तिरुवनंतपुरम: जिस पादरी ने रेप किया था, रेप पीड़िता अब उसी से शादी करना चाहती है. पादरी की उम्र 53 साल है. जबकि पीड़िता की उम्र सिर्फ 17 साल बताई जा रही है. रेप के दौरान लड़की सिर्फ 16 साल की थी. वह रेप के बाद एक बच्चे की मां भी बन चुकी है. पीड़िता ने शादी के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. पादरी रॉबिन को दुष्कर्म के लिए 20 साल जेल की सजा सुनाई गई है और उसे वेटिकन द्वारा पादरी के पद से भी बर्खास्त कर दिया गया है.Also Read - सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का हलफनामा- कोरोना से हुई मौत पर परिजनों को मिलेगा 50 हजार रुपये का मुआवजा

पीड़िता की ओर से दायर याचिका अब सोमवार को शीर्ष अदालत में आएगी और पीड़िता ने उसके साथ यौनाचार करने वाले रॉबिन के लिए जमानत भी मांगी है, ताकि उनकी शादी हो सके. याचिकाकर्ता का कहना है कि यह याचिका उसकी इच्छा के अनुसार दायर की गई है. Also Read - Delhi-NCR से सटे हरियाणा के इन क्षेत्रों में पुराने वाहन चलाने पर लगी रोक, नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्यवाही

इससे पहले रॉबिन ने भी पीड़िता से शादी करने की मांग वाली एक याचिका के साथ केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने तब इसे ठुकरा दिया था. रॉबिन कन्नूर के पास एक पैरिश पादरी के रूप में सेवा कर रहा था और चर्च समर्थित स्कूल का प्रबंधक था, जहां पीड़िता 11वीं कक्षा की छात्रा थी. Also Read - NDA में महिला उम्मीदवारों को अनुमति के लिए अधिसूचना अगले साल मई तक जारी होगी

स्कूल के बच्चों के बीच काम करने वाली चाइल्ड लाइन एजेंसी ने पुजारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. प्रबंधन द्वारा चलाए जा रहे अस्पताल में 7 फरवरी, 2017 को पीड़िता के बच्चे को जन्म देने के बाद पुजारी पर दबाव बढ़ गया था. पुजारी को 27 फरवरी, 2017 को कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास से गिरफ्तार किया गया था, जब वह देश से बाहर जाने की तैयारी कर रहा था.

यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉस्को) अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने के बाद पुजारी को 17 फरवरी, 2019 को थालास्सेरी की एक अदालत ने 20 साल कैद की सजा सुनाई थी. सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी मां मुकर गई. मगर इसके बावजूद, अदालत पहले से एकत्र किए गए सबूतों के आधार पर आगे बढ़ी और फैसला सुनाया.

चार नन, एक अन्य पादरी और कॉन्वेंट से जुड़ी एक और महिला, जो पुलिस चार्जशीट में सह-आरोपी थे, को पर्याप्त सबूतों के अभाव में छोड़ दिया गया. संयोग से पिछले साल मार्च में, मंथवाडी (वायनाड जिले में) सूबे के अधिकारियों ने मीडिया को सूचित किया कि वेटिकन ने सारी प्रक्रिया से गुजरने के बाद रॉबिन को उसके पद से बर्खास्त करने का फैसला किया.