नई दिल्ली: जीका संक्रमण के कारण गर्भपात हो सकता है. एक नए शोध में ये बात सामने आई है. शोध में कहा गया है कि जीका संक्रमण के कारण किसी महिला की गर्भावस्था में बाधा पड़ सकती है.Also Read - Zika Virus Outbreak: कितना खतरनाक है जीका वायरस? जानिए जीका वायरस और डेंगू के बीच अंतर | Watch Video

शोध की रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही इसका कोई लक्षण नजर ना आता हो, लेकिन यह गर्भपात और मृत शिशु के जन्म का कारण हो सकता है. जीका वायरस के कारण दिमागी विकृतियों वाले बच्चे पैदा होते हैं. इस समस्या को ‘माइक्रोसिफेली’ कहा जाता है. मनुष्यों में जीका संक्रमण होने पर बुखार, शरीर में चकत्ते, सिरदर्द, जोड़ों और मांसपेशी में दर्द, और आंखों में लाल रंग आना प्रमुख है. Also Read - Zika Virus in Lucknow: कानपुर के बाद अब लखनऊ पहुंचा जीका वायरस, दो मामले सामने आये

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हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (सीएफआई) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा कि डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की तरह ही जीका एक बड़ी जन-स्वास्थ्य समस्या है. जीका वायरस से संक्रमित कई लोग खुद को बीमार महसूस नहीं करते. यदि मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काटता है, जिसके खून में वायरस मौजूद है, तो यह किसी अन्य व्यक्ति को काटकर वायरस फैला सकता है.

उन्होंने कहा कि वायरस संक्रमित महिला के गर्भ में फैल सकता है और शिशु में माइक्रोसिफेली और अन्य गंभीर मस्तिष्क रोगों का कारण बन सकता है. डॉ. अग्रवाल ने कहा कि जीका वायरस संक्रमण के लिए कोई टीका नहीं है. उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की यात्रा पर जाने वालों, विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं का मच्छरों से भलीभांति बचाव करना चाहिए.

एचसीएफआई के कुछ सुझाव :
– जब एडिस मच्छर सक्रिय होते हैं, उस समय घर के अंदर रहें. ये मच्छर दिन के दौरान, सुबह बहुत जल्दी और सूर्यास्त से कुछ घंटे पहले काटते हैं.
– जब आप बाहर जाएं तो जूते, मोजे, लंबी आस्तीन वाली शर्ट और फुलपैंट पहनें.
– सुनिश्चित करें कि मच्छरों को रोकने के लिए कमरे में स्क्रीन लगी हो.
– ऐसे बग-स्प्रे या क्रीम लगाकर बाहर निकलें, जिसमें डीट या पिकारिडिन नामक रसायन मौजूद हों.
(एजेंसी से इनपुट)