नई दिल्ली: सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत का कहना है कि जम्मू कश्मीर में मौजूदा हालात को देखते हुए नियंत्रण रेखा के पार स्थित आतंकी ठिकानों पर एक और सर्जिकल स्ट्राइक किए जाने की जरूरत है. भारतीय सेना ने दो साल पहले 29 सितंबर को नियंत्रण रेखा के पार आतंकियों के ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी. मोदी सरकार 29 सितंबर को ‘सर्जिकल हमले’ की दूसरी वर्षगांठ मनाएगी. रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि 2016 को हुए हमले ने दुनिया को दिखाया कि हम ‘‘सचमुच करने का इरादा’’ रखते हैं. इस दिन हमारे कमांडो आतंकवादियों के लॉन्च पैड को खत्म करने के लिए पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में घुसे थे. उन्होंने प्रियदर्शिनी अवार्ड्स में कहा, ‘‘इस महीने की 29 तारीख को सर्जिकल हमले की दूसरी वर्षगांठ होगी और हम इस दिन का जश्न मनाएंगे.’

इस बीच सवाल उठता है कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत ने क्या हासिल किया? सर्जिकल स्ट्राइक के बाद एलओसी पर बॉर्डर पार पाकिस्तान से होने वाली फायरिंग में 4 गुना की बढ़ोतरी हुई है. सेना प्रमुख जनरल बिपीन रावत का कहना है कि सर्जिकल स्ट्राइक एक संदेश था कि हम एलओसी पार करने में कोई संकोच नहीं करेंगे. इसके बावजूद घुसपैठ और हमले जारी हैं.घाटी में हिंसा फैल रही है. सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध 2003 के युद्धविराम के बाद सबसे तनावपूर्ण स्थिति में चले गए. हालांकि सीजफायर वॉयलेशन सर्जिकल स्ट्राइक के आंकलन का बेंचमार्क नहीं हो सकता. यहां तक कि सीमा पार से अगर एक गोली चलती है तो भी उसे सीजफायर वॉयलेशन माना जाएगा. वहीं एक मोर्टार जो कि 10 किमी तक मार कर सकता है उसे भी सीजफायर वॉयलेशन के रूप में ही गिना जाएगा.

क्या कहते हैं आंकड़े

साल           सीजफायर वॉयलेशन             आतंकी मारे गए          जवान शहीद हुए
2014               153                                       110                              51
2015               152                                       113                               41
2016               228                                      165                              88
2017             860                                        218                              83
2018            1046                                      140                               71