नई दिल्ली: कोविड-19 के इलाज के लिए पोलियो के टीके का परीक्षण करने के अंतरराष्ट्रीय अनुसंधानकर्ताओं के सुझाव पर सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय वैज्ञानिकों ने कहा कि कुछ वैज्ञानिक अवधारणाओं के आधार पर यह ‘परीक्षण योग्य’ है लेकिन संक्रमण के खिलाफ सीमित संरक्षण ही प्रदान कर सकता है. Also Read - अली फज़ल ने लोगों से की ये अपील, कहा- देश में कोरोना गरीबों ने नहीं अमीरों ने लाया है 

कोविड-19 के इलाज के लिए टीका बनने में अभी कम से कम एक साल लग सकता है, ऐसे में वैज्ञानिकों का कहना है कि तत्काल राहत के लिए पहले से सुरक्षित और प्रभावी टीकों का पुन: उपयोग एक तरीका हो सकता है. अन्य उद्देश्य से उपयोग में लाए जाने वाले टीकों में ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) और बीसीजी हो सकते हैं जो भारतीय बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं. Also Read - Operation Samudra Setu: भारतीय नौसेना ने पूरा किया 'ऑपरेशन समुद्र सेतु', 3 देशों से 4000 भारतीयों की हुई वापसी

जम्मू में सीएसआईआर के भारतीय समवेत औषध संस्थान (सीएसआईआर-आईआईआईएम) के निदेशक राम विश्वकर्मा ने कहा कि इस टीके का क्लीनिकल परीक्षण किया जा सकता है. वह पत्रिका ‘साइंस’ में पिछले सप्ताह अनुसंधानकर्ताओं के एक अंतरराष्ट्रीय समूह द्वारा प्रकाशित अध्ययन पर प्रतिक्रिया दे रहे थे. अमेरिका में मैरीलैंड विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिसिन के श्यामसुंदरन कोट्टिली और रॉबर्ट गैलो समेत अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि पोलियो के टीके का परीक्षण कर देखा जाना चाहिए कि क्या यह सार्स-सीओवी-2 वायरस से लोगों को बचा सकता है. Also Read - Coronavirus in MP Update: मध्य प्रदेश में जारी कोरोना का कहर, 16 हजार से अधिक संक्रमित, 629 की मौत

विश्वकर्मा ने कहा कि एचआईवी से एड्स होने की खोज में शामिल रहे जानेमाने अंतरराष्ट्रीय विषाणु विज्ञानी गैलो का विचार इस तथ्य पर आधारित है कि पोलियो टीका लेने वाले लोगों की स्वाभाविक प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ती है. उन्होंने कहा, ‘‘यह वैज्ञानिक अवधारणा है लेकिन हमें यह नहीं पता कि अंतत: क्या होगा क्योंकि इसके कई चरण होते हैं. शुरुआती चरण में हल्के और मामूली लक्षण वाले रोगियों के लिए यह फायदेमंद हो सकता है लेकिन गंभीर रोगियों के लिए कारगर ना भी हो.’’

विश्वकर्मा ने कहा, ‘‘यह वैज्ञानिक अवधारणा पर आधारित परीक्षण योग विचार है.’’ सीएसआईआर-आईआईसीबी, कोलकाता में वरिष्ठ वैज्ञानिक उपासना रे ने कहा, ‘‘हर साल पांच साल तक के बच्चों को पोलियो का टीका दिया जाता है. यह बहुत व्यापक और भलीभांति स्थापित कार्यक्रम है.’’ नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक सत्यजीत रथ ने कहा कि यह सामान्य तौर पर लोगों को किसी तरह का वायरस संक्रमण देने का विचार है ताकि उनके अंदर एंटीवायरल और प्रतिरक्षा क्षमता विकसित हो जो उसी समय शरीर को संक्रमित कर सकने वाले एक अन्य वायरस (सार्स-सीओवी-2) की आशंका को कम कर सके.