
Digpal Singh
साल 2005-2006 में माखनलाल चतुर्वेदी युनिवर्सिटी से PGDM करने के बाद दो वर्ष तक कई अखबारों के लिए फ्रीलांसर के तौर पर काम किया. साल 2008 में लाइवहिंदुस्तान (HT Media) ... और पढ़ें
Brain Tumor: मस्तिष्क यानी दिमाग में कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि को ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है. ब्रेन ट्यूमर कई प्रकार के होते हैं. इनमें से कुछ कैंसर रहित यानी बिनाइन (Benign) होते हैं, जबकि कुछ ट्यूमर कैंसर से संक्रमित यानी मलिग्नेंट (Malignant) होते हैं. ब्रेन ट्यूमर की शुरुआत आपके मस्तिष्क में ही होती है, जबकि कैंसर (Cancer) शरीर के किसी भी हिस्से में शुरू हो सकता है और फिर शरीर के अन्य हिस्सों के साथ ही मस्तिष्क तक भी पहुंच सकता है. जब कैंसर शरीर के किसी अन्य हिस्से में शुरू होकर मस्तिष्त तक पहुंचता है तो इसे सेकेंडरी (Metastatic) ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है.
ब्रेन ट्यूमर की बढ़ने की रफ्तार अलग-अलग हो सकती है और अलग-अलग ब्रेन ट्यूमर में बढ़ने की रफ्तार में बहुत बड़ा अंतर हो सकता है. ब्रेन ट्यूमर की ग्रोथ और यह मस्तिष्क के किस हिस्से में हुआ है, इसका असर तंत्रिका तंत्र पर काफी असर पड़ता है. ब्रेन ट्यूमर का इलाज इसके प्रकार, आकार और मस्तिष्क के किस हिस्से में है, इन सभी बातों पर निर्भर करता है.
ब्रेन ट्यूमर कई प्रकार के होते हैं. मस्तिष्क के किस हिस्से में ट्यूमर हुआ है, उसके अनुसार ब्रेन ट्यूमर के अलग-अलग प्रकार होते हैं. यहां हम आपको ब्रेन ट्यूमर के कुछ प्रकार बता रहे हैं.

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण मुख्यत: इसके आकार पर निर्भर करते हैं. इसके अलावा ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क के किस हिस्से में है और इसकी ग्रोथ की रफ्तार क्या है, इन बातों का भी ब्रेन ट्यूमर के लक्षणों दिखने पर असर पड़ता है. आमतौर पर ब्रेन ट्यूमर के लक्षण निम्न होते हैं.
अगर ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण आपको बार-बार नजर आ रहे हों या लंबे समय से नजर आ रहे हों तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं और यदि ब्रेन ट्यूमर है तो उसका निदान करें और जल्द से जल्द इलाज करवाएं.

मस्तिष्क में पनपने वाला कैंसर रहित ब्रेन ट्यूमर – आमतौर पर ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क में या उसके आसपास के उत्तकों में पनपता है. जैसे मस्तिष्क को ढकने वाली झिल्लियां (Brain-Covering Membranes) जैसे मेनिंजेस, क्रैनियल नर्व, पिट्यूटरी ग्लैंड और पिनियल ग्रंथि में ब्रेन ट्यूमर की शुरुआत होती है.
प्राइमरी ब्रेन ट्यूमर तब शुरू होता है, जब कुछ सामान्य कोशिकाएं अपने डीएनए में परिवर्तन (Mutation) करके असामान्य रूप से विकसित होने लगती हैं. बता दें कि कोशिका के डीएनए में वह निर्देश छिपे होते हैं, जो उसे निर्देशित करते हैं कि उन्हें क्या करना है. म्यूटेशन, कोशिकाएं को बढ़ने और तेजी से विभाजित होने का निर्देश देते हैं और जब यह सेल बढ़ने लगते हैं तो स्वस्थ कोशिकाएं मरने लगती हैं. इस तरह से असामान्य कोशिकाएं इकट्ठा होने लगती हैं, जिसे ट्यूमर कहा जाता है.
बता दें कि वयस्कों में प्राइमरी ब्रेन ट्यूमर आम नहीं है, बल्कि सेकंडरी ब्रेन ट्यूमर के मामले ज्यादा आते हैं. सेकंडरी ब्रेन ट्यूमर का मतलब है कि कैंसर कोशिकाएं पहले शरीर के किसी अन्य भाग में बनीं और फिर वह बढ़ते-बढ़ते ब्रेन तक पहुंच गईं. ब्रेन ट्यूमर कई प्रकार के होते हैं और प्रत्येक का नाम इनमें शामिल कोशिकाओं के प्रकार के आधार पर अलग-अलग होता है.
किसी भी तरह का कैंसर मस्तिष्क तक पहुंचकर ब्रेन ट्यूमर का कारण बन सकता है, लेकिन निम्न कुछ कैंसर हैं जो ब्रेन तक आसानी से पहुंच जाते हैं –
प्राइमरी ब्रेन ट्यूमर के ज्यादातर मरीजों में ट्यूमर का कारण स्पष्ट नहीं होता. लेकिन डॉक्टरों में कुछ रेसिक फेक्टर का पता लगाया है, जो ब्रेन ट्यूमर के रिस्क फैक्टर बढ़ा सकते हैं.
रेडिएशन के संपर्क में आना – जो लोग आयोनाइजिंग रेडिएशन के संपर्क में आते हैं उनमें ब्रेन ट्यूमर का खतरा ज्यादा होता है. आयोनाइजिंग रेडिएशन के उदाहरणों में कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली रेडिएशन थेरेपी और एटॉम बम आते हैं.
अगर आपके परिवार में ब्रेन ट्यूमर का इतिहास रहा है तो आपको ब्रेन ट्यूमर का खतरा ज्यादा है.
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