लंदन: अनुसंधानकर्ताओं ने मानव उदर में दो हजार अनजान प्रजातियों का पता चलाया. इससे मानव स्वास्थ्य को बेहतर ढंग से समझने और उदर रोगों के निदान एवं उपचार में भी मदद मिल सकती है. यूरोपियन मोलेक्यूलर बायोलोजी लेबोरेटरी और वेलकम सैंगर इंस्टीट्यूट के अनुसंधानकर्ताओं ने जीवाणुओं की जिन प्रजातियों की खोज की है उन्हें अभी तक प्रयोगशाला में विकसित नहीं किया गया है.

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अनुसंधानकर्ताओं ने दुनिया भर में व्यक्तियों से मिले नमूनों के विश्लेषण के लिए गणन विधियों का इस्तेमाल किया. विज्ञान पत्रिका ‘नेचर’ में प्रकाशित अध्ययन के नतीजे दिखाते हैं कि अनुसंधानकर्ता उत्तर अमेरिकी और यूरोपीय समुदायों में आम तौर पर पाए जाने वाले माइक्रोबायोम्स से मिलते जुलते माइक्रोब की एक समग्र सूची बनाने के करीब हैं, लेकिन दुनिया के दूसरे क्षेत्रों से आकंड़े उल्लेखनीय रूप से गायब हैं. मानव उदर में ‘माइक्रोब’ की ढेर सारी प्रजातियां रहती हैं और सामूहिक रूप से उन्हें ‘माइक्रोबायोटा’ के तौर पर जाना जाता है.

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कर रहें ये काम
इस क्षेत्र में गहन अध्ययन के बावजूद अनुसंधानकर्ता अब भी माइक्रोब की एक एक प्रजाति को पहचानने और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि मानव स्वास्थ्य में उनकी क्या भूमिका है. मानव उदर से बाहर नहीं टिक पाने से इस दिशा में ज्यादा दिक्कत हुई है. यूरोपियन मोलेक्यूलर बायोलोजी लेबोरेटरी के रॉब फिन ने बताया कि हम देख रहे हैं कि यूरोपीय और उत्तर अमेरिकी आबादियों में ढेर सारी प्रजातियां उभर कर आ रही हैं.
वेलकम सैंगर इंस्टीट्यूट के ग्रुप लीडर ट्रेवर लॉली ने बताया कि इस तरह के अनुसंधान हमें मानव उदर का तथाकथित ब्ल्यूप्रिंट तैयार करने में मदद कर रहे हें जो भविष्य में मानव स्वास्थ्य और रोग को बेहतर ढंग से समझने में और यहां तक की उदर रोगों के निदान और उपचार में मदद कर सकते हैं.

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