वैज्ञानिकों ने एक ऐसे व्यक्ति के असाधारण मामले को दर्ज किया है, जिसके शरीर में 12 ट्यूमर होने के बावजूद उसकी जान बच गई. इनमें से कम से कम पांच ट्यूमर घातक थे और सभी आक्रामक कैंसर का रूप ले चुके थे, फिर यह ट्यूमर आसानी से गायब हो गए. साइंस एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित शोध-निष्कर्ष में विशेष रूप से उस व्यक्ति का जिक्र किया गया है, जिसके शरीर में पहली बार एक ट्यूमर उस समय विकसित हुआ था, जब वह बच्चा था. बाद के कुछ वर्षो में ट्यूमर बढ़ते चले गए.
जीवन के 40 से कम वर्षों में इस व्यक्ति के शरीर में 12 ट्यूमर विकसित हो गए, उनमें से कम से कम पांच घातक थे और प्रत्येक अलग प्रकार के और शरीर के अलग-अलग हिस्सों में थे. व्यक्ति की त्वचा पर धब्बे दिखने लगे, वह माइक्रोसेफली से पीड़ित हो गया और शरीर में अन्य परिवर्तन भी होते चले गए.
स्पैनिश नेशनल कैंसर रिसर्च सेंटर (सीएनआईओ) में सेल डिवीजन और कैंसर ग्रुप के प्रमुख मार्कोस मालुम्ब्रेस के मुताबिक, ‘हम अब भी यह नहीं समझ पाए हैं कि किसी व्यक्ति के शरीर में भ्रूण की अवस्था के दौरान ट्यूमर कैसे विकसित हो सकता है और शरीर के सभी विकृतियों को कैसे दूर किया जा सकता है.’
वैज्ञानिकों ने पाया कि व्यक्ति के शरीर में 12 ट्यूमर इसलिए विकसित हो गए, क्योंकि रोगी को माता-पिता दोनों से जीवन के लिए जरूरी जीन में उत्परिवर्तन विरासत में मिला था. रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली ने उसके शरीर में स्वाभाविक रूप से एक मजबूत भड़काऊ प्रतिक्रिया उत्पन्न की, जिसने ट्यूमर से लड़ने में मदद की.
अध्ययन में यह भी दिखाया गया है कि कैसे एक नई तकनीक – एकल-कोशिका विश्लेषण – बहुत प्रारंभिक अवस्था में ट्यूमर का पता लगा सकती है या उन्हें विकसित करने की प्रवृत्ति को रोक सकती है. मालुम्ब्रेस के अनुसार, इस अनूठे मामले का अध्ययन नैदानिक परीक्षणों और नैदानिक इमेजिंग से पहले अच्छी तरह से ट्यूमर की क्षमता वाली कोशिकाओं का पता लगाने का एक तरीका है. यह एक कैंसर प्रक्रिया के लिए प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रोत्साहित करने का एक नया तरीका भी प्रदान करता है.’
शोधकर्ताओं ने व्यक्ति के पूरे जीनोम का विश्लेषण किया और ‘एमएडी1एसल1’ नामक जीन में उत्परिवर्तन पाया. यह जीन कोशिका विभाजन और प्रसार की प्रक्रिया में जरूरी है. एक तथ्य, जो अनुसंधान दल के लिए सबसे अधिक हैरान कर देने वाला था, वह यह था कि रोगी द्वारा विकसित पांच आक्रामक कैंसर अपेक्षाकृत आसानी से गायब हो गए.
शोधकर्ताओं की परिकल्पना यह है कि ‘परिवर्तित कोशिकाओं के लगातार उत्पादन ने इन कोशिकाओं के खिलाफ रोगी में एक पुरानी रक्षात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न की, जिससे ट्यूमर गायब होने में मदद मिली. हमें लगता है कि अन्य रोगियों की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाने से उन्हें ट्यूमर के विकास को रोकने में मदद मिलेगी.’
इस सीएनआईओ शोधकर्ता के अनुसार, यह खोज कि प्रतिरक्षा प्रणाली गुणसूत्रों की गलत संख्या वाली कोशिकाओं के खिलाफ रक्षात्मक प्रतिक्रिया देने में सक्षम है, इस अध्ययन के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है. यह भविष्य में नया चिकित्सीय विकल्प दे सकता है. एकल-कोशिका विश्लेषण से पता चला – अन्य विसंगतियों के बीच रक्त के नमूने में कई सौ गुणसूत्र लिम्फोसाइट्स के रूप में होते हैं, जो तेजी से फैलने वाली कोशिका से आते हैं.
शोधकर्ताओं ने कहा कि एकल-कोशिका विश्लेषण का उपयोग नैदानिक लक्षणों या विश्लेषणात्मक परीक्षणों में देखे जाने वाले मार्करों की मौजूदगी से बहुत पहले ट्यूमर की क्षमता वाली कोशिकाओं की पहचान करने के लिए किया जा सकता है.
(इनपुट – आईएएनएस)
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