क्या बढ़ता वजन बन रहा है खर्राटों की वजह? जानिए फैट और स्लीप का कनेक्शन

बढ़ता वजन सिर्फ आपकी शेप नहीं बिगाड़ता, बल्कि आपकी नींद की गुणवत्ता पर भी असर डालता है. मोटे लोगों में खर्राटे आने की संभावना दोगुनी होती है, क्योंकि शरीर में जमा चर्बी सांस की नली को संकीर्ण कर देती है. जानिए कैसे मोटापा आपकी नींद में बाधा बनता है और क्या हैं इसके उपाय.

Published date india.com Published: October 28, 2025 8:25 AM IST
क्या बढ़ता वजन बन रहा है खर्राटों की वजह? जानिए फैट और स्लीप का कनेक्शन

मोटापा से मानो शरीर का अंग-अंग प्रभावित होता है. इसका बुरा असर नींद में रेस्पिरेटरी सिस्टम पर भी पड़ता है. डॉ. आशीष गौतम (सीनियर डायरेक्टर – जनरल, लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज, दिल्ली) ने बताया कि मोटे लोगों में ज्यादा खर्राटे का एक मुख्य कारण शरीर में अधिक फैट जमा होना है, जिसके चलते एनाटॉमिकल और फिजियोलॉजिकल बदलाव आते हैं. इस बदलाव से ऊपर के एयरवे में रुकावट का खतरा बढ़ता है, जो खर्राटे और ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) की खास वजह है.

एयरफ्लो में अस्थिरता-

डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि फैट का जमाव गर्दन और गले के आसपास होने से ऊपर का एयरवे सिकुड़ जाता है. इसी तरह फेरिंक्स और सॉफ्ट पैलेट के इर्द-गिर्द के टिशू में फैट बढ़ने से एयरवे का डायमीटर कम हो जाता है. ऐसे में नींद के दौरान जब मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं तो यह स्ट्रक्चर अपने-आप कोलैप्स हो जाता है. रिसर्च से पता चलता है कि ओएसए का खतरा सामान्य वज़न वाले लोगों की तुलना में मोटे या बहुत ज्यादा मोटे लोगों में लगभग दोगुना हो जाता है. एयरवे थोड़ा भी ब्लॉक हो तो एयरफ्लो में अस्थिरता आ जाती है और इससे उत्पन्न कम्पन्न से शोर पैदा होता है. यही खर्राटे की आवाज़ है.

खर्राटे की एक अन्य बड़ी वजह पेट या मध्य भाग में ज्यादा फैट होना है. पेट के अंदर फैट का जमाव बढ़ने से छाती की दीवारों का मूवमेंट कम हो जाता है, फेफड़ों का वॉल्यूम भी कम हो जाता है. ऐसे में ऊपर के एयरवे पर नीचे की ओर खिंचाव (कॉडल ट्रैक्शन) कमजोर पड़ जाता है. इस बदलाव से नींद के दौरान एयरवे की स्थिरता कम हो जाती है और इसका कोलैप्स होना आसान हो जाता है. यहीं वजह है कि पेट का मोटापा फेफड़ों की क्षमता कम करती है और एयरवे के कोलैप्स होने का खतरा बढ़ाती है. लोग अधिक खर्राटे लेने लगते हैं.

हो सकते हैं ये कारण-

मोटापा से कई अन्य अंदरूनी समस्याएं होती हैं जैसे हार्मोनल और मेटाबॉलिक बदलाव जिससे खर्राटे का खतरा और बढ़ जाता है. ध्यान रखें, फैट टिशू भी निष्क्रिय नहीं रहते हैं. वे एडिपोकाइन्स और इन्फ्लेमेटरी साइटोकिन्स जैसे पदार्थों का स्राव करते हैं. मोटे लोगों में लेप्टिन, ग्रेलिन और अन्य हार्मान के स्तर में बदलाव आने से नींद के दौरान ऊपर के एयरवे की मांसपेशियां का नियंत्रण नहीं रह जाता है. एक तो मैकेनिकल बर्डन और ऊपर से न्यूरोमस्कुलर रेगुलेशन में बदलाव. कुल मिला कर बार-बार खर्राटे और नींद में खुल कर सांस नहीं आने की समस्या बढ़ जाती है.

