नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान 13 धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया गया था. पुलिस ने इन मामलों में 13 प्राथमिकी दर्ज की हैं और 33 लोगों को गिरफ्तार किया है. हिंसा के दौरान दोनों पक्षों के धार्मिक स्थलों को कम या अधिक नुकसान पहुंचा.Also Read - एयरपोर्ट अफसरों ने हेलीकॉप्‍टर की उड़ान में देरी की वजह बताई तो अखिलेश बोले- मुझे कैसे पता होगा कि क्या कारण था

बता दें कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी के आखिर में सीएए को लेकर सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे, जिनमें 53 लोगों की मौत हो गई थी और 500 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे. Also Read - नवजोत सिंह सिद्दू पर US से 'बहन' ने लगाया 'मां' को बेसहारा छोड़ने का आरोप, पत्‍नी बोली- मैं उन्‍हें नहीं जानती

दिल्ली पुलिस ने वकील यूसुफ नकी द्वारा आरटीआई के तहत दायर किए गए अलग-अलग आवेदनों के जवाब में यह जानकारी दी है. आरटीआई आवेदनों में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सीएए के खिलाफ और इसके समर्थन में हुए प्रदर्शन के संबंध में दर्ज प्राथमिकियों की प्रति, गिरफ्तार लोगों के नाम भी मांगे गए थे. Also Read - UP Elections 2022: हेलीकॉप्‍टर रोके जाने के ट्वीट के बाद अखिलेश यादव ने दिल्‍ली से मुजफ्फरनगर के लिए भरी उड़ान

हालांकि पुलिस ने किसी भी आरोपी का नाम, प्राथमिकियों की प्रति और इन धार्मिक स्थलों का पता देने से इनकार किया.
इसने बताया कि सीएए के समर्थन और विरोध में हुए प्रदर्शनों तथा दंगों के सिलसिले में उत्तर पूर्वी दिल्ली के अलग-अलग थानों में 193 प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं. इस बाबत 373 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त एवं जन सूचना अधिकारी एम.ए रिज़वी के हस्ताक्षर से जारी जवाब में बताया गया है कि सांप्रदायिक हिंसा के दौरान एक समुदाय विशेष के 11 धार्मिक स्थलों को क्षतिग्रस्त किया गया.

पुलिस ने इन घटनाओं के संबंध में 11 प्राथमिकियां दर्ज की हैं और 31 लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें से सात को जमानत मिल गई है. वहीं, चार मामलों में आरोपपत्र दाखिल कर दिए गए हैं.

दूसरे आरटीआई आवेदन के जवाब में पुलिस ने बताया कि अन्य समुदाय विशेष के दो धर्मस्थलों को क्षतिग्रस्त किया गया. इस बाबत दो प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस संबंध में गिरफ्तार किसी भी आरोपी को ज़मानत नहीं मिली है जबकि एक मामले में आरोपपत्र दायर कर दिया गया है.

अन्य आरटीआई आवेदन के जवाब में पुलिस ने बताया कि जाफराबाद, कर्दमपुरी और चांद बाग में सीएए के खिलाफ हुए प्रदर्शनों और दंगों के सिलसिले में ज्योतिनगर, दयालपुर और जाफराबाद थानों में कुल 190 प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं और 357 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

पुलिस के पास इस बात की जानकारी नहीं है कि कितने गिरफ्तार लोगों को जमानत पर छोड़ा गया है, लेकिन पुलिस का कहना है कि 25 मामलों में आरोपपत्र दायर कर दिए गए हैं.

आरटीआई आवेदन के जवाब में पुलिस ने बताया कि 23 फरवरी को मौजपुर चौक पर सीएए के समर्थन में हुए प्रदर्शन के सिलसिले में वेलकम थाने में तीन प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं और 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें से सात को जमानत मिल गई है.

पुलिस ने बताया कि उसने एक मामले में आरोपपत्र दायर कर दिया है. गौरतलब है कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा पर 23 फरवरी को इसी प्रदर्शन में भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा था जिसका कथित वीडियो वायरल हुआ था.

पुलिस ने आरोपियों के नाम और प्राथमिकी की प्रतियां न देने का कारण मामले का ‘सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील’ होना बताया है और इसके लिए आरटीआई अधिनियम 2005 की धारा आठ (1) (ए,जी,जे और एच) का हवाला दिया है.

अधिनियम की इस धारा के इन प्रावधानों के तहत राष्ट्र की सुरक्षा, संप्रभुता, अंखडता, जांच या अभियोजन को प्रभावित करना, व्यक्ति की जान को खतरा होना और व्यक्तिगत जानकारी होने की सूरत में सूचना देने से इनकार किया जा सकता है.

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी के आखिर में सीएए को लेकर सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे, जिनमें 53 लोगों की मौत हो गई थी और 500 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे.

संसद में दंगों पर चर्चा के दौरान मार्च में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया था कि हिंसा के दौरान 371 दुकानों और 142 घरों को आग लगाई गई थी. शाह ने यह भी बताया था कि पुलिस ने दंगों के संबंध में 700 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की हैं.