Perimenopause क्या है? पेरिमेनोपॉज के लक्षण, कारण और इलाज जानें

पीरियड्स महिलाओं के जीवन का अहम हिस्सा हैं. यही वह प्राकृतिक प्रोसेस है, जो उन्हें मां बनने का सुख भी देती है. लेकिन एक समय आता है जब पीरियड्स बंद हो जाते हैं. आज जानिए पेरिमेनोपॉज के बारे में सब कुछ

Published date india.com Updated: January 19, 2024 11:37 AM IST
perimanopause Woman in glasses
महिलाओं के जीवन का एक बहुत ही अहम हिस्सा पीरियड्स (Periods) आना होता है. लेकिन जैसे-जैसे महिलाओं की उम्र बढ़ती है और वह 45-50 वर्ष की उम्र के करीब पहुंचती हैं, उनका पीरियड्स आना बंद होने लगता है. इस स्थिति को मेनोपॉज (Menopause) या हिंदी में रजोनिवृत्ति कहा जाता है. यह महिलाओं के जीवन में एक बड़े बदलाव को दर्शाता है. इसका मतलब है कि अब उन्हें पीरियड्स नहीं आएंगे और वह मां भी नहीं बन सकतीं. मेनोपॉज के साथ शारीरिक और भावनात्मक बदलाओं से भी महिला को गुजरना पड़ता है.
पेरिमनोपॉज क्या होता है – What is perimenopause?
प्रश्न ये है कि पेरिमेनोपॉज क्या होता है? जब मेनोपॉज का समय करीब हो तो उसे पेरिमेनोपॉज कहा जाता है. पेरिमेनोपॉज का समय 2 से 10 वर्ष तक का हो सकता है. इस दौरान कभी पीरियड्स होते हैं, कभी नहीं होते. इस दौरान महिलाओं के शरीर में निम्न परिवर्तन होते हैं.
  • ओवरी या अंडाशय से अंडे रिलीज करने की फ्रिक्वेंसी कम हो जाती है. यानी पहले महीने में एक अंडा रिलीज होता था तो अब 2-3 महीने में ऐसा होता है.
  • पेरिमेनोपॉज के दौरान महिलाओं का शरीर एस्ट्रोजेन और अन्य हार्मोन्स का उत्पादन कम कर देता है.
  • इस समय महिलाओं की प्रजनन क्षमता कम हो जाती है.
  • पेरिमेनोपॉज के दौरान पीरियड्स अनियमत हो जाते हैं और ब्लीडिंग भी कम दिनों के लिए होती है.
पेरिमेनोपॉज का कारण – What causes perimenopause?
पेरिमनोपॉज को लेकर घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है. क्योंकि यह एक नेचुरल प्रोसेस है, इस दौरान आपके अंडाशय (Ovaries) धीरे-धीरे काम करना बंद करने लगता है. पेरिमेनोपॉज के दौरान ओव्यूलेशन यानी अंडाशय से अंडे रिलीज करने की रफ्तार धीमी या अनियमित हो सकती है और फिर रुक जाती है. मासिक धर्म का चक्र लंबा हो जाता है यानी कई महीनों तक पीरियड्स नहीं होते और पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग भी अनियमित हो जाती है.
शरीर में होने वाले बदलावों की वजह से पेरिमेनोपॉज के लक्षण दिखते हैं. जब एस्ट्रोजेन का स्तर ज्यादा होता है तो आपको प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम जैसे लक्षण महसूस होंगे. लेकिन जब एस्ट्रोजेन का स्तर कम होगा तो आपको हॉट फ्लैशेस और रात में पसीना आने की समस्या हो सकती है. इस तरह के हार्मोनल बदलाव नॉर्मल साइकल के साथ मिक्स हो सकते हैं.

पेरिमेनोपॉज के लक्षण – Symptoms of Perimenopause?

पेरिमेनोपॉज के कई लक्षण होते हैं, लेकिन यह भी ध्यान देने वाली बात है कि किन्ही भी दो महिलाओं को इसके एक जैसे लक्षण महसूस नहीं भी हो सकते. आमतौर पर निम्न लक्षण महसूस हो सकते हैं –
  • मूड में बदलाव (Mood changes)
  • संबंध बनाने की इच्छा में बदलाव (Changes in sexual desire)
  • ध्यान लगाने में कठिनाई (Trouble concentrating)
  • सिरदर्द (Headaches)
  • रात में पसीना आना (Night sweats)
  • हॉट फ्लैशेस
  • गुप्तांग में सूखापन (Vaginal dryness)
  • सोने में परेशानी होना (Trouble with sleep)
  • जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द (Joint and muscle aches)
  • बहुत अधिक पसीना आना (Heavy sweating)
  • बार-बार पेशाब आना (Having to pee often)
  • प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम जैसे लक्षण (PMS-like symptoms)
पेरिमेनोपॉज के ये लक्षण अन्य समस्याओं में भी नजर आ सकते हैं. इसलिए सलाह दी जाती है कि इस तरह के लक्षण महसूस होने पर अपनी डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें और समस्या का निदान करवाएं.

पेरिमेनोपॉज का निदान कैसे होता है – How is perimenopause diagnosed?

कई बार महिलाओं को यह समझ ही नहीं आता कि जो लक्षण वह महसूस कर रही हैं, वह पेरिमेनोपॉज के हैं. आपके लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री, आपकी उम्र और शारीरिक जांच के बाद ही आपकी डॉक्टर पेरिमेनोपॉज का निदान या पुष्टि कर सकती हैं. आपकी डॉक्टर और ज्यादा पुष्टि के लिए ब्लड टेस्ट कर सकती हैं, जिसमें आपके हार्मोन्स के स्तर की जांच की जाएगी.

पेरिमेनोपॉज का इलाज कैसे होता है – How is perimenopause treated?

समझने की बात यह है कि पेरिमेनोपॉज कोई बीमारी नहीं है, जिसका इलाज किया जाए. इसमें इलाज की कोई  आवश्यकता नहीं होती है. अगर लक्षण सहनशक्ति से ज्यादा हों तो जरूर डॉक्टर कुछ इलाज कर सकते हैं. उसमें शामिल हैं –
  • हार्मोन थेरेपी, जिसमें डॉक्टर हार्मोन के लेवल को नियंत्रित करने के लिए एस्ट्रोजेन या प्रोजेस्टिन्स दे सकते हैं.
  • मूड को ठीक करने के लिए एंटीडिप्रेसेंट्स दे सकते हैं.
  • इसके अलावा आपकी डॉक्टर आपको अपने लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करने को कह सकती हैं, जैसे –
    • हेल्दी डाइट लें, जिसमें फल, सब्जियां और साबुत अनाज हो
    • डाइट या सप्लीमेंट के जरिए रोज 1000 से 1200 mg कैल्शियम लें
    • नियमित तौर पर एक्सरसाइज करें
    • हॉट फ्लैश के कारण (शराब, चाय, कॉफी) की तलाश करें और उसका सेवन बंद कर दें.
    • इसके अलावा आपकी डॉक्टर आपको कुछ हर्बल प्रोडक्ट्स भी दे सकती हैं.

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