प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को दो साल पूरे हो रहे हैं। 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कैबिनेट के साथ पद एवं गोपनीयता की शपथ ली थी। सरकार के दो साल पूरे होने पर उसे अनेक कसौटियाँ पर मापा जा रहा है। इसी कड़ी में हम बात करने जा रहे हैं मोदी सरकार के पाँच ड्रीम प्रोजेक्ट की। मोदी जी के विकास का सपना कमोबेश इन्हीं पाँच योजनाओं पर टिका है। तो आइए जानते हैं कि मोदी सरकार की कौन सी हैं वो पाँच योजनाएँ और इन दो सालों में क्या है उनका हाल… Also Read - भारतीय नौसेना की बढ़ी ताकत, INS Karanj हुआ शामिल, जानें इसकी ताकत और खासियत

Also Read - कोरोना काल में शिक्षा मंत्रालय ने डिजिटल प्रणाली का भरपूर इस्तेमाल किया, 33 करोड़ छात्रों दी जा रही शिक्षा: पोखरियाल

1. मेक इन इंडिया Also Read - UPI Digital Payment: नये साल पर डिजिटल पेमेंट करने वालों को लगेगा झटका, यूपीआई ट्रांजैक्शन होगा महंगा

make_in_india_consumer_electronics

अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स का जिक्र हो तो मेक इन इंडिया सबसे पहले नंबर पर आता है। 25 सितंबर 2014 को मेक इन इंडिया की शुरुआत की गई थी। चीनी माल से परेशान भारतीय उद्योग दिन-ब-दिन घटता जा रहा था। इसी से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया की शुरूआत की। इसका उद्देश्य यह था कि देश में निवेश बढ़े और देश में निर्मित वस्तुओं का निर्यात बढ़ाया जाए। देश को निर्माण क्षेत्र दुनिया के और देशों की टक्कर में लाने के लिए सरकार ने 25 ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जिनमें भारत को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसमे आटोमोबाईल से लेकर एविएशन व रेलवे से लेकर थर्मल पावर जैसे क्षेत्र हैं।

2 साल की रिपोर्टः- इस योजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि विदेशी निवेश के लिहाज से भारत दुनिया का नंबर 1 देश बन गया। पिछले 17 महीनों में एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) में 37 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई और भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ते हुए 63 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हासिल किया। इस योजना की कमी यह रही कि मेक इन इंडिया से अगले 6 साल में 10 करोड़ नई नौकरियों का लक्ष्य रखा गया है लेकिन नौकरियाँ सृजित करने की रफ्तार काफी धीमी है। यह भी पढ़ेंः- मोदी सरकार के लिए BIG B बच्चन निभाएँगे ये बड़ी ज़िम्मेदारी

2. डिजिटल इंडिया

Digital_India_1(pressroom

देश को आधुनिक और सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। डिजिटल इंडिया की घोषणा 21 अगस्त 2014 को की गई थी और 1 जुलाई 2015 से इस पर काम शुरू हो गया। डिजिटल इंडिया एक प्रकार का अम्ब्रेला प्रोग्राम है जिसके अंतर्गत अनेक योजनाएँ आती हैं। इस योजना के तहत देश के टेलीकॉम क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ।

2 साल की रिपोर्टः– इस योजना की घोषणा और क्रियांन्वयन के दौरान 50 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतों तक इंटरनेट पहुँचा। आप्टिकल फाइबर 358 किमी से बढकर 1 लाख 44 हजार 220 किमी किमी तक पहुँच गया। भारतीय डाक का भी स्वरूप बदलकर उसे बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा गया है। यह भी पढ़ेंः नरेंद्र मोदी 1 जुलाई को डिजिटल इंडिया का शुभारंभ करेंगे

