नई दिल्ली: चिकित्सकों का कहना है कि एड्स से संबंधित मौतों व नये संक्रमणों में कमी जरूर आ रही है लेकिन इसे खत्म करने की प्रक्रिया तेज नहीं हो पा रही है. चिकित्सकों के मुताबिक, वायरस का इलाज करने और इसे बड़े बच्चों में फैलने से रोकने संबंधी कार्यक्रम वहां नहीं हैं, जहां उन्हें होना चाहिए. Also Read - पुरुष से महिला बनीं डॉक्टर किन्नरों के साथ भीख क्यों मांग रही हैं? कहानी भावुक कर देने वाली है

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हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा कि एचआईवी वायरस रिजर्वोयर सेल्स में छिपा रहता है. इस कारण से, एचआईवी संक्रमण, जो एंटीरेट्रोवाइरल दवाओं (एआरटी) के साथ में है, एआरटी बंद होते ही फिर से सक्रिय हो जाता है. इन छिपी हुई रिजर्वोयर सेल्स को खत्म करना इसलिए आवश्यक है ताकि उपचार हो सके. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक आज बेहतर तरीके जानते हैं, उनके पास ज्ञान और तकनीक दोनों हैं, जिससे इस रोग के इलाज खोजने की उम्मीदें जागती हैं. एचआईवी या एड्स विभिन्न जन जागरूकता अभियानों, अत्याधुनिक चिकित्सा हस्तक्षेप और विकसित तकनीक की उपलब्धता के बावजूद भारतीय आबादी को प्रभावित कर रहा है. Also Read - खूबसूरत नर्स को Sex के लिए ब्लैकमेल करता था डॉक्टर, नर्स ने हत्या कर आग में पकाया शरीर

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दुनिया में एचआईवी के 5 लाख मामले जानकारी में नहीं

डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा कि इसका एक बड़ा हिस्सा उस सामाजिक कलंक के कारण भी है जो हमारे समाज ने इस बीमारी से जोड़ रखा है. यह भी एक कारण है कि लोग नियमित जांच कराने से बचते हैं. इस तथ्य के साथ विभिन्न रोग निवारण उपायों के बारे में आम जनता को शिक्षित करने की तत्काल आवश्यकता है, ताकि एचआईवी से पीड़ित लोग सामान्य जीवन जी सकें. यूनिसेफ की रिपोर्ट में 2030 तक 14 लाख एचआईवी संक्रमित बच्चों की संख्या में कमी के वैश्विक लक्ष्य का हवाला दिया गया है. हालांकि, 19 लाख की अनुमानित संख्या से पता चलता है कि दुनिया में लगभग 5,00,000 मामलों की जानकारी नहीं है.

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गर्भवती महिलाएं जरूर कराएं एचआईवी परीक्षण

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि एचआईवी किसी संक्रमित महिला से उसके बच्चे तक गर्भावस्था और प्रसव के दौरान फैल सकता है. यह स्तनपान के माध्यम से एक मां से उसके बच्चे में भी जा सकता है. सभी गर्भवती माताओं को एचआईवी परीक्षण करवाना चाहिए. यौन पार्टनर या नशा करने वाले पार्टनर के मामले में, गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान मां से शिशु तक इस रोग को फैलने से रोकने के लिए जल्द से जल्द एंटीरेटरोवाइरल थेरेपी शुरू की जानी चाहिए.

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एचआईवी को लेकर इन बातों पर करें अमल

डॉ. अग्रवाल ने कुछ अन्य तथ्यों पर प्रकाश डाला जो कि निम्नलिखित हैं.

* सुरक्षित सेक्स के लिए एबीसी : एब्सटेन यानी संयम, बी फेथफुल यानी अपने साथी के प्रति वफादार रहें और कंडोम का प्रयोग करें.

* शराब पीने या ड्रग्स लेने से जांच प्रभावित हो सकती है. यहां तक कि जो लोग एड्स के जोखिमों को समझते हैं और सुरक्षित सेक्स का महत्व भी जानते हैं, वे भी नशे की हालत में लापरवाह हो सकते हैं.

* एसटीआई वाले लोगों को शीघ्र उपचार की तलाश करनी चाहिए और संभोग से बचना चाहिए या सुरक्षित सेक्स का अभ्यास करना चाहिए.

* प्रयुक्त संक्रमित रेजर ब्लेड, चाकू या उपकरण जो त्वचा को काटते या छेदते हैं, उनमें एचआईवी फैलने का कुछ जोखिम भी होता है.

* एचआईवी पॉजिटिव लोगों को खुद चाहे पता न लगे, फिर भी वे अनजाने में वायरस को दूसरों तक पहुंचा सकते हैं.

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