Add India.com as a Preferred SourceAdd India.com as a Preferred Source

बढ़ता मोटापा बन रहा है समस्या-

महामारी विज्ञान के संदर्भ में देखें तो भारत में यह मुद्दा और गंभीर दिखता है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (2019-21) की रिपोर्ट के आंकड़े भी कम चिंताजनक नहीं हैं. भारत के लगभग हर चार में से एक पुरुष या महिला मोटापा से परेशान है. राज्यों की बात करें तो यह अनुपात 8 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक है. वज़न बढ़ने की समस्या आम हो चली है. लाजमी है खर्राटा लेने और ओएसए से परेशान लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. यह समस्या और गंभीर हो रही है क्योंकि भारत में शारीरिक काम-व्यायाम का चलन कम हो रहा है. इस संबंध में द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में 2022 में एक शोध प्रकाशित किया गया और इसका उल्लेख विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) जैसे संगठन भी करते हैं. यह कहता है कि लगभग 50 प्रतिशत भारतीय सुझावों के अनुसार शारीरिक श्रम-व्यायाम नहीं करते हैं. इस जीवनशैली में गर्दन और पेट के आसपास फैट जमा होता है, जिससे नींद में सांस लेने में कठिनाई बढ़ सकती है.

हो सकती हैं ये गंभीर समस्याएं-

क्लिनिकली भी खर्राटे को गंभीरता से लेना जरूरी है. इसे बस सबकी नींद में खलल डालने वाला शोर मानना बड़ी भूल साबित हो सकती है. बार-बार ज़ोरदार खर्राटा नींद के दौरान पीड़ित व्यक्ति के ऊपर के एयरवे में रुकावट की चेतावनी हो सकती है और इससे दिन में हमेशा थकान, ध्यान कम लगना और मूड खराब रहना जैसी तमाम समस्याएं पैदा हो सकती हैं. हालांकि अधिक चिंताजनक बात यह है कि खर्राटे और ओएसए का कार्डियोवैस्कुलर बीमारी, हाइपरटेंशन, टाइप 2 डायबिटीज़ और मेटाबोलिक सिंड्रोम से भी गहरा संबंध है.

इन बातों पर दें ध्यान-

इसके उपचार का पहला कदम वज़न कम करना है. आज इस बात का प्रमाण है कि थोड़ा सा भी वज़न कम कर लेने से ऊपर का एयरवे बहुत बेहतर काम करने लगता है. गर्दन और गले के आसपास एडिपोज टिशू कम होने से एयरवे में रुकावट का खतरा कम हो जाता है.

लाइफस्टाइल में सुधार करें, फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाना, प्रोसेस्ड फ़ूड कम खाना और पोषक तत्वों से भरपूर चीज़ें खाना और कम समय बैठ कर, लेट कर रहना. आप ये तमाम अच्छी आदतें डाल कर फैट काफी कम कर सकते हैं.

कुछ और व्यावहारिक उपाय हैं जिनसे बेहतर नींद आएगी. यह ध्यान रखें कि पीठ के बल सोना उचित नहीं है क्योंकि इसमें जीभ और नरम तालू का एयरवे में कोलैप्स हो सकता है. बिस्तर के सिरहाने को ऊपर उठाने से ऊपर के एयरवे में बाधा कम हो सकती है.

शराब और अन्य नशा कम कर देने से गले की मांसपेशियों को आराम पहुंचेगा. गर्दन और कमर की मोटाई पर ध्यान दें तो यह राज निकल कर सामने आता है. गर्दन का मोटा या कमर का बड़ा होना अक्सर एयरवे में खतरा पैदा करता है.

अधिक वजन और ज़ोर से खर्राटे लेने वाले लोगों में ओएसए की जांच करना जरूरी है. स्लीप स्टडी की जरूरत पड़ सकती है यदि सांस फूलने, एपनिया या दिन में बहुत ज्यादा नींद आने जैसे लक्षण हों. समस्या का जल्दी पता लग जाए तो वज़न कम करने के उपाय करने के साथ-साथ कई अन्य प्रतिकार किए जा सकते हैं जैसे कंटीन्यूअस पॉज़िटिव एयरवे प्रेशर (सीपीएपी), ओरल अप्लायंसेज या पोजीशनल थेरेपी आदि.

भारत में मोटापा और उसके चलते नींद और सांस की तकलीफ के मामले बढ़ रहे हैं. इसे देखते हुए यह जरूरी है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ और पीड़ित-परेशान लोग अधिक जागरूक हो जाएं. यदि कोई व्यक्ति मोटा है और अधिक खर्राटे लेता है तो इसे समस्या नहीं मानने की भूल नहीं करे. बेहतर होगा खतरे को भांप कर उचित कदम उठाएं. इससे एयरवे की मांसपेशियों पर बेहतर नियंत्रण होगा. आप हेल्दी लाइफ़स्टाइल अपना कर सांस की सेहत का ध्यान रखेंगे तो इससे जुड़ी अन्य जटिल समस्याओं से भी बचेंगे.

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें Health की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.