नयी दिल्ली: बच्चों में आंत के कृमि संक्रमण को रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी के स्कूलों को आठ फरवरी को कृमि निवारण कार्यक्रम चलाने का निर्देश दिया है. यह पहल वृहद स्तर पर चलने वाले द्विवार्षिक कृमि निवारण कार्यक्रम का हिस्सा है. Also Read - Delhi Nursery Admissions 2021 Date: दिल्ली में इस दिन से शुरू होगी Nursery के लिए एडमिशन प्रक्रिया, जानें इससे जुड़ी तमाम जानकारी

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Healthy बच्‍चों के पेट में पाए जाने वाले बैक्‍टीरिया फूड-एलर्जी से करते हैं बचाव, रिसर्च में दावा

शिक्षा निदेशालय ने स्कूल के प्रधानाचार्यों को भेजे गए एक संदेश में कहा है कि स्कूल जाने वाले नर्सरी से 12वीं तक के सभी बच्चों को ‘एलबेंडाजोल’ की एक खुराक दी जाएगी. इसमें बताया गया है कि स्कूलों को इसके लिए प्रधान शिक्षक नामित करना होगा. इसमें कहा गया है कि एलबेंडाजोल एक सुरक्षित दवाई है. और दुर्लभ रूप में ही ऐसे मामले आए हैं जब बच्चों पर इसका विपरित प्रभाव पड़ा है. कृमि निवारण कार्यक्रम का पहला चरण आठ फरवरी को होगा जबकि दूसरा चरण 14 फरवरी को होगा.

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पेट में कीड़े होने के कारण

1. जिन पर हम ध्यान नहीं देते है जैसे- छोटे बच्चों द्वारा घर में या इधर-उधर पड़ी चीजों को खा लेने से, मिट्टीद्वारा, दूषित पानी पीने से, घाव में सड़न होने से, घाव या चोट का मक्खियों या अन्य दूषित वस्तुयों के संपर्क में आने से, दूषित वातावरण में रहने या जाने से आदि.

2. इसके अलावा जो लोग स्वास्थ्य के नियमों, शुद्ध पानी और शुद्ध पेय का सेवन नहीं करते हैं वह लोग पेट के कीड़ों से ज्यादा पीड़ित होते हैं ये मल, कफ, रक्त (खून) के साथ शरीर के बाहर निकल जाते हैं छोटे कृमि (कीड़ों) को ‘चुनने’ और बडे़ कृमि (कीड़े) को ‘पटेरे’ कहते हैं.

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