नई दिल्ली. संयुक्त राष्ट्रसंघ (United Nation) के अनुसार, दुनिया के सभी देश वर्ष 2030 तक भुखमरी की समस्या से निजात पाने का संकल्प ले चुके हैं. लेकिन आज भी 81 करोड़ से ज्यादा की आबादी एक टाइम का खाना खाकर भूखे पेट बिस्तर पर जाने को मजबूर है. यानी विश्व के कई देशों के लोगों को आज भी दो जून की रोटी मयस्सर नहीं है. दिन में एक बार तो उन्हें किसी तरह भोजन मिल जाता है, लेकिन उनकी रात बिस्तर पर भूखे रहकर ही कटती है. वहीं इसके उलट, दुनिया में करीब 2 अरब लोगों की ऐसी आबादी है जो ज्यादा वजन यानी ओवरवेट (overweight) की समस्या से जूझ रही है. खान-पान का ये विरोधाभासी आंकड़ा आज की कड़वी सच्चाई है, जिसे देखते हुए भुखमरी की समस्या से निजात पाना बेहद मुश्किल लगता है. हम इस मुद्दे पर कितने भी गंभीर क्यों न हो जाएं, लेकिन भोजन की बर्बादी नहीं रुक रही है. आज विश्व खाद्य दिवस (World Food Day) है. आइए आज संकल्प लें कि खाद्य पदार्थों की बर्बादी को रोकेंगे. क्योंकि हो सकता है कि आप जो खाना बेकार समझकर फेंक रहे हों, उसे बचाने से वह किसी और के काम आ जाए. Also Read - World Food Day 2020: इस दिन मनाया जाएगा वर्ल्ड फूड डे, कुछ ऐसा है इसका इतिहास और प्रभाव

World Food Day के मौके पर संयुक्त राष्ट्रसंघ ने दुनिया के सभी सदस्य देशों की सरकारों, आम लोगों, निजी कंपनियों से अपील की है कि वे खाद्य पदार्थों की बर्बादी (Wastage of Food) रोकने के लिए आगे आएं. संयुक्त राष्ट्रसंघ ने ZERO HUNGER यानी कोई भी भुखमरी का शिकार न हो, इसके लिए हर देश के नागरिकों के लिए कुछ सुझाव दिए हैं. इसे अमल में लाने से न सिर्फ खाने की बर्बादी रुकेगी बल्कि वर्ष 2030 तक ZERO HUNGER का संकल्प भी पूरा हो सकेगा. संयुक्त राष्ट्रसंघ ने अपनी सलाह में कहा है कि जितनी जरूरत उतना खाएं, आसान जीवनशैली के लिए हेल्दी-डाइट लें और खाना कम से कम बर्बाद हो, इस फॉर्मूले को अपनाने की जरूरत है. विश्व खाद्य दिवस पर संयुक्त राष्ट्रसंघ ने आम लोगों से जो अपील की है, उसकी प्रमुख बातें कुछ यूं हैं- Also Read - पीएम नरेंद्र मोदी इस दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा को कर सकते हैं संबोधित, 75 साल में पहली बार होने जा रहा है ऐसा

1- बासी खाना, यानी सामान्य खान-पान के दौरान जो बच जाता है उसे फेंके नहीं, बल्कि बाद में उसके इस्तेमाल पर जोर दें. Also Read - नेपाल को UN से मिला बड़ा झटका, विवादास्पद मानचित्र को मान्यता देने से किया इनकार!

2- हेल्दी-डाइट लें, यानी कोशिश करें कि आपके खाने-पीने की चीजें शुद्ध हो, ताकि उसे फेंकना नहीं पड़े. आप रोजाना इस्तेमाल में जो सब्जी, चावल, आटा, दाल या अन्य पेय पदार्थ लेते हैं, उसकी शुद्धता जांची-परखी होनी चाहिए. संयुक्त राष्ट्रसंघ का मानना है कि स्वास्थ्यवर्द्धक और पोषक-तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ का सही इस्तेमाल करने से भोजन की बर्बादी रुकती है और लोगों की सेहत भी ठीक रहती है.

3- घर में बचा हुआ खाना फेंकने के बजाए, किसी जरूरतमंद को दें. इससे भोजन की बर्बादी तो रुकेगी ही, किसी भूखे को निवाला मिल सकेगा. फूड-शेयरिंग से सामाजिक आचार-व्यवहार में भी समरसता आएगी. आजकल कई ऐसे संगठन भूख से निपटने को लेकर काम कर रहे हैं, जो किसी के घर से बचा हुआ खाना लेकर जरूरतमंदों तक पहुंचाते हैं. इस काम में कई राष्ट्रसंघ ने एक नए मोबाइल एप्लीकेशन OLIO के बारे में बताया है जिसकी मदद से लोग अपने पड़ोसियों के साथ घर का खाना शेयर करते हैं. इससे भोजन की बर्बादी रुकती है.

4- उतना ही खरीदें जितनी जरूरत हो. संयुक्त राष्ट्रसंघ का मानना है कि जरूरत के हिसाब से खरीदारी से अतिरिक्त अन्न की बर्बादी रुकेगी और जरूरतमंदों को उनके हिस्से का खाना मिल पाएगा.

5- खाद्य पदार्थों को ज्यादा लंबे समय तक इस्तेमाल करने के लिए उनका सही तरीके से भंडारण जरूरी है. इसलिए अगर आपके घर में फ्रिज है या बचे हुए खाने को सही तरीके से रखने की व्यवस्था है तो संयुक्त राष्ट्रसंघ की सलाह पर अमल करें.