100 Years of Essel Group: एस्सेल ग्रुप 100 साल का हो गया है. एस्सेल ग्रुप के 100 साल पूरे होने के मौके पर चेयरमैन और पूर्व राज्यसभा सदस्य डॉक्टर सुभाष चंद्रा (Dr. Subhash Chandra) ने शताब्दी का पूरा किस्सा सुनााया. उन्होंने बताया कि कैसे कई चुनौतियों के बावजूद एस्सेल ग्रुप ने बड़े मुकाम हासिल किये. डॉक्टर सुभाष चंद्रा ने कुछ ही मिनटों में पूरी सदी की कहानी सुना दी. उन्होंने बताया कि 42 साल की यात्रा तो मैंने भी सुनी ही है, लेकिन 58 साल की इस यात्रा में खुद शामिल रहा. उन्होंने कहा कि एस्सेल ग्रुप की 100 साल की जर्नी में हमने सीखा कि लोगों पर विश्वास से इसका चेन रिएक्शन शुरू होता है. जब हम किसी की जिंदगी बेहतर करते हैं तो कई लोगों की जिंदगी बेहतर होती है. यह एस्सेल ग्रुप की कहानी है. ग्रुप में ऐसे हजारों उदाहरण हैं. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि हमारे कर्मचारी कंपनी की इस सफलता को अगले 100 साल तक आगे ले जाएं. आप पुरानी सफलता का जश्न मनाएं और साथ ही नई सफलता को हासिल करें. हम कंपनी में स्टार्टअप जैसा कल्चर चाहते हैं, ताकि हम 24 घंटे, हफ्ते के सात दिन और साल के 365 तक आगे बढ़ सकें.
Essel Group के चेयरमैन डॉक्टर सुभाष चंद्रा ने कहा कि आज यहां खड़े होकर मैं करीब 8000 लोगों से बात कर रहा हूं. मैं खुद को किस्मतवाला समझता हूं जो यहां तक पहुंच सका और अपनी भावनाएं शेयर कर पा रहा हूं. उन्होंने कहा कि दोस्तों, ये 100 वर्ष की यादें या कहिए भावनाएं, यह अकेले चलने वाला सफर जो आज 10 हजार से ज्यादा व्यक्तियों का कारवां बन गया. उन्होंने कहा कि आज मैं आपको एस्सेल ग्रुप की 100 साल की यात्रा के बारे में तीन पार्ट्स में संक्षेप में बताऊंगा.
उन्होंने कहा कि जी के इम्पैक्ट और रीच के बारे में सभी जानते हैं. मैं यह शेयर करना चाहूंगा कि एस्सेल ग्रुप के जी से पहले के बिजनेसेस ने भी लाखों जिंदगियों को छुआ. यह सेना को फूड ग्रेन की सप्लाई से शुरू हुआ. करोड़ों टन फूड ग्रेन के लिए हमने स्टोरेज फैसिलिटी बनाई. ये उस समय की बात है जब ग्रीन रिवॉल्यूशन चल रहा था, लेकिन जो अनाज उगाया जा रहा था, उसे रखने की उचित व्यवस्था नहीं थी. हमने ट्रेडिशनल टेलीकॉम पोल्स बनवाए. हमने लेमिनेटेड ट्यूब्स बनाए. एस्सेल वर्ल्ड जिसने हमें लोगों से जुड़ने में हमारी मदद की, हमने तब के सोवियत यूनियन में फूड ग्रेन एक्सपोर्ट किया, जिसने हमारे ग्रुप के लिए सबसे ज्यादा पैसा कमाया.
इस सफर का दूसरा एस्पेक्ट है, आजादी से पहले के पंजाब का रहने वाले एक परिवार की कहानी, जिसने 1926 में जीरो से बिजनेस शुरू किया. मेसर्स राम गोपाल इंदरप्रसाद, वो अविभाजित पंजाब में फूड ग्रेन ट्रेड में एक बड़ी फर्म बनी. यह करीब 40 साल तक एक बेहतरीन बिजनेस बना रहा. 1967 में ग्रुप को 3.5 लाख का नुकसान हुआ. हालांकि, ग्रुप के पास काफी संपत्ति और जमीनें थीं. ये वो वक्त था जब परिवार में पहली बार बंटवारा हुआ. मेरे दादा का उनके भाइयों के साथ बंटवारा हुआ. मेसर्स राम गोपाल इंदरप्रसाद का नाम बदलकर सुभाष चंद्र लक्ष्मी नारायण हो गया.
