नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेना के बीच हिंसक झड़प पर विपक्षी दलों ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ‘‘चुप्पी’’ पर सवाल उठाए और उनसे कहा कि वे इस मामले में देश को विश्वास में लें. वहीं, सत्तारूढ़ भाजपा ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारतीय सीमाएं सुरक्षित रहेंगी. पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार की रात चीन के सैनिकों के साथ हिंसक संघर्ष में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए. पिछले 45 वर्षों में इस तरह की यह पहली घटना है और यह संवेदनशील क्षेत्र में पिछले पांच हफ्ते से चल रहे व्यापक तनाव का संकेत देती है. Also Read - भारत में कोविड-19 जांचों की संख्या एक करोड़ के पार, चीन से बहुत पीछे

मंगलवार सुबह पहले सेना ने कहा था कि हिंसक संघर्ष के दौरान भारत के एक अधिकारी और दो सैनिक शहीद हो गए, जबकि चीनी पक्ष की तरफ भी सैनिक हताहत हुए हैं. हालांकि रात में बयान जारी कर कहा कि 20 जवान शहीद हुए हैं. चीन पक्ष के हताहतों के बारे में फिलहाल स्पष्टता नहीं है. कांग्रेस ने लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ ‘हिंसक टकराव’ में भारतीय सेना के एक अधिकारी और दो जवानों के शहीद होने की घटना को ‘अस्वीकार्य’ करार देते हुए मंगलवार को सरकार से आग्रह किया कि इस मामले पर देश को विश्वास में ले और सभी राजनीतिक दलों को जमीनी हालात के बारे में जानकारी दी जाए. Also Read - 30,000 भारतीय सैनिक एलएसी पर चीनी सैनिकों के सामने डटे, SU-30, Mig-29 फाइटर्स भी तैयार

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक बयान में कहा, ‘‘चीनी सेना द्वारा लद्दाख में तीन स्थानों पर की गई घुसपैठ की खबरों ने पूरे देश में गंभीर चिंता और व्यग्रता पैदा कर दी, लेकिन सीमा पर घुसपैठ के तथाकथित चीनी दुस्साहस पर मोदी सरकार ने मौन साध लिया.’’ Also Read - Black Death: कोरोना के बाद चीन से निकली यह नई महामारी, यूरोप में मरे थे 5 करोड़ लोग, पढ़िए ये रिपोर्ट

सुरजेवाला ने कहा, ‘‘भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता’ से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता. पिछले पांच दशकों में, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर एक भी दुर्घटना या भारत-चीन सीमा पर हमारे सैनिक की शहादत नहीं हुई है. चीनी सेना के हाथों भारतीय सेना के एक अधिकारी और दो सैनिकों की शहादत पूरी तरह से अप्रत्याशित और अस्वीकार्य है.’’ उन्होंने दावा किया कि इन खबरों को सुन कर पूरा देश क्षुब्ध है, रोष में है, परंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चुप्पी साध रखी है.

कांग्रेस नेता ने सवाल किया, ‘‘क्या यह सच है कि चीनी सेना ने गलवान घाटी में भारतीय सेना के एक अधिकारी और दो सैनिकों को मार डाला है? क्या यह सही है कि अन्य भारतीय सैनिक भी इस हमले में गंभीर रूप से घायल हुए हैं? यदि हां, तो प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?’’

उन्होंने यह भी पूछा, ‘‘क्या प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री इस बात पर राष्ट्र को विश्वास में लेंगे कि हमारे अधिकारी और सैनिक ऐसे समय में कैसे शहीद हो सकते हैं जबकि चीनी सेना गलवान घाटी के हमारे क्षेत्र से कब्जा छोड़ कथित तौर पर वापस जा रही थी? केंद्र सरकार बताए कि हमारे उच्च सेना अधिकारी और सैनिक कैसे और किन परिस्थितियों में शहीद हुए? ’’

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने अप्रैल….मई, 2020 से चीनी सेना द्वारा हमारे क्षेत्र पर कब्जे के बारे में चुप्पी साध रखी है और सार्वजनिक पटल पर किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया है.

सुरजेवाला ने सवाल किया, ‘‘क्या प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री अब आगे बढ़ कर देश को यह बताने का साहस करेंगे कि अप्रैल….मई 2020 तक भारत की सीमा के कितने क्षेत्र में चीन ने अवैध कब्जा कर लिया है ? साथ ही यह भी बताएं कि वे कौन से हालात व स्थितियां हैं, जिनके चलते हमारे बहादुर सैन्य अधिकारी व सैनिकों की शहादत हुई है? क्या प्रधानमंत्री राष्ट्र को विश्वास में लेंगे?’’

