नई दिल्ली. भागमभाग भरी जिंदगी, तनाव या चिड़चिड़ापन या फिर कुछ और, देश की राजधानी दिल्ली हर वक्त गुस्से में रहती है. जी हां, राष्ट्रीय राजधानी में रहने वाले लोगों में बर्दाश्त करने की क्षमता, यानी सहनशीलता इतनी कम हो गई है कि मामूली बातों पर भी वे झगड़ पड़ते हैं. सिर्फ झगड़ते ही नहीं, कई मामलों में तो वे एक दूसरे की जान तक ले लेते हैं. ये सनसनीखेज बातें हम नहीं कह रहे, बल्कि खुद दिल्ली पुलिस के आंकड़े इन तथ्यों की चुगली कर रहे हैं. राष्ट्रीय राजधानी में इस वर्ष हुई हत्याओं में पांचवां हिस्सा ऐसे मामलों में हत्याओं का है जो गलती से कंधा टकरा जाने अथवा ठंडा पानी नहीं दे पाने जैसी मामूली बातों में की गईं हैं. पुलिस के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में बढ़ोतरी के पीछे आरामतलब जीवन शैली, भावनात्मक अस्थिरता और समाज के साथ संवादहीनता जैसे कारण हो सकते हैं. दिल्ली पुलिस के हालिया आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 15 सितंबर तक हत्या के 337 मामले सामने आए, जिनमें से 62 हत्याएं मामूली घटना के एकाएक तूल पकड़ने के कारण की गईं. Also Read - दिल्ली पुलिस में भी पहुंचा कोरोना वायरस का असर, ट्रैफिक एएसआई कोविडि-19 से संक्रमित

आंकड़ों के अनुसार हत्या के पीछे व्यक्तिगत रंजिश अभी भी सबसे अहम कारण है. पिछले दो वर्ष में हत्या के पीछे आपसी रंजिश अहम कारण रहा, इसके बाद मामूली बात पर झगड़े के कारण हत्या दूसरे स्थान पर है. दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष दर्ज 487 मामलों में 93 मामले एकाएक उकसावे के थे. ऐसे मामलों में गौर किया जाए तो सितंबर में बाहरी दिल्ली के रनहोला क्षेत्र में एक व्यक्ति की उसके पूर्व नियोक्ता ने सिर्फ इतनी सी बात पर कथित तौर पर पीट पीट कर हत्या कर दी कि उसने टैंकर से पानी लाने के लिए मना कर दिया था. Also Read - हनुमान जयंती पर केजरीवाल ने दी बधाई, बोले- कोरोना के इलाज में जल्द मिलेगी 'संजीवनी'

वहीं, अगस्त में बाहरी दिल्ली के नांगलोई इलाके में 26 वर्षीय एक युवक की एक अन्य व्यक्ति ने इस बात पर हत्या कर दी कि सड़क पार करते वक्त युवक का कंधा उससे टकरा गया था. एक जांच अधिकारी ने कहा, ‘लोगों के बीच बेहद मामूली से मुद्दों पर झगड़े हो रहे हैं और बात हत्या तक पहुंच रही है. हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया जहां एक बस के हेल्पर ने चालक की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी क्योंकि चालक ने उसका फोन लौटाने से इनकार कर दिया था.’ एम्स के मनोचिकित्सक डॉ नंद कुमार का मानना है कि किसी व्यक्ति का ऐसा बर्ताव अनेक कारणों से हो सकता है जैसे आरामतलब जीवनशैली, सामाजिक संवादहीनता, नशा करना आदि. Also Read - COVID19: तमिलनाडु में बढ़े केस, 690 संक्रमितों से 636 तबलीगी जमात के इवेंट में हुए थे शामिल

(इनपुट – एजेंसी)