नई दिल्ली: विश्व श्रवण दिवस यानी वर्ल्‍ड हियरिंग डे हर साल तीन मार्च मनाया जाता है. बता दें कि देश में हर साल पैदा होने वाले 27,000 से अधिक शिशुओं में बहरेपन की शिकायत रहती है, जिससे उनका विकास अवरुद्ध हो जाता है. लेकिन इनकी पहचान अगर आरंभ में हो जाए तो इलाज आसान हो जाता है. इसके लिए युनिवर्सल न्यूबोर्न हियरिंग स्क्रीनिंग (यूएनएसएस) से नवजात शिशुओं में श्रवण शक्ति की पहचान आसानी से की जा सकती है. बस इसके लिए माता-पिता को जागरूक करने की जरूरत है. Also Read - Early detection of deafness will be treated easier | वर्ल्ड हियरिंग डे: शुरुआत में हो बहरेपन की पहचान तो उपचार होगा आसान

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चिकित्‍सकों के मुताबिक, माता-पिता व परिजनों को किसी श्रवण शक्ति कम होने से संबंधित तकलीफों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कोक्लियर इंप्लांट एक व्यक्ति को खामोशी से आवाज की दुनिया में ले जाता है. यह जीवन को बदलने वाला क्षण है. कई विकसित देशों में हर नवजात शिशु के लिए हियरिंग स्क्रीनिंग कराई जाती है. भारत को भी यूनिवर्सल न्यू बॉर्न हियरिंग स्क्रीनिंग को अनिवार्य बनाने पर विचार करना चाहिए. चिकित्सकों ने बताया कि दुनियाभर में लगभग 36 करोड़ लोग सुन नहीं सकते. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 50 लाख से ज्यादा आबादी बहरेपन की समस्या से पीड़ित है. विश्व की करीब 5 फीसदी आबादी सुनने से लाचार है.

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समय पर रोग की पहचान जरूरी

देश में सुनने से लाचार नौजवानों की बड़ी आबादी है जिससे उनकी शारीरिक और आर्थिक सेहत पर भी असर पड़ता है. चिकित्‍सक ने कहा कि समय से रोग की पहचान और बहरेपन का इलाज जरूरी है. अपने जीवन के प्रारंभिक चरण में मिली उचित सहायता से बच्चा अपनी कमी से उबरकर तेजी से बोलना और बातचीत करना सीख सकता है. इससे उसे समाज की मुख्य धारा का अंग बनने का भी मौका मिलता है.

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