श्रीनगर। जम्मू कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन सरकार खत्म होते ही सेना एक्शन में आ गई है. रमजान के दिनों में सीजफायर के चलते सेना ने ऑपरेशन रोक रखा था. सेना ने पुलवामा के त्राल में एनकाउंटर में दो आतंकियों को मार गिराया. मुठभेड़ में सीआरपीएफ का एक जवान भी घायल हो गया जिसे 92 बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है. रात 8 बजे खबर लिखे जाने तक मुठभेड़ जारी थी.

घाटी में बिगड़ते हालात

घाटी में पिछले कुछ दिनों में हालात बेहद खराब रहे हैं. रमजान के दिनों में सरकार की ओर से घोषित एकतरफा सीजफायर के दौरान आतंकियों ने जमकर कोहराम मचाया. ईद से ठीक दो दिन पहले 14 मई को आतंकियों ने दो बड़ी वारदातों को अंजाम दिया. इस दिन आतंकियों ने राइजिंग कश्मीर के संपादक शुजात बुखारी की गोली मारकर हत्या कर दी फिर सेना के जवान औरंगजेब खान की उस वक्त अगवा कर हत्या कर दी जब वह ईद की छुट्टी पर अपने घर जा रहा था.

बीजेपी ने लिया पीडीपी से समर्थन वापस

आज ही बीजेपी ने पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया और मंत्रियों ने अपने इस्तीफे राज्यपाल को सौंप दिए. इसके साथ ही जम्मू कश्मीर में 3 साल 2 महीने से चली आ रही बीजेपी-पीडीपी सरकार भंग हो गई. बीजेपी ने पीडीपी और महबूबा मुफ्ती से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की बात कहते हुए खुद को सरकार से अलग कर लिया.

बीजेपी ने गिनाईं ये वजहें

राम माधव ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा, जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार आगे चलना संभव नहीं है. पीएम मोदी और अमित शाह से सलाह के बाद पीडीपी से समर्थन वापस लेने का फैसला किया गया है. बीजेपी ने अपनी तरफ से अच्छी तरह से सरकार चलाने की कोशिश की कश्मीर में जो काम हम करना चाह रहे थे, वो नहीं कर पा रहे थे.

रमजान में सीजफायर के बावजूद अपेक्षित नतीजे नहीं निकल पाए. सीजफायर का फायदा उठाने की कोशिश की गई. देशहित और राज्य के हित में समर्थन वापसी का फैसला लिया गया है. सीजफायर का फैसला मजबूरी नहीं, हमारा दिल बड़ा था. हम घाटी में शांति चाहते थे.

राम माधव ने कहा, आतंकवाद, हिंसा और कट्टरपंथ लगातार बढ़ता जा रहा है और आम लोगों के मूलभूत अधिकार खतरे में हैं. पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या इसका प्रमाण है. उनकी कश्मीर में दिन दहाड़े हत्या कर दी गई. कश्मीर में प्रेस की आजादी भी खतरे में आ गई है.