मदुरई: अन्नाद्रमुक के 18 विधायकों ने उनकी अयोग्यता बरकरार रखने के मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला किया है. तमिलनाडु के विधानसभा अध्यक्ष पी धनपाल ने पिछले साल उन्हें अयोग्य ठहराया था.Also Read - SBI | Uco Bank: एसबीआई और यूको बैंक आम्रपाली प्रोजेक्टों में 450 करोड़ रुपये के निवेश पर सहमत

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अयोग्य ठहराए गए विधायकों में से एक और पार्टी से दरकिनार किए गए अन्नाद्रमुक के नेता टीटीवी दिनाकरण के समर्थक टी तमिलसेल्वन ने बताया कि फैसला सर्वसम्मति से लिया गया है और सभी 18 विधायकों ने इसे ‘‘खुशी’’ से स्वीकार किया है. दिनाकरण और अयोग्य ठहराए गए विधायकों के बीच विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है. उन्होंने पत्रकारों से कहा कि हमने फैसला किया है कि विधानसभा अध्यक्ष की गलती से दुनिया को वाकिफ कराने के लिए हम अपील करेंगे. हम सुप्रीम कोर्ट में अपील करने जा रहे हैं. Also Read - Employee Pension Scheme: सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से पेंशन में 300% से अधिक की हो सकती है बढ़ोतरी, जानें- कैसे होगी गणना?

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मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को 14 जून को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के 18 अन्नाद्रमुक विधायकों को अयोग्य ठहराने के फैसले को बरकरार रखा था. इस फैसले से के पलानीस्वामी की सरकार को बड़ी राहत मिली थी. अगर अदालत का फैसला विपरीत होता तो इससे तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल आ सकता था. इसकी वजह ये है कि सत्तारूढ़ पार्टी 232 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत खो सकती थी और उसके बाद नए राजनीतिक समीकरण बन सकते थे. विधानसभा में दो सीटें खाली हैं.

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इस मामले में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति एम. सुंदर की खंडपीठ ने 14 जून को जो फैसला सुनाया था उसमें दोनों की राय भिन्न थी. न्यायमूर्ति बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष पी. धनपाल के विधायकों को अयोग्य ठहराये जाने के फैसले को बरकरार रखा जबकि न्यायमूर्ति सुंदर ने फैसले से असहमति व्यक्त की थी. अयोग्य ठहराए गए सभी 18 विधायक दिनाकरण के विश्वासपात्र हैं. वी के शशिकला को अपदस्थ करने के बाद दिनाकरण अब एएमएमके के प्रमुख हैं.