बेंगलुरू/नई दिल्लीः कर्नाटक में सियासी समीकरण बिगड़ने की आहट आने लगी है. मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की सरकार को समर्थन दे रहे दो निर्दलीयों ने समर्थन वापस ले लिया है. हालांकि निर्दलीयों के समर्थन वापस लेने से कुमारस्वामी की सरकार पर तत्काल कोई संकट पैदा नहीं हुआ है. राज्य की 224 विधानसभा में बहुमत के लिए 113 सीटें चाहिए. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के पास 116 सीटें हैं, जबकि भाजपा के पास 104 सीटें हैं. कांग्रेस के 79, जेडीएस के 37, बसपा, केपीजेपी और निर्दलीय के एक-एक विधायकों का कुमारस्वामी सरकार को समर्थन प्राप्त था. दो निर्दलीयों के समर्थन वापस लेने के बाद भी कुमारस्वामी सरकार को 114 विधायकों का समर्थन प्राप्त है.

विधायकों के समर्थन वापस लेने के तुरंत बाद राज्य के उप मुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि उनकी सरकार पर कोई खतरा नहीं है. भाजपा पैसे के दम पर हमारे विधायकों को खरीदना चाहती है. लेकिन वह अपने मंसूबे में कभी कामयाब नहीं होगी. सोमवार को राज्य के मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने भी कहा था कि स्थिर सरकार चलाने के लिए उनके पास ‘पर्याप्त संख्या बल’ है.

गौरतलब है कि कर्नाटक में विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप-प्रत्यारोप का दौर सोमवार को तब शुरू हुआ था जब सत्तारूढ़ कांग्रेस-जदएस गठबंधन तथा भाजपा ने एक-दूसरे पर विधायकों को लालच देकर तोड़ने के आरोप लगाए थे. कांग्रेस-जदएस ने जहां भाजपा पर विधायकों को लालच देने के आरोप लगाए वहीं राज्य भाजपा के प्रमुख बीएस. येदियुरप्पा ने इन खबरों को खारिज कर दिया कि सरकार गिराने के लिए उनकी पार्टी ‘ऑपरेशन कमल’ में लगी हुई है.