World No-Tobacco Day 2020: कोरोना संक्रमण के चलते दुनिया पर मंडराते मौत के साये के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि धूम्रपान करने वालों को यह बीमारी होने का जोखिम अधिक रहता है और बीमारी की चपेट में आने पर उन्हें सघन चिकित्सा और वेंटिलेटर की जरूरत भी धूम्रपान न करने वालों के मुकाबले कहीं अधिक होती है.Also Read - Haryana में छूट के साथ 10 फरवरी तक बढ़ाई गईं कोरोना पाबंदियां, अब इस समय तक खुल सकेंगी दुकानें

वैश्विक वयस्क तंबाकू सर्वेक्षण (जीएटीएस) की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में 15 साल या उससे अधिक उम्र के करीब 30 करोड़ लोग तंबाकू का सेवन करते हैं. इनमें से लगभग 20 करोड़ लोग तंबाकू को गुटखा, खैनी, पान मसाला या पान के रूप में सीधे अपने मुंह में रख लेते हैं, जबकि दस करोड़ लोग ऐसे हैं जो सिगरेट, हुक्का या फिर सिगार में तंबाकू भरकर कश लगाते हैं और इसका धुआं अपने फेफड़ों में भर लेते हैं. दुनिया को तंबाकू के सेवन के दुष्प्रभावों के प्रति सजग करने और इसके प्रयोग को हतोत्साहित करने के इरादे से विश्व स्वास्थ्य संगठन की पहल पर हर वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है. Also Read - Maharashtra News: महाराष्ट्र में कब खुलेंगे पर्यटन स्थल? मंत्री आदित्य ठाकरे ने दिया बड़ा अपडेट

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के हॉस्पिटल बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. वी के मोंगा ने बताया कि धूम्रपान करने वाले लोगों के शरीर में मुंह से फेफड़ों तक को सुरक्षा देने वाली प्राकृतिक आंतरिक प्रणाली क्षतिग्रस्त हो जाती है और उनके फेफड़ों की हवा को साफ करने की क्षमता भी समय के साथ कम होती जाती है. ऐसे लोग सामान्य परिस्थितियों में भी लंबी सांस नहीं ले पाते हैं. ऐसे में जब ये लोग कोरोना के संपर्क में आते हैं तो इनपर बीमारी का असर अधिक होता है. Also Read - अच्छी खबर! दिल्ली में बीते दो हफ्तों में कोविड के एक्टिव मरीजों की संख्या में 50% से ज्यादा की कमी, बीते 24 घंटे में 7498 नए केस

इस बात पर सहमति जताते हुए कि धूम्रपान करने वालों को अन्य लोगों के मुकाबले सघन चिकित्सा और वेंटिलेटर की ज्यादा जरूरत होती है, डा. मोंगा ने कहा कि कोविड-19 मुख्यत: फेफड़ों को प्रभावित करने वाली बीमारी है, हालांकि अब तक यह पता नहीं लग पाया कि यह बीमारी फेफड़ों को कैसे प्रभावित करती है. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कोरोना का संक्रमण फेफड़ों पर डॉट्स बना देता है, जिससे उनमें ऑक्सीजन प्रवेश नहीं कर पाती और धूम्रपान के कारण पहले से कमजोर फेफड़े खून तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम नहीं कर पाते, जिससे मरीज की मौत हो जाती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि धूम्रपान और तंबाकू के बने अन्य उत्पादों का सेवन करने वालों को कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा अधिक होता है. यही नहीं कोविड-19 से मरने वालों में दिल की बीमारी, कैंसर, सांस की बीमारी अथवा मधुमेह के शिकार लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या धूम्रपान करने वालों की भी होती है.

दिल्ली मधुमेह अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॉ. ए के झींगन ने बताया कि किसी भी गंभीर बीमारी के शिकार लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य लोगों के मुकाबले कम होती है. ऐसे में वह किसी भी बीमारी की चपेट में जल्दी आते हैं. मोटापा, दमा, मधुमेह, दिल की बीमारी और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों के साथ ही धूम्रपान करने वाले लोगों के लिए कोविड-19 के अधिक घातक होने की बड़ी वजह यही है कि इनका शरीर वायरस के हमले का प्रतिरोध नहीं कर पाता और उनके फेफड़ों में पानी भरने और विभिन्न अंगों के निष्क्रिय होने के कारण तमाम तरह के इलाज और वेंटिलेटर के इस्तेमाल के बावजूद बीमारी जानलेवा हो जाती है.

जीएटीए की रिपोर्ट के अनुसार धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करने वाले आधे से ज्यादा लोग अपनी इस लत को छोड़ना चाहते हैं और प्रत्येक पांच में से दो लोग इसे छोड़ने की कोशिश भी करते हैं लेकिन अपने इरादे में कामयाब नहीं हो पाते. इस संबंध में डा. झींगन कहते हैं कि सिगरेट, बीड़ी, पान और गुटखा की सुलभ उपलब्धता इसे छोड़ने के इरादे में बाधक बन जाती है और कई बार मित्रों और सहयोगियों के दबाव में भी लोग इनका सेवन करते रहते हैं, लेकिन कुछ सप्ताह तक इसका सेवन नहीं करने से इसकी तलब कम होने लगती है और व्यक्ति इसे आसानी से छोड़ पाता है.