नई दिल्ली/ भोपाल/ चंडीगढ़:  अपनी उपजों के वाजिब दाम, कर्ज माफी एवं अन्य मांगों को लेकर किसानों का 10 दिवसीय देशव्यापी ‘गांव बंद आंदोलन’ आज से शुरू हो गया है. राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के संयोजक शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्काजी ने दावा किया कि मध्यप्रदेश सहित देश के 22 राज्यों में इस आंदोलन में 130 से अधिक किसान संगठन शामिल हैं. आंदोलन के पहले दिन मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाण, राजस्थान, महाराष्ट्र, यूपी आदि राज्यों में किसानों ने सब्जियां फेंकी और दूध बहाकर शहरों में इन्हें भेजने से रोका.

किसान नेता कक्का जी ने कहा कि हमने भारत 10 जून तक 2 बजे तक भारत बंद रखने का निर्णय लिया है. उन्होंने व्यापारियों से दोपहर 2 बजे तक दुकानें बंद रखकर मंदसौर में पिछले साल पुलिस फायरिंग में मारे गए किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए कहा. इस किसान आंदोलन के चलते दूध, फल और सब्जियों की किल्लते आने वाले दिनों में देखने को मिल सकती है.

सरकार द्वारा इस आंदोलन को कांग्रेस का बताकर प्रचारित किए जाने को लेकर भी किसानों में नाराजगी है. राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा का कहना है कि सरकार किसानों की बात न करके आंदोलन को लेकर भ्रम फैलाने में लगी है. सवाल यह नहीं है कि यह आंदोलन किसका है, सवाल यह है कि किसानों की मांगें तो जायज हैं. सरकार को किसानों की मांगों को मानना चाहिए.

वहीं, दूसरी ओर, पुलिस और प्रशासन ने किसान आंदोलन के मद्देनजर ग्रामीण इलाकों से शहरी क्षेत्रों में आने वाले दूध विक्रेताओं, सब्जी विक्रेताओं पर खास नजर रखी है. जगह-जगह पुलिस बल की तैनाती की गई है. अर्ध सैनिक बलों की कंपनियां भी सुरक्षा के लिए बुलाई गई हैं.

ये हैं प्रमुख मांगें
राष्ट्रीय किसान महासंघ के संयोजक कक्काजी ने कहा कि देश के किसान मुख्य रूप से अपनी चार मांगों को लेकर आंदोलन पर हैं,

–  देश के समस्त किसानों का सम्पूर्ण कर्ज मुक्त करना, किसानों को उनकी उपज का डेढ़ गुना लाभकारी मूल्य मिलना

– अत्यंत लघु किसान, जो अपने उत्पादन विक्रय करने मंडी तक नहीं पहुंच पाते, उनके परिवार के जीवनयापन हेतु उनकी आय सुनिश्चित करना

– दूध, फल, सब्जी, आलू, प्याज, लहसुन, टमाटर इत्यादि का लागत के आधार पर डेढ़ गुना लाभकारी समर्थन मूल्य निर्धारित करना

– सभी फसलों को क्रय करने की सरकार द्वारा गारंटी का कानून बनाया जाना शामिल है.

आम किसान यूनियन के प्रमुख केदार सिरोही ने बताया, “किसान एकजुट हैं, वे अपना विरोध जारी रखे हुए हैं. ‘गांव बंद’ आंदोलन का असर साफ नजर आ रहा है. सरकार की हर संभव कोशिश है, इस आंदोलन को असफल करने की, लेकिन किसान किसी भी सूरत में सरकार के आगे झुकने को तैयार नहीं है.

– आंदोलन का सुबह से मिला-जुला असर नजर आ रहा है, वहीं पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं
– राजधानी भोपाल से लेकर मंदसौर और प्रदेश के अन्य हिस्सों में शुक्रवार को किसानों के आंदोलन का मिला-जुला असर दिखाई दिया
– दूध की आपूर्ति पर असर हुआ है, तो सब्जियां मंडियों तक आसानी से नहीं पहुंची हैं
– आंदोलन के पहले ही दिन सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं
– किसान आंदोलन का महानगरों पर ज्यादा असर नहीं है, लेकिन छोटे शहरों और कस्बों में किसान आंदोलन का व्यापक असर
– कई जगह दूध और सब्जियों की किल्लत साफ नजर आ रही है

– पंजाब के लुधियाना जिले के समराला में किसानों ने अपनी 10 दिनी आंदोलन किसान अवकाश के पहले दिन सड़कों पर दूध बहा दिया

– पंजाब के फरीदकोट में दूध, फल और सब्जियां फैला दी और किसानों के कर्जमाफी के साथ स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग की
– संभल में किसानों ने 10 दिन की हड़ताल किसान अवकाश की शुरुआत कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफरिशें लागू करने के लिए कहा