अहमदाबाद. गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को साल 2002 में हुए नरोदा पाटिया दंगा मामले में फैसला सुना दिया. बीजेपी की पूर्व मंत्री माया कोडनानी पर एसआईटी कोर्ट के फैसले को गुजरात हाईकोर्ट ने बदल दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि माया कोडनानी निर्दोष हैं. दूसरी तरफ बाबू बजरंगी की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रहेगी. वहीं, पाटीदार अनामत आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने गुजरात हाईकोर्ट के इस फैसल पर नाखुशी जताई है. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर भरोसा करना ही पड़ता है. लेकिन सवाल ये उठता है कि बाबू बजरंगी की सजा बरकरार रही तो माया कोडनानी कैसे बरी हो गईं? दूसरी तरफ आरएसएस विचारक राकेश सिन्हा ने कहा, माया कोडनानी के खिलाफ साजिश हुई थी. हाईकोर्ट के फैसले से खुशी हुई है. बता दें कि सभी 32 दोषियों ने स्पेशल कोर्ट के आदेश पर कोर्ट में अपील की थी. गुजरात हाईकोर्ट से 11 रिव्यू पिटीशन पर फैसला आया. इससे पहले माया को एससाईटी स्पेशल कोर्ट ने 28 साल की सजा सुनाई थी.

बता दें कि साल 2002 में अहमदाबाद स्थित नरोदा पाटिया इलाके में उग्र भीड़ ने अल्‍पसंख्‍यक समुदाय के लोगों के घरों में हमला कर दिया था, जिसमें 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी और 33 से ज्‍यादा लोग घायल हुए थे. यह केस गुजरात दंगों से जुड़े 9 मामलों में से एक है, जिसकी जांच एसआईटी ने की थी. इस मामले में विशेष कोर्ट ने बीजेपी की पूर्व मंत्री माया कोडनानी समेत 32 लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी और बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी को मौत तक आजीवन जेल में कैद रहने की सजा सुनाई थी. निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में 29 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था. इसके बाद दोषियों ने निचली अदालत के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी. वहीं, विशेष जांच दल ने 29 लोगों को बरी किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

32 लोगों को मि‍ली थी उम्रकैद
अगस्त 2012 में एसआईटी मामलों के लिए विशेष कोर्ट ने राज्य की पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता माया कोडनानी समेत 32 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. कोर्ट ने कोडनानी को 28 साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी और एक अन्य बहुचर्चित आरोपी बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी को मृत्यु पर्यंत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. 7 अन्य को 21 साल के आजीवन कारावास और शेष अन्य को 14 साल के साधारण आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में 29 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था. जहां दोषियों ने निचली अदालत के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी , वहीं, विशेष जांच दल ने 29 लोगों को बरी किए जाने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.

28 फरवरी 2012 को हुआ था भीषण नरसंहार
-97 लोगों की हत्या अहमदाबाद में स्थित नरोदा पाटिया इलाके में कर दी गई थी.
-33 लोग नरोदा पाटिया के दंगे में घायल हुए थे
– 28 फरवरी 2002 को ये भीषण नरसंहार हुआ था.
-ये घटना 27 फरवरी, 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन जलाए जाने के एक दिन बाद हुई थी.
-विश्व हिन्दू परिषद के 28 फरवरी, 2002 को बंद का आह्वान के दौरान उग्र भीड़ ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर हमला कर दिया था.

ऐसे चली न्‍याय प्रक्रिया
– 62 आरोपियों के खिलाफ आरोप दर्ज किए गए थे
– नरोदा पाटिया कांड का मुकदमा अगस्त 2009 में शुरू हुआ.
-सुनवाई के दौरान एक आरोपी विजय शेट्टी की मौत हो गई.
– कोर्ट ने केस की सुनवाई के दौरान 327 लोगों के बयान दर्ज किए
– गवाहों में कई पत्रकार, कई पीड़ित, डॉक्टर, पुलिस अधिकारी और सरकारी अधिकारी शामिल थे
– 29 अगस्त 2012 को विशेष कोर्ट की जज ज्योत्सना याग्निक ने आरोपियों को सजा सुनाई
– कोर्ट ने बीजेपी एमएलए और पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी को हत्या और षड़यंत्र रचने का दोषी पाया.
– 32 लोगों को नरोदा पाटिया दंगे में दोषी करार दिया गया.
– कोर्ट ने अभियुक्त बनाए गए 29 अन्य लोगों को बरी कर दिया.