लॉस एंजिलिस: अमेरिका के एक विश्वविद्यालय ने नए अध्ययन में दावा किया है कि शरीर में विटामिन-डी की ज्यादा मात्रा मेनोपॉज के बाद होने वाले स्तन कैंसर के खतरे को कम कर सकती है. तीन हजार से अधिक लोगोंपर रिसर्च के बाद ये बात सामने आई है. इस अध्ययन की खास बात ये है कि इसका प्रयोग 55 से 68 आयु वर्ग की उन महिलाओं पर किया गया जिनका मेनोपॉज हो चुका था.

सैन डिएगो स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के अनुसंधानकर्ताओं ने इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए दो अलग-अलग क्लीनिकल ट्रायल के आंकड़ों का विश्लेषण किया. शोधकर्ताओं ने बताया कि इस रिसर्च में तीन हजार तीन सौ पच्चीस लोग शामिल थे. जिन पर अध्ययन के बाद शोध पत्र तैयार किया गया. अध्ययन में शामिल सभी महिलाओं की आयु 55 वर्ष या उससे ज्यादा थी. उनकी औसत आयु 63 वर्ष थी. अध्ययन में शामिल हुई इन महिलाओं से आंकड़े 2002-2017 के बीच एकत्र किए गए हैं. जब अध्ययन शुरू किया गया था तो किसी भी प्रतिभागी को कैंसर नहीं था. इन सभी की जांच प्रति चार वर्ष में एक बार की गई. इस दौरान उनके रक्त में विटामिन डी की मात्रा जांची गई.

इस संयुक्त अध्ययन के दौरान 77 प्रतिभागियों में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सामने आए. प्रतिशत के अनुसार देखें तो प्रति एक लाख महिलाओं में से 512 महिलाओं को यह बीमारी हुई. अमेरिका के स्वास्थ्य सलाहकारी समूह के अनुसार, अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि रक्त में विटामिन डी की स्वस्थ मात्रा 60 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर होनी चाहिए. नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिसिन की ओर से 2010 में दी गयी सलाह के अनुसार, सामान्य तौर पर रक्त में विटामिन डी की मात्रा कम से कम 20 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर होनी चाहिए.

अध्ययन में शामिल प्रोफेसर सेड्रिक एफ. गारलैंड का कहना है कि अध्ययन में हमने पाया कि जिनके रक्त में विटामिन-डी की मात्रा 60 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर से ज्यादा थी. उन्हें अन्य के मुकाबले ब्रेस्ट कैंसर का खतरा महज 20 प्रतिशत था. हालांकि गारलैंड ने यह स्पष्ट तौर पर कहा कि यह अध्ययन सिर्फ मेनोपॉज से गुजर चुकी महिलाओं के साथ किया गया है. रक्त में विटामिन-डी के स्तर का प्रभाव प्री-मेनोपॉजल महिलाओं पर पड़ता है या नहीं अभी इसका अध्ययन करना शेष है.
(इनपुट एजेंसी)