
Shweta Bajpai
नमस्कार, मैं श्वेता बाजपेई, वर्तमान में India.com हिंदी में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हूं. हिंदी पत्रकारिता में लगभग 10 वर्षों के अनुभव के दौरान मैंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एंटरटेनमेंट ... और पढ़ें
पिछले कुछ समय से बहुत से मरीज लगातार खांसी, गले में कुछ फंसा हुआ महसूस होना, बार-बार गला साफ करने की आदत, आवाज़ भारी होना, सीने में जलन और खासकर सुबह के समय ज्यादा खांसी की शिकायत लेकर आ रहे हैं. हालांकि इस बार की खांसी कुछ अलग सी महसूस हो रही है, लोगों को गले में खिंचाव सा महसूस हो रहा है. डॉ. आदित्य नाग (सहायक प्रोफेसर, श्वसन चिकित्सा विभाग, एनआईआईएमएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, ग्रेटर नोएडा) ने बताया कि खांसी अक्सर वायरल के बाद संवेदनशील हो जाने, नाक से गले में पानी गिरने, पेट के एसिड के ऊपर आने या धूल-धुएं जैसी चीज़ों से जलन होने के कारण होती है. मौसम में बदलाव, बढ़ता वायु प्रदूषण और बार-बार होने वाले वायरल इस समस्या को और बढ़ा रहे हैं.
प्रमुख कारण-
डॉ. आदित्य नाग ने बताया कि सर्दी-जुकाम या फ्लू ठीक होने के बाद कई लोगों को लंबे समय तक खांसी बनी रहती है. इसका कारण वायरल के बाद सांस की नलियों की अंदरूनी परत बहुत नाज़ुक हो जाती है. ऐसे में ठंडी हवा, धूल या हल्की-सी जलन से भी खांसी शुरू हो जाती है. इस तरह की खांसी 3 से 8 हफ्तों तक रह सकती है, वहीं बढ़ता वायु प्रदूषण जैसे धुआं , धूल और स्मॉग सीधे फेफड़ों और गले को नुकसान पहुंचाते हैं. इससे अंदर सूजन आ जाती है , ज्यादा बलगम बनने लगता है और गले में कुछ फंसा-सा महसूस होता है.
अगर लंबे समय तक रहे तो सांस की एलर्जी या अस्थमा की समस्या भी बढ़ सकती है. कई बार खांसी की वजह नाक से जुड़ी समस्या होती है , जिसे पोस्ट नेजल ड्रिप कहते हैं. इसमें नाक या साइनस का पानी गले के पीछे गिरता रहता है , जिससे रात और सुबह के समय खांसी ज्यादा होती है. कुछ लोगों में पेट का एसिड ऊपर आकर गले तक पहुंच जाता है, जिससे सूखी खांसी, गले में जलन और आवाज़ बैठने की समस्या होती है, भले ही सीने में जलन महसूस न हो, इसके अलावा कम पानी पीना , धूम्रपान करना या धुएं के संपर्क में रहना भी गले और सांस की नलियों को सूखा देता है , जिससे खांसी बार-बार होने लगती है.
कब सतर्क होना है?
खांसी 8 सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे , रात में नींद न आना, सांस फूलना, खांसी के साथ खून आना, वजन तेजी से घटना या बार-बार सीने में संक्रमण होना तो यह संकेत हो सकता है कि मामला अस्थमा , टीबी , क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, इंटरस्टिशियल लंग डिजीज या लंग इंफेक्शन से जुड़ा हो सकता है. ऐसे में तुरंत रोग विशेषज्ञ से जांच आवश्यक है.
जांच और उपचार-
आवश्यकता अनुसार Chest X-ray , Pulmonary Function Test PFT, एलर्जी प्रोफाइल या एसिड रिफ्लक्स की जांच कराएं.
बचाव-
खांसी और गले की परेशानी से बचने के लिए रोज़ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत ज़रूरी है, ताकि सांस की नलियों में नमी बनी रहे. बाहर जाते समय धूल और धुएं से बचने के लिए मास्क का इस्तेमाल करें अगर एलर्जी की समस्या हो तो दवाइयां खुद से न लें, बल्कि डॉक्टर की सलाह से ही लें, जिन लोगों को एसिडिटी या खट्टी डकार की परेशानी रहती है, उन्हें देर रात खाना खाने से बचना चाहिए, ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाना कम करना चाहिए और सोते समय सिर थोड़ा ऊंचा रखकर सोना चाहिए. बिना डॉक्टर से पूछे एंटीबायोटिक या खांसी की सिरप लेना नुकसान पहुंचा सकता है. भाप लेना और गरारे करना आराम देने में मदद करता है, लेकिन इसे इलाज का पूरा विकल्प नहीं समझना चाहिए.
समय पर सही कारण की पहचान और विशेषज्ञ उपचार से इसे प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है. मरीजों को चाहिए कि वे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और आवश्यकता पड़ने पर रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें.
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