नई दिल्ली: दुनिया भर में टीबी सबसे संक्रामक रोग बना हुआ है. विश्व स्वास्थ्य संगठन इस बात को लेकर चिंता में है. एक रिपोर्ट में इससे जुड़ी कई बातें कही गई हैं. Also Read - WHO की एक्‍सपर्ट टीम COVID-19 वायरस की उत्‍पत्ति का पता लगाने चीन के वुहान शहर में पहुंची

ट्यूबरक्लोसिस यानी टीबी आज भी विश्व का खतरनाक संक्रामक रोग बना हुआ है, लेकिन वर्ष 2000 के बाद वैश्विक प्रयासों की वजह से टीबी से हो सकने वाली लगभग 5.4 करोड़ मौतों को टाला जा सका है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मंगलवार को यह जानकारी दी. Also Read - भारत में कोरोना के टीकाकरण से पहले WHO की चेतावनी- दूसरा साल हो सकता है और कठिन

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ ने अपनी नवीनतम 2018 वैश्विक टीबी रिपोर्ट में कहा है कि विभिन्न देश 2030 तक इसे समाप्त करने के लिए अब भी कुछ ज्यादा नहीं कर रहे हैं. Also Read - क्या छिपा रहा चीन? Covid 19 की जांच कर रही WHO टीम की यात्रा पर लगाई रोक

डब्ल्यूएचओ ने इसके साथ ही देश व सरकार के 50 प्रमुखों को इस संदर्भ में निर्णायक निर्णय लेने के लिए कहा है. जोकि टीबी पर संयुक्त राष्ट्र की पहले उच्च स्तरीय बैठक में संभवत: अगले हफ्ते हिस्सा लेंगे.

क्या कहती है रिपोर्ट
रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले वर्षों में टीबी से मरने वालों की संख्या में कुछ कमी आई है. 2017 में एक अनुमान के मुताबिक 1 करोड़ लोगों को टीबी हुआ और इससे 16 लाख मौतें हुईं, जिसमें 3 लाख एचआईवी -पॉजिटिव लोग भी शामिल हैं. टीबी के नए मामले में 2 प्रतिशत की कमी आई है.

हालांकि टीबी मामले में बिना रिपोर्ट किए (अंडररिपोर्टिग) और बिना रोग-निदान (अंडर-डाइगनोसिस) के मामले एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं. 2017 में जिन 1 करोड़ लोगों को टीबी हुआ, उसमें केवल 64 लाख मामले ही आधिकारिक रूप से नेशनल रिपोर्टिग सिस्टम में दर्ज कराए गए, जिसमें से 36 लाख लोगों का या तो इलाज नहीं हुआ या रोग की पहचान हुई लेकिन इसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई.

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2030 तक टीबी समाप्त करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 2025 तक ट्रीटमेंट कवरेज को बढ़ाकर 64 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक करना होगा.
(एजेंसी से इनपुट)