इसके बाद चार भाइयों के जेनरेशन ने चार्ज लिया. ग्रुप ने 1981 में पहली बार एक साल में 100 करोड़ का कारोबार किया. मुझे याद है कि इस माइलस्टोन को मैंने दिल्ली के पंजाबी बाग स्थित अपने घर में सेलिब्रेट किया. तब एक साथी ने पूछा कि हम इस 100CR को आने वाले सालों में मेंटेन कैसे करेंगे? मैंने तब कहा कि चिंता मत करो. हम कई चीजें खोज लेंगे. हमारा बिजनेस और ग्रुप कभी भी 100 करोड़ से कम की कमाई नहीं करेगा और हम हमेशा ग्रो करेंगे. कहते हैं न कि शायद सरस्वती उस समय जुबान पर थी. यही हुआ कि ग्रुप ने एक दिन ऐसा भी देखा जब न्यूयॉर्क के वॉल स्ट्रीट जर्नल ने हमारे ग्रुप को भारत का सबसे अमीर ग्रुप बताया. यह 1998-99 की बात है.
उन्होंने बताया कि यह सफर बेहद एक्साइटिंग रहा, लेकिन रोलर-कोस्टर की तरह. दुर्भाग्य से 2008-09 में एक और सेपरेशन हुआ. बिजनेस का जो हिस्सा मैं लीड कर रहा था, उसने 2019 में बड़ा घाटा झेला, क्योंकि सेपरेशन के बाद उस हिस्से ने बड़ा नुकसान कैरी फॉरवर्ड किया था और मैंने भी गलत फैसले लिए. आज ग्रुप फिर से फाइनेंशियली अपवर्ड ट्रैजेक्टरी में है. यह एक नया पीक क्रिएट करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. 1998-2000 ग्रुप के लिए पीक था. मुझे यकीन है कि हम फिर से एक नई ऊंचाई को छुएंगे और उस ऊंचाई पर बने रहेंगे.
डॉक्टर सुभाष चंद्रा ने कहा कि इस सफर का एक भावनात्मक पहलू भी है. यह इंटरेस्टिंग होने के साथ-साथ चैलेंजिंग भी रहा. उतार-चढ़ाव से भरा रहा. ऐसा बड़ी यूनाइटेड फैमिलीज में होता है. सभी इंसान हैं और भारतीय परिवार का हिस्सा हैं, जहां इमोशन एक बड़ी भूमिका निभाते हैं. जीवन के इस पहलू से काफी कुछ सीखा जा सकता है. हो सकता है कि मैंने सीखा हो या शायद न सीखा हो. इसका फैसला दूसरे करेंगे और यह बेशक इतिहास में दर्ज किया जाएगा. हालांकि, मैं कहना चाहूंगा कि मैं नेगेटिव स्टैंड प्वाइंट से सबसे कम प्रभावित हुआ. ऐसा मैं विपश्यना की वजह से कर पाया. मैं कॉन्शियस हूं और ऐसे लोगों के प्रति मेरी संवेदना हमेशा रही है जो मेरे या ग्रुप के किसी एक्शन की वजह से नकारात्मक रूप से प्रभावित हुए हैं. दोस्तों आपने आज ‘चरैवेति-चरैवेति’ फिल्म देखी. चलना ही तेरी नियति. चरैवेति का मतलब है विश्वास के साथ आगे बढ़ो. विश्वास यहां कीवर्ड है. मैं आपको भरोसा देता हूं कि इस चुनौतीभरे वक्त में भी आप आगे बढ़ रहे हैं.
उन्होंने बताया कि दोस्तों मैंने अपने लिए पर्सनली कोई वेल्थ क्रिएट नहीं किया है. इस बात पर अक्सर बहस होती है. ग्रुप के दुश्मनों ने मुझपर आरोप लगाकर कॉर्पोरेट वर्ल्ड में मेरी छवि खराब करने की कोशिश की है. मुझ पर कमजोर कॉर्पोरेट गवर्नेंस के झूठे आरोप लगाए गए, लेकिन यह दिल छू लेने वाली बात है कि यही लोग ग्रुप की लगनशीलता, फाइट बैक करने की क्षमता, इसके विजन और जो छाप इसने छोड़ी है उसका लोहा मानते हैं. प्राइवेटली ये इसे एक्नॉलेज करते हैं.
उन्होंने कहा कि मैंने कुछ मिनटों में 100 साल की कहानी बताई. मैं चाहूंगा कि आप ग्रुप के सफर से जुड़े रीडिंग मटेरियल्स खोजें और उन्हें पढ़ें. इस ग्रुप के 100 साल के उतार-चढ़ाव से आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा. 100 साल के इस सफर से एक सीख यह भी मिलती है कि अक्सर जीवन का सबसे बड़ा इम्पैक्ट, इस समझ से आता है कि दूसरे लोग कितने मायने रखते हैं. जब मौके और भरोसे के साथ दया जुड़ती है तो चेन रिएक्शन बनता है. एक अपलिफ्टेड लाइफ दूसरों को अपलिफ्ट करती है. यह कहानी आपको बताएगी कि सफलता अपनी ऊंचाई को तब छूती है जब वह किसी और का भविष्य बनाती है.
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