3. स्मार्ट सिटी

modischeme-main

साभार- इंडियन एक्सप्रेस

मोदी सरकार का तीसरा बड़ा ड्रीम प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी था। सबसे पहले 100 स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने घोषणा 29 अप्रैल 2015 को की गई। इस मिशन को 25 जून से विधिवत रूप से शुरू किया गया। स्मार्ट सिटी एक ऐसी परिकल्पना है जिसमें शहरों के अंधाधुंध व अवैध निर्माण में सिमटती मूलभूत सुविधाओं को स्मार्ट तरीके से व्यवस्थित करना। स्मार्ट सिटी 10 प्रमुख ढ़ाँचागत सुविधाओं से पूर्ण होंगी। इसमें पानी, बिजली, साफ-सफाई, शहरी आवागमन, परिवहन, गरीबों के लिए सस्ते मकान, आईटी कनेक्टिविटी, ई-गवर्नेंस, पर्यावरण व सुरक्षा का ध्यान रखा जाएगा।

2 साल की रिपोर्टः- स्मार्ट सिटी के साथ 500 शहरों के लिए अमृत मिशन भी शुरू किया गया। स्मार्ट सिटी योजना की घोषणा के साथ ही देश में एक बड़ी बहस ने जगह ले ली। सभी के पास सवाल था कि देश में जहाँ गाँवों की ओर ध्यान देना चाहिए तो सरकार शहरों को स्मार्ट बनाने में लगी है। इस योजना के तहत सरकार सौ स्मार्ट सिटी को पाँच साल में 48 हजार करोड़ रुपए देगी। इतनी ही राशि राज्य व शहरी निकाय देंगे। पहले चरण में 20 शहरों को चुना गया। इन 20 शहरों को प्रत्येक को 200 करोड़ रुपए दिए गए। यह भी पढ़ेंः पहले 20 स्मार्ट सिटी के नामों का एलान

4. स्वच्छ भारत मिशन

swacch bharat

14 अगस्त 2014। स्वतंत्रता दिवस के दिन अपने पहले भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से स्वच्छ भारत मिशन की घोषणा की। इस घोषणा के बाद प्रधानमंत्री ने 2 अक्टूबर 2014 को गाँधी जयंती के दिन से खुद ही झाड़ू उठाकर इसकी शुरुआत कर दी। प्रधानमंत्री ने इसकी घोषणा के वक्त कहा कि हमारा उद्देश्य 2 अक्टूबर 2019 को महात्मा गाँधी की 150 जयंती तक देश को पूरी तरह से स्वच्छ करना है।

2 साल की रिपोर्टः- स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्धारित 25 लाख शौचालयों के लक्ष्य में से मार्च 2016 तक 6 लाख शौचालयों का निर्माण कर लिया गया। 1 लाख 96 हजार करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है। इस साल भी इस योजना के लिए 9000 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। यह भी पढ़ेंः स्वच्छ भारत मिशन मार्च का लक्ष्य हासिल करने में विफल

5. नमामि गंगे

namaami gange

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से लोकसभी सीट से चुनाव लड़ते समय ही कहा था मुझे गंगा माँ ने बुलाया है। सरकार बनाने के बाद 10 जुलाई 2014 को नमामि गंगे परियोजना की घोषणा की गई। 2016 में घाट सौंदर्यीकरण और नदी में अवशिष्ट की रोक जैसे काम होंगे। 2017 में पेपर मिल, टेनरीज के पानी को गंगा में जाने से रोका जाएगा। 2018 में सारे नालों व उद्योगों से गंगा में जा रहे प्रदूषण पर रोक लगेगी।

2 साल की रिपोर्ट- 25 जून 2015 को नमामि गंगे के लिए 20 हजार करोड़ रुपए के बजट की घोषणा की गई। यह पूरी तरह से केद्र के हिस्सेदारी वाली योजना है। इसमें राज्यों या निकायों की कोई सहभागिता नहीं है। प्रधानमंत्री की पहल के बाद इस योजना में सात मंत्रालय एक साथ आए। यह भी पढ़ेंः मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गंगा सबसे ज्यादा मैली