नई दिल्‍ली: कांग्रेस के बुरे दिनों खत्‍म होने का नाम नहीं ले रहे हैं. लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है. तेलंगाना में कांग्रेस को उस समय बड़ा झटका लगा, जब उसके 12 विधायकों ने गुरुवार को विधानसभा अध्यक्ष पी श्रीनिवास रेड्डी से मुलाकात की और सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति के साथ कांग्रेस विधायक दल के विलय को लेकर उन्हें प्रतिवेदन दिया. इस झटकेे से कांग्रेस दक्षिण भारत के इस राज्‍य में लगभग खत्‍म होने की कगार पर पहुंच गई है. Also Read - West Bengal Updates: राज्‍यपाल ने CM ममता बनर्जी से कहा, संवैधानिक मानदंडों का पालन करें

तेलंगाना में कांग्रेस के 18 विधायकों में से 12 ने पार्टी का साथ छोड़कर सत्‍तारूढ़ पार्टी तेलंगाना राष्‍ट्र समिति में शामिल होने की घोषणा की है. कांग्रेस के इन विधायकों ने विधानसभा अध्‍यक्ष अध्‍यक्ष पोचराम श्रीनिवास रेड्डी से मुलाकात करके उन्‍हें तेलंगाना टीआरएस में शामिल करने की अपील की है. Also Read - HC ने दिल्‍ली सरकार से पूछा, क्या AAP MLA इमरान हुसैन को ‘रिफिलर’के जरिए ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई?

राज्य की 119 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस एमएलए की संख्या उस समय 18 रह गई थी, जब पार्टी की तेलंगाना इकाई के प्रमुख उत्तम कुमार रेड्डी ने नलगोंडा से लोकसभा में चुने जाने के बाद विधानसभा की सदस्यता से बुधवार को इस्तीफा दे दिया था.

तंदूर से कांग्रेस विधायक रोहित रेड्डी ने नाटकीय घटनाक्रम के तहत मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के बेटे और टीआरएस के कार्यवाहक अध्यक्ष के टी रामा राव से मुलाकात की और सत्तारूढ गठबंधन के प्रति अपनी वफादारी का संकल्प लिया. कांग्रेस के 11 विधायकों ने मार्च में घोषणा की थी कि वे टीआरएस में शामिल होंगे.

कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक जी वेंकट रमन रेड्डी ने बताया कि 12 विधायकों ने राज्य के विकास के लिए मुख्यमंत्री के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है. रेड्डी ने बताया कि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को एक प्रतिवेदन देकर टीआरएस में विलय का अनुरोध किया है.

रेड्डी ने कहा, कांग्रेस विधायक दल की हमारी एक विशेष बैठक हुई. इसके 12 सदस्यों ने मुख्यमंत्री केसीआर के नेतृत्व को समर्थन दिया और वे उनके साथ काम करना चाहते हैं. हमने अध्यक्ष को प्रतिवेदन दिया और उनसे टीआरएस के साथ हमारे विलय का अनुरोध किया.

अधिकारियों ने बताया कि 12 विधायक कांग्रेस विधायक दल की संख्या का दो तिहाई है यानी उन पर दलबदल विरोधी कानून के प्रावधान लागू नहीं होंगे. यदि अध्यक्ष उनका अनुरोध स्वीकार कर लेते हैं, तो कांग्रेस विपक्षी दल का दर्जा खो सकती है, क्योंकि उसकी संख्या केवल छह रह जाएगी.

बड़ी संख्‍या में एक साथ कांग्रेस से टीआरएस में पाला बदलने के बावजूद भी इन विधायकों पर दलबदल कानून लागू नहीं होगा. ऐसी स्थिति में कांग्रेस के तेलंगाना में सिर्फ 6 विधायक ही बच पाए हैं.

बता दें कि विधानसभा की कुल 119 सीटें हैं. पिछले साल दिसंबर में हुए चुनाव में टीआरएस ने 98 और उसकी सहयोगी पार्टी एआईएमआईएम के 7 और विपक्ष दलों कांग्रेस ने 19 और उसकी सहयोगी पार्टी टीडीपी ने एक सीट जीती थी. अन्‍य में बीजेपी ने एक सीट जीती थी.

बता दें कि अभी हाल ही में तेलंगाना में हुए लोकसभा चुनावों में टीआरएस ने 9 सीटें, बीजेपी ने 4, कांग्रेस ने 3 और एआईएमआईएम को 1 सीट मिली हैं. (इनपुट: एजेंसी)