वियाग्रा की छोटी सी खुराक, इस जानलेवा बीमारी से करती है बचाव

रोजाना वियाग्रा की छोटी सी खुराक, कोलोन कैंसर से बचाव कर सकती है.

Published date india.com Published: March 20, 2018 1:37 PM IST
viagra small dose cut risk of colon cancer | वियाग्रा की छोटी सी खुराक, इस जानलेवा बीमारी से करती है बचाव

नई दिल्ली: यौन समस्याओं में इस्तेमाल होने वाली दवा ‘वियाग्रा’ के बारे में एक शोध रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह एक जानलेवा बीमारी कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव में भी कारगर है. यह अध्ययन अमेरिका स्थित ऑगस्ट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है. शोधकर्ताओं का कहना है कि रोजाना वियाग्रा की मामूली खुराक लेने से कोलोरेक्टल कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है.

कोलोरेक्टल कैंसर दरअसल, पाचन तंत्र के निचले भाग पर स्थित कोलन या रेक्टम का कैंसर है. ऑगस्ट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता डारेन डी ब्राउनिंग के अनुसार आंत की परत पर कोशिकाओं के गुच्छे (पॉलिप्स) बन जाते हैं. वियाग्रा उनके निर्माण को घटाकर आधे से भी कम कर देती है. ये गुच्छे कैंसर का रूप ले सकते हैं.

क्लिनिकल ट्रायल

अध्ययनकर्ताओं ने यह नतीजा चूहों पर शोध के बाद निकाला है. अध्ययन के दौरान पानी में डालकर वियाग्रा देने से चूहे में पॉलिप्स घट गए. वियाग्रा की मामूली सी खुराक देने से इनमें मौजूद ट्यूमर की संख्या घट गई. कैंसर प्रीवेंशन रिसर्च नाम के जनरल में प्रकाशित शोध की रिपोर्ट के अनुसार इस खुलासे के बाद अब इसका ट्रायल उन लोगों पर किया जाएगा, जिन्हें कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा है.

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क्या है कोलोरेक्टल कैंसर

कोलोरेक्टल कैंसर को कोलन कैंसर या मलाशय कैंसर भी कहा जाता है. WHO की रिपोर्ट के अनुसार फेफड़ों के कैंसर के बाद दुनिया भर में होने वाला यह दूसरा सबसे आम कैंसर है. मलाशय में मौजूद अडेनोमाटोस पॉलिप्स नाम की कोशिकाएं धीरे-धीरे गुच्छे बनाने लगती हैं. हालांकि शुरुआत में यह कैंसर मुक्त होती हैं लेकिन समय के साथ इनमें से कुछ पॉलिप्स कोलोरेक्टल कैंसर बन जाते हैं. आंत की परत पर कोशिकाओं के गुच्छे (पॉलिप्स) बन जाते हैं. ये गुच्छे कैंसर का रूप ले सकते हैं. पॉलिस अक्सर छोटे होतें हैं औंर शुरुआत में इनके लक्षण दिखाई नहीं देते. लगातार स्क्रीनिंग टेस्ट कराने से ही इनका पता चल पाता है.

महिलाओं में ज्यादा होता है कोलन कैंसर

अनियमित, अनियंत्रित खान-पान और लाइफस्‍टाइल कोलन कैंसर होने का मुख्य कारण है. पुरुषों की तुलना में महिलाओं को कोलन कैंसर ज्यादा होता है. जो महिलाएं फाइबर वाले आहार कम लेती हैं उनमें कोलन कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है.

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कोलन कैंसर के लक्षण

डायरिया होने से कोलन कैंसर की आशंका बढ़ जाती हैं. डायरिया होना इसका प्रमुख लक्षण है. लंबे समय तक कब्‍ज की समस्या बनी रहने से कोलन कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है. कुुछ अन्य लक्षण इस प्रकार हैं.

– बार बार शौचालय जाना.

– दस्त.

– कब्ज.

– मल त्यागने के बाद भी दोबारा शौचालय जाने की इच्छा महसूस होना.

– मल में रक्त आना.

– पेट में दर्द.

– पेट फूला हुआ महसूस होना.

– उल्टी.

– थकान.

– वजन घटना.

– पेट के पिछले हिस्से में एक गांठ का होना.

– आयरन की कमी.

– मल में खून आना.

– खाना न पचना यानी अपच होना.

– पेट के निचले हिस्से में दर्द बने रहना.

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