हाल ही में हुए एक शोध के मुताबिक जिन मरीजों का ऑपरेशन दिन की बजाय रात में होता है, उनकी मौत की आशंका दोगुनी होती है। इस शोध का मकसद दिन और रात में की गयी शल्य चिकित्सा के बीच और उसके बाद मृत्यु दर के संबंधों का पता लगाना था।Also Read - कोरोना को रोकने में कितना सक्षम है Anti-Covid Nasal Spray? इसे खरीदें या नही? वीडियो में जानिए सबकुछ

Also Read - WHO on Covid-19 Pandemic: विश्व आर्थिक मंच की एक बैठक में WHO के आपात स्थिति प्रमुख का बड़ा बयान

इसके लिए शोधकर्ताओं ने सभी शल्य चिकित्सा की प्रक्रियाओं का पांच सालों तक मूल्यांकन किया। साथ ही 30 दिनों तक शल्य चिकित्सा के बाद अस्पताल के मृत्यु दर की समीक्षा की। इसके तहत शल्य चिकित्सा में आई बाधाओं के आधार पर और काम के समय को तीन भागों दिन, शाम और रात के तहत बांटकर आंकड़े जुटाए गए। इसके लिए 40,044 अस्पतालों में 33,942 मरीजों की 41,716 विशेष और आपातकालीन शल्य चिकित्सा का अध्ययन किया गया। Also Read - Health Tips: रात में सोने से दूध का सेवन करना कितना लाभदायक है? वीडियो देखें

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन मरीजों की शल्य चिकित्सा रात को हुई, उनमें दिन की तुलना में मरने की आशंका 2.17 गुनी ज्यादा थी। इसी तरह दोपहर बाद शल्य चिकित्सा किए गए मरीजों के मरने की आशंका 1.43 गुनी रही। यह भी पढ़ें: नींद में बाधा से आ सकते हैं आत्महत्या के ख्याल

मैकगिल विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य केंद्र के सहायक प्रोफेसर माइकल टेस्सलर ने कहा कि अमेरिकी सोसाइटी ऑफ एनेस्थियोलाजिस्ट (एएसए) की गणना और मरीजों की आयु और दूसरे कारकों आदि के अध्ययन से पता चलता है कि शाम और देर रात की गई आपातकालीन शल्य चिकित्सा में ज्यादा मृत्युदर रही।

टेस्सलर ने कहा कि शल्य चिकित्सा के 30 दिन बाद अस्पताल की मृत्युदर में बेहोश करने और दूसरे कारकों को भी खतरे में शामिल किया गया। इस शोध का प्रकाशन पत्रिका ‘वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ सोसाइटीज ऑफ एनेस्थिसियोलाजिस्टस’ और वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ एनेस्थिसियोलॉजिस्ट में (डब्ल्यूसीए) किया गया है।