भी पीछे की मुख्य वजह हो सकती है. आजकल बच्चों के भोजन में सबकुछ मिलावटी या केमिकल से भरा हुआ सामान होता है. गर्भ से ही इंजेक्शन और ड्रग्स की आदत से बच्चों का शरीर भ्रूण अवस्था में ही केमिकल के संपर्क में आ जाता है.

जन्म के बाद की स्थितियां

बच्चे के जन्म के बाद दूध से लेकर खाने तक सभी चीजों में मिलावट होता है. इसके अलावा बच्चों की बढ़िया ग्रोथ के लिए बच्चों के भोजन में ग्रोथ हार्मोन्स का उपयोग किया जाता है, जो कि हार्मोन्स के असंतुलन के लिए जिम्मेदार होते हैं. इसके अलावा प्लास्टिक में मौजूद रसायन जैसे बीपीए (Bisphenol A), जो खाद्य पैकेजिंग में पाए जाते हैं, हार्मोन्स को प्रभावित करते हैं.

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मोटापा बढ़ाना और तनाव

बढ़ता मोटापा भी प्रीकोशियस प्यूबर्टी का एक प्रमुख कारण है. शरीर में अतिरिक्त चर्बी एस्ट्रोजन हार्मोन का उत्पादन बढ़ाती है, जो पीरियड्स को जल्दी शुरू कर सकता है. इसके साथ ही, बच्चों में तनाव और मानसिक दबाव भी हार्मोनल बदलावों को ट्रिगर कर सकते हैं. डिजिटल स्क्रीन और गैजेट्स का अत्यधिक उपयोग नींद की कमी और तनाव को बढ़ाता है.

बचाव के उपाय

इस स्थिति को कंट्रोल करने के लिए पेरेंट्स को बच्चों के खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए. किसी भी हालत में बच्चों को पैकेट बंध खाने और शुगर से दूर रखना चाहिए. इसके अलावा प्लास्टिक बर्तनों से बचना और बच्चों को हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए प्रेरित करना चाहिए. नियमित व्यायाम और तनाव कम करने वाली गतिविधियाँ, जैसे योग, भी मददगार हो सकती हैं। यदि 7-8 साल की उम्र में पीरियड्स शुरू हों, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ या एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से सलाह लें.

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे केवल सुझाव के तौर पर लें. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. (Images: Pinterest)

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