
Digpal Singh
साल 2005-2006 में माखनलाल चतुर्वेदी युनिवर्सिटी से PGDM करने के बाद दो वर्ष तक कई अखबारों के लिए फ्रीलांसर के तौर पर काम किया. साल 2008 में लाइवहिंदुस्तान (HT Media) ... और पढ़ें
जन्मदोष (Birth Defects) असल में स्ट्रक्चरल और फंक्शनल एबनॉर्मेलिटीज हैं. इसमें मेटाबोलिक डिसऑर्डर भी शामिल हैं. यह मानव शरीर की संरचना से संबंधित ऐसी समस्याएं हैं, जो व्यक्ति में जन्मजात होती हैं. जन्मदोष बहुत ही आम हैं और इलाज की दृष्टि से यह बहुत महंगे भी होते हैं. यह ऐसी असामान्य स्थितियां होती हैं, जिनकी वजह से व्यक्ति स्वयं तो परेशान होता ही है, उसका पूरा परिवार भी भारी परेशानियों का सामना करता है. मार्च ऑफ डाइम्स ग्लोबल रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में हर साल 7.9 मिलियन यानी 79 लाख बच्चे गंभीर जन्मदोषों के साथ पैदा होते हैं. इनमें से भी 94 फीसद जन्मदोष के मामले मध्यम और कम इनकम वाले देशों में सामने आते हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और MOD की ज्वाइंट मीटिंग रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में बच्चों की मृत्यु के मामलों में 7 फीसद जन्मदोष से जुड़े होते हैं. भारत की बात करें तो हमारे देश में 1000 बच्चों में से 61-69 बच्चे किसी न किसी प्रकार के जन्मदोष के साथ पैदा होते हैं. अमेरिका में भी हर 33 में से एक बच्चा जन्मदोष के साथ पैदा होता है.
जन्मदोष शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है. यह शारीरिक बनावट, काम करने की क्षमता और दोनों को ही प्रभावित कर सकता है. जन्मदोष बहुत ही मामूली भी हो सकते हैं, जिनका व्यक्ति की नॉर्मल जिंदगी पर बहुत ही कम असर पड़ता है और यह बहुत ही गंभीर भी हो सकता है, जिसकी वजह से व्यक्ति पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर हो सकता है. वैसे बच्चे पर जन्मदोष का कितना और क्या असर होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि यह बर्थ डिफेक्ट शरीर के किस हिस्से में है. जन्मदोष की वजह से व्यक्ति के लंबे समय तक जीवित बचे रहने पर भी असर पड़ता है.
जन्मदोष की पहचान जन्म से पहले यानी गर्भस्त शिशु में, जन्म के समय और जन्म के बाद भी किसी समय हो सकती है. जन्म के बाद पकड़ में आने वाले ज्यादातर जन्मदोषों की पहचान पैदा होने के बाद पहले ही वर्ष में हो जाती है. कुछ प्रकार के जन्म दोष जैसे कटे होंट स्पष्ट रूप से नजर आते हैं, जबकि कुछ अन्य जैसे दिल से जुड़ी अनियमितता या सुनने में दिक्कत जैसे जन्मदोषों का कुछ विशेष टेस्ट की मदद से पता लगाया जाता है. इसमें इकोकार्डियोग्राम, एक्स-रे और हीयरिंग टेस्ट भी शामिल हैं.
जन्मदोष किसी महिला की गर्भावस्था के पहले चरण में ही पैदा हो सकते हैं. ज्यादातर जन्मदोष गर्भावस्था के पहले तीन माह में ही हो जाते हैं, क्योंकि यही वह समय है, जब गर्भ में बच्चे का शरीर एक शेप ले रहा होता है. यह गर्भ में बच्चे के विकास का बहुत ही महत्वपूर्ण चरण है. हालांकि, कुछ जन्मदोष गर्भावस्था के अगले चरणों में भी पनप सकते हैं. दरअसल गर्भावस्था के अंतिम 6 महीनों में बच्चे के अंग और उत्तक उगते हैं और विकास क्रम चलता रहता है.
कुछ जन्मदोष जैसे फीटल एल्कोहल सिंड्रोम के कारणों के बारे में डॉक्टर जानते हैं. लेकिन ज्यादातर जन्मदोष ऐसे हैं, जिनके बारे में आज भी डॉक्टरों को भी कुछ जानकारी नहीं है. ज्यादातर जन्मदोषों के पीछे कई कारणों का जटिल मिश्रण है. इसमें हमारे जीन्स भी शामिल हैं, जो हमें हमारे माता-पिता से मिलते हैं. इसमें हमारा व्यवहार और पर्यावरणीय कारण भी शामिल होते हैं. लेकिन डॉक्टर आज भी यह स्पष्ट रूप से यह कहने में असमर्थ हैं कि जन्मदोषों का कारण क्या है. कुछ कारण हैं जो बर्थ डिफेक्ट की वजह बन सकते हैं –
गर्भावस्था के दौरान इनमें से कोई भी एक या दो रिस्क फैक्टर होने का यह मतलब कतई नहीं है कि आपके बच्चे में जन्मदोष हो सकता है. यहां तक कि जिन महिलाओं में इनमें से कोई भी रिस्क फैक्टर नहीं होता है, उनके बच्चे में भी जन्मदोष होने का खतरा होता है. इसलिए जरूरी है कि आप अपने डॉक्टर से बात करते रहें और इस तरह के खतरे को कम करने के लिए जो किया जा सकता है वह जरूर करें.
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