दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका भी एक समय ऐसा था जब आंतक की आग से बच नहीं सका। 11 सितंबर 2001 को अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुआ आतंकी हमला अमेरिका के इतिहास का सबसे काला दिन था। अलकायदा के आतंकियों ने यात्रियों से भरे दो विमानों को न्यूयॉर्क की पहचान माने जाने वाले गगनचुंबी इमारत वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में घुसा दिया। इस हमले से अमेरिका के साथ पूरा देश दहल उठा और सभी को अपनी सुरक्षा का भय सताने लगा। ये लाजमी भी था क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति पर इस तरह का हमला होना विश्वशांति पर किसी तमाचे से कम नहीं था।Also Read - World Trade Center in Jharkhand: रांची में बनेगा वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, झारखंड सरकार ने 27.42 करोड़ की राशि मंजूर की

9/11 की इस खौफनाक घटना को अंजाम देने के लिए अलकायदा के आतंकियों ने चार विमानों को हाईजैक किया था। इनमें से दो विमानों को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर गिराया गया। तीसरा विमान पेंटागन पर और चौथा विमान मैदान में गिरा दिया गया। इस घटना में विमान में सवार यात्रियों सहित कुल मिलाकर 2974 लोग मारे गए थे। वहीं इस घटना से अमेरिका की अर्थ व्यवस्था को एक बड़ा झटका पहुंचा। न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज और अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज 11 सितंबर 2001 से 17 सितंबर तक बंद रहे। जब खुले तो बाजार बहुत गिरा हुआ था। यह अमेरिकी बाजारों की सबसे बड़ी गिरावट थी। Also Read - FBI ने 9/11 हमलों पर नए दस्तावेज जारी किए, विमान अपहरणकर्ताओं का सउदी अरब लिंक साफ हुआ

इस घटना को अंजाम देने वाला शख्स था अलकायदा का खूंखार आतंकी ओसामा बिन लादेन। द यरूशलेम पोस्ट के मुताबिक, 1999 में गामिल अल-बातौटी नामक पायलट ने इजिप्टएयर के विमान को समुद्र में गिरा दिया था। इस घटना में 217 यात्रियों की मौत हो गई थी। माना जाता है कि जब लादेन ने गामिल के बारे में पढ़ा तभी उसे ये करतूत करने की सूझी और उसके मुंह से बरबस ही नकल पड़ा, विमान को किसी इमारत पर क्रैश क्यों न करवा दिया जाए? बस फिर क्या था दो साल बाद अमेरिका की सर जमीं पर लादेन ने सबसे बड़े आतंकी हमले को अंजाम दिया। उस वक्त अमेरिका उस त्रासदी से रूबरू हुआ, जिसकी कल्पना भी उसने कभी नहीं की थी। न्यूयॉर्क की नाक कही जाने वाली इमारत वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पलभर में ढह गई। हजारों अमेरिकी बेवक्त मौत की नींद सो गए। Also Read - Independence Day 2021: 15 अगस्त को भारतीय तिरंगे में जगमगाएगी अमेरिका की सबसे ऊंची इमारत

इस घटना के खिलाफ अमेरिका का कदम
इस घटना के बाद अमेरिका की आंखों में जैसे खून उतर आया और उसने आतंक के खिलाफ बिगुल फूंक दिया। तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को यह अंदाजा लगाने में अधिक समय नहीं लगा कि यह हरकत ओसामा बिन लादेन और उसके आतंकी संगठन अलकायदा की थी। बुश ने अगले ही दिन मौके पर कहा कि दोषी लोगों को नहीं बख्शा जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी। अमेरिका ने जल्द ही अपनी सेनाएं इराक भेज दीं। वहां उसका निशाना सद्दाम हुसैन था। इसके साथ ही अफगानिस्तान से तालिबानी शासन हटाने की कवायद भी तेज कर दी गई। वहां जोरदार घमासान हुआ, लेकिन अभी तक पूरी तरह से लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी है।

अमेरिका ने इस चुनौती के बदले में अलकायदा को अफगानिस्‍तान से लगभग उखाड़ फेंका। यहां तक कि 2 साल पहले ओसामा बिन लादेन को पाकिस्‍तान में उसी के गढ़ में घुसकर मौत के घाट उतार दिया था। लेकिन 14 साल लंबी इस जंग की कीमत लगभग दो लाख आम नागरिकों की जान से चुकाई गई।

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर
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न्‍यूयॉर्क के मैनहट्टन स्थित वर्ल्‍ड ट्रेड सेंटर सात बिल्डिंग्‍स का एक कॉम्‍प्‍लेक्‍स था जिसमें से ज्‍यादातर ऑफिस और कॉमर्शियल प्रयोग के लिए जगह दी गई थी। वर्ष 1970 की शुरुआत में इस बिल्डिंग का काम पूरा हुआ और वर्ष 1973 में इसे खोला गया। 1,300 फीट की ऊंचाई वाली ये इमारतें अमेरिका की शान बन गई थीं। उस समय इसे दुनिया की सबसे ऊंची बिल्डिंग माना जाता था। वर्ल्‍ड ट्रेड सेंटर को स्‍टील से तैयार किया गया था। इसकी डिजाइन ऐसी थी कि यह 200 मील प्रति घंटे से चलने वाली हवाओं को भी झेल सकता थी और अगर कोई बड़ी आग लग जाती तो भी इस बिल्डिंग को कुछ नहीं होता। लेकिन यह बिल्डिंग जेट फ्यूल की गर्मी को झेल नहीं पाई और राख हो गई।