उन्होंने कहा, ‘‘पूरा देश भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और भूभागीय अखंडता की रक्षा के लिए एकजुट है. पर मोदी सरकार को यह याद रखना होगा कि संसदीय प्रणाली में शासकों की गोपनीयता या चुप्पी का कोई स्थान नहीं है.’’

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह कहा कि समय आ गया है जब केंद्र चीन के मामले में कड़े कदम उठाए क्योंकि ‘‘हमारी कमजोरी का हर संकेत’’ चीन की प्रतिक्रिया को और अधिक ‘आक्रामक’ बनाता है.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने चीनी सैनिकों के साथ ‘हिंसक झड़प’ में भारतीय सेना के एक अधिकारी और दो जवानों के शहीद होने पर मंगलवार को गहरी ‘‘पीड़ा’’ जतायी और उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘देश के लिए अपने जीवन का बलिदान देने वाले अधिकारियों और सैनिकों को लेकर मुझे जो पीड़ा हुई है उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता. उनके प्रियजनों के साथ मेरी संवेदना है. इस मुश्किल घड़ी में हम आपके साथ खड़े हैं.’’

सीमा पर हुई झड़प पर भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सीमाएं अखंड और सुरक्षित रहेंगी. नड्डा ने डिजिटल माध्यम से ‘केरल जन संवाद’ रैली को संबोधित करते हुए गलवान घाटी में भारत-चीन टकराव का हवाला दिया और कहा कि सीमा पर तनाव को कम करने की प्रक्रिया के दौरान सोमवार रात चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प हुई.

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय सेना ने माकूल जवाब दिया, लेकिन दुर्भाग्यवश हमने अपने तीन जवानों को खो दिया. मैं उनके बलिदान को नमन करता हूं. मैं आपको यह विश्वास दिला सकता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की क्षेत्रीय अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं होगा.’’ नड्डा ने कहा, ‘‘अब हमारे पास राजनीतिक इच्छाशक्ति है और हमारी सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए मुस्तैद है.’’

भाजपा के वरिष्ठ नेता बी एल संतोष ने मंगलवार को कहा कि लद्दाख में हिंसक टकराव के दौरान भारतीय जवान चीनी सैनिकों को पीछे हटने के लिए मजबूर करने को लेकर दृढ़ संकल्पित थे और इस दौरान दूसरी तरफ ज्यादा नुकसान हो सकता है.

पार्टी के संगठन महामंत्री संतोष ने ट्वीट किया, ‘‘हमारे जवान चीनी सैनिकों को पीछे हटने के लिए विवश करने को दृढ़ संकल्पित थे. कल इस प्रक्रिया में हमने अपने तीन देशभक्त सिपाहियों को खो दिया.’’ उन्होंने कहा, ‘‘चीन की तरफ की स्थिति की जानकारी अभी आनी है. यह ज्यादा बड़ा (नुकसान) होगा.’’

सीमा पर हुई झड़प पर सधी प्रतिक्रिया देते हुए वामपंथी दलों ने कहा कि भारत और चीन को पूर्वी लद्दाख में तनाव कम करने के लिए बातचीत की शुरुआत करनी चाहिए. माकपा ने सरकार से कहा कि वह ‘‘आधिकारिक बयान’’ जारी करे कि पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में क्या हुआ और कहा कि तनाव को दूर करने के लिए दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता की शुरुआत होनी चाहिए.

भाकपा ने अलग से बयान जारी कर कहा कि समझा जाता है कि वर्तमान गतिरोध का वार्ता और स्थापित रूपरेखा के माध्यम से समाधान किया जा सकता है, जिस पर दोनों देश सहमत हुए हैं. इसने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि दोनों पक्षों को मुख्य हितों को ध्यान में रखते हुए अपने प्रयास तेज करने होंगे ताकि जल्द से जल्द भारत-चीन सीमा प्रश्न पर परस्पर स्वीकार्य समाधान को हासिल किया जा सके.’’

पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प को मंगलवार को ‘विचलित करने वाला’ बताया और कहा कि सरकार को इस सीमा मुद्दे पर देश के सामने स्पष्ट तस्वीर पेश करनी चाहिए.

जनता दल (सेक्युलर) के नेता ने ट्वीट किया,‘‘गलवान घाटी से आ रही खबरें विचलित करने वाली हैं. तनाव कम करने की प्रक्रिया के दौरान हमारे सैनिकों ने कैसे अपनी जान गंवायी? राष्ट्रहित में प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को लद्दाख गतिरोध के दौरान चीन के साथ सीमा मुददे पर देश के सामने स्पष्ट तस्वीर रखनी चाहिए. ’’