नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने संसद में सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए आरक्षण बिल पास होने के पांच दिन बाद इसे लागू कर दिया है. संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति के पास पहुंचा था, जिस पर उन्होंने शनिवार को साइन कर दिए. इस तर से सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सरकारी नौकरियों तथा शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का संवैधानिक प्रावधान सोमवार से प्रभाव में आ गया है. इस संबंध में सरकारी अधिसूचना जारी कर दी गई. संविधान (103 संशोधन) अधिनियम, 2019 को शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी मिल गई थी.

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार, ”संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार 14 जनवरी को उस तारीख के रूप में चिन्हित करती है, जिस दिन कानून के प्रावधान प्रभाव में आएंगे.

अधिनियम में संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 का संशोधन किया गया है और एक उपबंध जोड़ा गया है, जो राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर किसी भी वर्ग के नागरिकों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अधिकार देता है.

‘विशेष प्रावधान’ अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को छोड़कर अन्य निजी संस्थानों समेत शिक्षण संस्थानों में प्रवेश से जुड़ा है. इनमें सरकारी सहायता प्राप्त और गैर सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान शामिल हैं.

संसद ने 9 जनवरी को विधेयक को मंजूरी दी थी. विधेयक के उद्देश्यों के अनुसार, ”संविधान के अनुच्छेद 46 में उल्लेखित राज्य के नीतिनिर्देशक सिद्धांतों के अनुसार सरकार नागरिकों के कमजोर वर्गों, खासकर अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के शैक्षणिक और आर्थिक हितों को विशेष सतर्कता के साथ प्रोत्साहित करेगी और उन्हें सामाजिक अन्याय तथा हर तरह के उत्पीड़न से बचाएगी.” इसमें कहा गया है कि इसे ध्यान में रखते हुए कि नागरिकों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को उच्च शिक्षा पाने तथा सरकारी सेवाओं में रोजगार में भागीदारी का उचित अवसर मिले, भारत के संविधान में संशोधन का फैसला किया गया है.