लंदन: जन्म के समय बच्चों के कम वजन से संबंधित एक अध्ययन में पाया गया कि जिन बच्चों का वजन जन्म के समय कम होता है. उनकी मांसपेशियों में आक्सीजन आपूर्ति की क्षमता कमजोर हो सकती है. जन्म के समय शिशुओं में वजन की कमी को दूर करने की रणनीति के महत्व को जोर देने वाले एक अध्ययन में यह बात सामने आयी है. अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार स्वस्थ रहने के लिए कार्डियो- रेस्पिरेटरी फ़िटनेस बहुत महत्वपूर्ण होता है और यह विभिन्न बीमारियों तथा समय पूर्व होने वाले मौत के जोखिम को कम कर सकता है. इन अनुसंधानकर्ताओं में स्वीडेन के कोरोलिंस्का संस्थान के शोधकर्ता भी शामिल हैं. Also Read - Lockdown in MP Indore: इंदौर में तेजी से बढ़ी ऑक्सीजन की मांग, बनाई गई कमेटी; 19 अप्रैल तक बढ़ाया गया लॉकडाउन

हालांकि, उन्होंने बताया कि व्यायाम के दौरान मांसपेशियों को ऑक्सीजन की आपूर्ति करने के लिए शरीर की यह क्षमता विश्व स्तर पर युवाओं और वयस्कों दोनों में कम हो रही है. यह अध्ययन जर्नल आफ अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में प्रकाशित हुआ है. इसमें यह अवलोकन किया गया है कि क्या गर्भावस्था के 37वें से 41 वें हफ्ते में जो पैदा हुए हैं, उनके कार्डियो रेस्पिरेटरी फिटनेस में जन्म के समय कम वजन भूमिका अदा करता है. Also Read - इंग्लैंड में आईपीएल टूर्नामेंट की मेजबानी करना चाहते हैं लंदन के मेयर सादिक खान

Coronavirus: सर्दी-खांसी वाले व्यक्ति से रहें दूर, जरूर जानें बचाव से जुड़ीं 10 अहम बातें Also Read - बिहार में कारनामा: मृत डॉक्टर को प्रमोशन कर बनाया सिविल सर्जन, विधानसभा में जोरदार हंगामा

इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने 17 से 24 साल के दो लाख 80 हजार पुरूषों को शामिल किया . इस अध्ययन में उन्होंने स्वीडिश जनसंख्या आधारित रजिस्टर का इस्तेमाल किया. उन्होंने पाया कि जिन बच्चों का जन्म के समय वजन अधिक था उन्होंने साइकिल एर्गोमीटर के फिटनेस जांच में बेहतर प्रदर्शन किया. साइिकल एर्गोमीटर एक ऐसी साइिकल है जिसमें ऐसे उपकरण लगे हैं जो किसी व्यक्ति के किये गये काम को मापता है. अध्ययन के अनुसार जन्म के समय 40 हफ्ते में जन्म लेने वाले जिन बच्चों का वजन 450 ग्राम अधिक था उनमें साइिकल पर काम करने की क्षमता अधिकतम थी.