
Shweta Bajpai
नमस्कार, मैं श्वेता बाजपेई, वर्तमान में India.com हिंदी में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हूं. हिंदी पत्रकारिता में लगभग 10 वर्षों के अनुभव के दौरान मैंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एंटरटेनमेंट ... और पढ़ें
देश में कैंसर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. कैंसर एक जानलेवा बीमारी है. कैंसर के कई प्रकार होते हैं, इनमें कुछ बेहद घातक होते हैं. दुनियाभर में होने वाली कुल मौतों में दूसरा सबसे बड़ा कारण कैंसर ही है. कोलोरेक्टल कैंसर भी कैंसर का रूप है इसे कोलन कैंसर कहते हैं. आमतौर पर, कोलन कैंसर 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में सबसे अधिक होता है. आइए इसके बारे में डॉक्टर अर्चित पंडित से जानते हैं.
सनर इंटरनेशनल हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम के डायरेक्टर एंड एच. ओ. डी., सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, डॉक्टर अर्चित पंडित ने बताया कि कोलन कैंसर दरअसल बड़ी आंत का कैंसर है, यह मानव शरीर का वह हिस्सा है जहां से मल शरीर से बाहर निकलता है. ऐसे में यदि कोलन कैंसर के लक्षणों की बात करें तो कुछ इस प्रकार के लक्षण देखने को मिलेंगे.
-लाल या काला मल आना
-सॉलिड खाने के बजाय द्रव युक्त भोजन का चुनाव करना, जो कि इस बात का संकेत है कि बड़ी आंत में विकसित हुआ ट्यूमर रुकावट पैदा कर रहा है
-पेट फूलना, या पेट में पानी भरना
-भूख न लगना
-अचानक वजन घटना
कोलोन कैंसर को कैंसर ऑफ़ द वेस्ट कहा जाता है क्योंकि इसकी सबसे ज्यादा तादात वहीं देखने को मिलती है. इसका कारण है अत्याधिक नॉन-वेज का सेवन, लेकिन बीते कुछ दशकों में यह भारत में भी देखने को मिल रहा है इसका कारण है खान-पान में लापरवाही, खाने में अत्यधिक जंक गुड, फास्ट फ़ूड, आदि. इसके साथ ही अस्वस्थ जीवनशैली भी इसका कारण है, और इसमें आता है मोटापा, जिसकी समस्या आजकल वयस्कों से लेकर बच्चों तक में देखने को मिल रही है, जो कि बहुत ही चिंताजनक है.
याद रखें कोलोन कैंसर का संबंध विशेष रूप से खान-पान से है, और उसमें भी रेड मीट का अत्यधिक सेवन जोखिम भरा हो सकता है. यानी कि ऐसे में कोलोन कैंसर से बचाव संभव है और स्वस्थ जीवन शैली, नियमित जांच व खान-पान की मदद से इससे बचा जा सकता है.
जांच के लिए काला मल, या खून वाला मल जैसे लक्षणों के आधार पर डॉक्टर मरीज़ का स्टूल फॉर ऑकल्ट ब्लड टेस्ट कर सकते हैं (इस जांच से एक सप्ताह पहले तक मीट का सेवन बंद करने की सलाह दी जाती है), इसके अलावा कोलोन कैंसर की पुष्टि होने पर पेट सीटी, एमआरआई आदि की सलाह दी जाती है. साथ ही जिन परिवारों में कोलोन कैंसर की फैमिली हिस्ट्री को उन्हें ये सभी जांच करवानी चाहिए.
इलाज की यदि बात करें तो व्यक्ति के कोलोन कैंसर की स्टेज के अनुसार उसका इलाज किया जाता है. यहाँ यह याद रखें स्टेज-4 कोलोन कैंसर का भी इलाज संभव है, जिसमें रोगी की स्थिति के अनुसार कीमोथेरेपी, सर्जरी आदि शामिल होस सकते हैं. किसी भी लक्षण को नज़रंदाज़ न करते हुए जल्द से जल्द जांच व इलाज करवाएं.
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