
Shweta Bajpai
नमस्कार, मैं श्वेता बाजपेई, वर्तमान में India.com हिंदी में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हूं. हिंदी पत्रकारिता में लगभग 10 वर्षों के अनुभव के दौरान मैंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एंटरटेनमेंट ... और पढ़ें
हेल्थ सेक्टर में कई शोध और अध्ययन हुए, जो नतीजे आए उसने क्रॉनिक बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी. लगातार कहा जा रहा है कि हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज जैसी शारीरिक दिक्कतें लाइफस्टाइल और आहार से जुड़ी हैं. कैंसर, हार्ट अटैक या फिर स्ट्रोक से मौत का सिलसिला इस साल भी जारी रहा. तो कुछ ऐसी संक्रामक बीमारियां भी पनपीं जिसने डब्ल्यूएचओ को हेल्थ इमरजेंसी तक लागू करने के लिए मजबूर किया. कोविड के नए वेरिएंट, बर्ड फ्लू और मंकीपॉक्स के अलावा डेंगू ने सबको विचलित किया.
मंकीपॉक्स और बर्ड फ्लू ने केवल भारत में ही नहीं पूरी दुनिया को परेशान किया. इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मंकीपॉक्स संक्रमण को वैश्विक महामारी घोषित कर दिया था.
अफ्रीका में एमपॉक्स के मामले 70,000 के करीब पहुंच गए. अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) ने बताया कि इस साल अब तक अफ्रीका में एमपॉक्स के मामलों की संख्या 69,000 को पार कर गई है, जबकि मरने वालों की संख्या 1,260 से अधिक हो गई है .
दुनियाभर में साल 2019-20 में शुरू हुई कोरोना महामारी का असर इस साल भी देखने को मिला. लगभग देश के हर राज्य से इस साल कोरोना के मामले सामने आए. कई नए वैरिएंट्स के बारे में दुनिया ने जाना, जिन पर समय रहते काबू पा लिया गया. साल की शुरुआत में कोरोना के नए वेरिएंट्स ने भी लोगों की चिंता बढ़ाई. पिछले साल तक कोविड दुनियाभर में एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई थी. विशेषज्ञों ने कोरोना के एक नए वेरिएंट जेएन.1 को लेकर दुनियाभर को चेताया.
अगस्त 2024 में जारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल 24 जून से 21 जुलाई के बीच भारत में कोविड-19 के 908 नए मामले सामने आए और दो मरीजों की इस बीमारी से मौत हुई. डब्ल्यूएचओ ने दुनिया को बताया कि 24 जून से 21 जुलाई के बीच, 85 देशों में हर सप्ताह कोरोना वायरस-2 के लिए औसतन 17,358 नमूनों का परीक्षण किया गया.
रिपोर्ट में कहा गया कि 96 देशों में 1,86,000 से अधिक नए मामले सामने आए और 35 देशों में 2,800 से अधिक लोगों ने जान गंवाई. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में कहा गया कि महामारी की शुरुआत से लेकर 21 जुलाई तक दुनिया भर में 77.5 करोड़ से अधिक मामलों की पुष्टि हुई है और 70 लाख से अधिक मरीजों की मौत हो चुकी है.
कोविड पीड़ितों को लेकर सूचना अमेरिका और यूरोपीय देशों से मिली. दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की बात करें तो थाईलैंड (6,704 नए मामले और 35 मौतें) में संक्रमण का असर सबसे ज्यादा दिखा. उसके बाद भारत (908 नए मामले और दो मौतें) और बांग्लादेश (372 नए मामले और एक मौत) का स्थान रहा.
रिपोर्ट में कहा गया कि वैश्विक स्तर पर जेएन.1 के मामले सबसे अधिक आए. इस वेरिएंट के मामले 135 देशों में पाए गए. इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के कोविड डैशबोर्ड के अनुसार, भारत के कई राज्यों में कोविड के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है.
अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, महाराष्ट्र, मेघालय, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में पांच प्रतिशत से ज्यादा का पॉजिटिविटी रेट देखने को मिला. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के अनुसार, अत्यधिक संक्रामक केपी.1 और केपी.2 स्ट्रेन हैं जो जेएन.1 ओमिक्रॉन वेरिएंट से विकसित हुए हैं. ये भारत में भी कोविड मामलों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार हैं.
कई तरह के शोधों में भी यह बात सामने आई कि इस नए वेरिएंट से काफी लोग प्रभावित हुए. साल का अंत आते आते बर्ड फ्लू ने भी भारत में दस्तक दे दी. राजस्थान के फलोदी जिले से बर्ड फ्लू को लेकर खबर आई. पक्षी कुरजां को मृत पाया गया. जांच के लिए पक्षी का विसरा भेजा गया. 21 दिसंबर को जांच रिपोर्ट में वायरस की पुष्टि हुई. वायरस की पुष्टि ने स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के भीतर चिंता पैदा कर दी , क्योंकि यह वायरस अन्य पक्षी प्रजातियों के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है.
इनके अलावा मच्छर के काटने से पनपे डेंगू ने भी लोगों को खूब परेशान किया. डब्ल्यूएचओ के वैश्विक डेंगू निगरानी आंकड़ों के अनुसार, इस साल अगस्त तक दुनिया भर में 12 मिलियन से अधिक मामले दर्ज हुए. वहीं इससे 6,991 लोगों की मौत भी हुई. डेंगू के मामले दोगुना दर्ज किए गए, पिछले साल 5.27 मिलियन मामले ही रिपोर्ट हुए थे.
input-आईएएनएस
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