नई दिल्ली: ये तो आप जानते ही होंगे की हमारे देश में हृदय रोगियों की संख्या पिछले सालों में काफी बढ़ी है. पर क्या आप जानते हैं कि हृदय से जुड़ा ऐसा कौन सा रोग है जिससे सबसे ज्यादा भारतीय पीड़ित हैं.Also Read - Bramha Mishra Died: मिर्जापुर में मुन्ना भईया की जान बचाने वाले ब्रम्हा मिश्रा का निधन, 3 दिन तक फ्लैट में सड़ती रही लाश

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हम बताते हैं. ये है IHD. यानी Ischaemic heart disease या इस्केमिक हृदय रोग. ये बात एक नए अध्ययन में सामने आई है. हृदय रोग के दुनियाभर में मामलों का करीब एक चौथाई हिस्सा अकेले भारत में होता है. दिल में खून की कम आपूर्ति इस बीमारी का प्रमुख लक्षण है. इस्केमिक हृदय रोग भारतीय मरीजों में हार्ट फेलियर का मुख्य कारण है. इस्केमिक हृदय रोग सबसे ज्यादा पंजाब, महाराष्ट्र, केरल और तमिलनाडु में पाए गए हैं, जबकि इनके बाद हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल का स्थान है. Also Read - Delhi: सीनियर कांग्रेस नेता अरविंदर सिंह का हार्ट अटैक से निधन, पंचतत्‍व में विलीन

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मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (नई दिल्ली) के सीनियर कंसल्टेंट (इंटर्वेन्शनल कॉर्डियोलॉजी) डॉ. विवेक कुमार ने कहा, ‘भारत में हृदय रोगों खासतौर से हार्ट फेल्योर को लेकर लोगों में जागरूकता काफी कम है. लोगों में हार्ट फेल्योर के बारे में बुनियादी समझ का आभाव है. यह एक बढ़ता रोग है, जोकि हार्ट की मांसपेशियों को कमजोर कर देता है और पूरे शरीर में रक्त पम्प करने की इसकी क्षमता को प्रभावित करता है. इसे अक्सर गलती से हार्ट अटैक समझ लिया जाता है, जोकि एक अचानक होने वाली कार्डिएक घटना है’.

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उन्होंने कहा, ‘हार्ट फेल्योर के अधिकतर मरीजों को रोग के एडवांस्ड स्टेज में अस्पताल में भर्ती कराया जाता है, क्योंकि वे लक्षणों को पहचान नहीं पाते और शुरूआती चरण में इसके उपचार के फायदों के बारे में पता नहीं होता. हमारे अस्पताल में किसी महीने में हार्ट रोगों से ग्रस्त सभी मरीजों में 30-40 फीसदी मरीज हार्ट फेल्योर के होते हैं, जिसमें युवा रोगी भी शामिल हैं’.

उन्होंने बताया कि खतरे का संकेत देने वाले सामान्य लक्षणों में दम फूलना, टखनों या पैरों या पेट में सूजन, सोते समय सही ढंग से सांस लेने के लिए ऊंचे तकियों की जरूरत होना और रोजाना के कामों के दौरान ऐसी थकान जिसका कारण समझ में न आए, शामिल हैं.

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कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के. शरत चंद्र ने कहा, ‘भारत में हार्ट फेलियर के बढ़ते बोझ और इससे जुड़ी उच्च मृत्यु-दर को देखते हुए, इसे जन स्वास्थ्य की प्राथमिकता माना जाना आवश्यक है. अक्सर, लोगों में इस रोग का पता तब चलता है जब उन्हें गंभीर लक्षणों या इससे जुड़ी दिल की मांसपेशियों की क्षति के चलते पहली बार अस्पताल में भर्ती कराया जाता है. इसलिए, जनता के बीच हार्ट फेल्यर के लक्षणों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है’.

अध्ययन में पाया गया कि 1990 से 2013 तक देश में हार्ट फेल्यर के मामले 140 फीसदी बढ़े हैं. जीवनशैली में बदलाव, तनाव की मार, नमक, चीनी और वसा की खपत और वायु प्रदूषण में तेजी से बढ़ोतरी के चलते इसकी जकड़ में आने वाला दायरा बढ़ रहा है, यहां तक कि युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. भारत में हार्ट फेलियर के रोगियों की औसत उम्र 59 वर्ष है जो अमेरिका और यूरोप के मरीजों की तुलना में लगभग 10 वर्ष कम है.

World Heart Day

लोगों को इस संबंध में जागरुक करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाता है.

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