नई दिल्‍ली: सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के घर के बाहर से पकड़े गए आईबी के चार जासूसों को लेकर सरकार सकते में हैं. गृहमंत्रालय ने जासूसी मामले में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि जनपथ हाईप्रोफाइल इलाका है, यहां आईबी के अफसरों की पेट्रोलिंग ड्यूटी लगती रहती है. इस मामले को लेकर वर्तमान में सियासत गरम हो गई है. अगर इतिहास के पन्नों पर नजर दौड़ाए तो भारतीय राजनीति में जासूसी का यह मामला कोई नया नहीं है. 27 साल पहले चन्द्रशेखर की सरकार के दौरान राजीव गांधी के घर के बाहर दो पुलिस वाले जासूसी करते पाए गए थे. इसके बाद चन्द्रशेखर की सरकार गिर गई थी. क्‍योंकि कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया था.

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बता दें कि चंद्रशेखर सिंह ने कांग्रेस के समर्थन से नवंबर 1990 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से चार महीने तक सरकार चलाई थी लेकिन राजीव गांधी की जासूसी करने के आरोप में कांग्रेस ने चंद्रशेखर सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था. उस समय हरियाणा पुलिस के दो कांस्टेबल राजीव गांधी के घर के पास से जासूसी करने के आरोप में पकड़े गए थे. 2 मार्च 1991 को हरियाणा पुलिस के कांस्टेबल प्रेम सिंह और राज सिंह को राजीव गांधी के निवास 10 जनपथ के बाहर से जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. दोनों सादे लिवास में थे. दोनों ने स्वीकार किया था कि उन्हें कुछ सूचना एकत्रित करने के लिए वहां भेजा गया था. मामले को लेकर जैसे राजनीतिक भूचाल आ गया. आखिर प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को 6 मार्च 1991 को इस्तीफा देने की घोषणा करनी पड़ी थी.

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राजीव गांधी पर नजर रखने को हो रही थी जासूसी
उस वक्त कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि चौटाला सरकार के गृहमंत्री संपत सिंह के निर्देश पर राजीव गांधी के घर पर नजर रखी जा रही थी. बताया जाता है कि इस जासूसी का मकसद जनता दल के उन असंतुष्ट नेताओं पर नजर रखना था, जो राजीव गांधी से मिल रहे थे. इनमें देवीलाल के छोटे बेटे रंजीत सिंह सहित दूसरे नेता शामिल थे. कांग्रेस द्वारा जब इस मामले को उछाला गया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने इस पूरे मामले की जांच कराने का प्रस्ताव रखा. कांग्रेस की मांग थी कि या तो जासूसी मामले को लेकर हरियाणा सरकार को बर्खास्त किया जाए या ओमप्रकाश चौटाला को जनता दल (एस) के महासचिव पद से हटाया जाए. इतना ही नहीं, कांग्रेस ने चेतावनी दी थी कि अगर सरकार इस मामले में उचित कदम नहीं उठाती तो कांग्रेस सांसद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री के धन्यवाद ज्ञापन का बॉयकॉट करेंगे. कांग्रेस के विरोध के चलते चंद्रशेखर बुरी तरह घिर गए. मामला सरकार से समर्थन वापसी तक पहुंच गया, लेकिन इससे पहले कि कांग्रेस समर्थन वापस लेती, प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने 6 मार्च 1991 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया.