नई दिल्ली: कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में पूरी मजबूती के साथ उतरने के मकसद से अगले कुछ महीनों के भीतर देश भर में एक करोड़ ‘बूथ सहयोगियों’ की फौज खड़ी करने का लक्ष्य रखा है. पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से स्वीकृत कार्य योजना के तहत संगठन महासचिव अशोक गहलोत ने 13 सितंबर को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और प्रदेश अध्यक्षों को पत्र भेजकर कहा है कि वे हर बूथ पर कम से 10 ‘बूथ सहयोगी’ बनाने के लक्ष्य को पूरा करने में जुट जाएं. गहलोत ने उनसे कहा है कि वे जिला एवं ब्लॉक इकाइयों के साथ मिलकर ‘बूथ सहयोगी’ बनाएं और हर ‘बूथ सहयोगी’ को 20-25 घरों से संपर्क साधने की जिम्मेदारी भी सौंपें. Also Read - कांग्रेस का मोदी सरकार से सवाल, कितने करोड़ लोगों को कोरोना का मुफ्त टीका मिलेगा और किसको नहीं मिलेगा?

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पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी के कैलाश मानसरोवर यात्रा पर रहने के दौरान छह सितंबर को गहलोत और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल ने प्रदेश इकाइयों के अध्यक्षों और कोषाध्यक्षों के साथ जो बैठक की थी उसमें एक प्रमुख फैसला ‘बूथ सहयोगियों’ की फौज तैयार करने की भी था. कैलाश यात्रा के लौटने के बाद गांधी ने इस योजना को मंजूरी प्रदान की. अखिल भारतीय कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव (संगठन) जेडी सीलम ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने कहा, ‘पार्टी ने यह तय किया है कि हर बूथ पर 10 ‘बूथ सहयोगी’ जोड़े जाएंगे. देश में करीब 10 लाख बूथ हैं और इस लिहाज से हमें एक करोड़ बूथ सहयोगी बनाने हैं. उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बूथ सहयोगी बनाने का लक्ष्य हासिल कर लें.

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गौरतलब है कि 2014 जैसे नतीजे दोहराने के लिए बीजेपी ‘टी-20’ फॉर्मूला आजमा रही है. हालांकि ये क्रिकेट वाला टी-20 नहीं है. इसका मतलब है, एक कार्यकर्ता 20 घरों में जाकर चाय पीएगा और मोदी सरकार की उपलब्धियों की जानकारी उन घरों के सदस्यों को देगा. टी-20 के अलावा बीजेपी ने ‘हर बूथ दस यूथ’, नमो ऐप सम्पर्क पहल और बूथ टोलियों के माध्यम से मोदी सरकार की उपलब्धियों को घर घर पहुंचने का कार्यक्रम तैयार किया है.बीजेपी ने अपने सांसदों, विधायकों, स्थानीय और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से अपने अपने क्षेत्रों में जनता को सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने को कहा है.

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बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया,‘पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि वे अपने क्षेत्र के प्रत्‍येक गांव में जाएं और कम से कम 20 घरों में जाकर चाय पीएं. इस ‘टी-20’ पहल का मतलब जनता से सीधे संवाद स्थापित करना है. उल्लेखनीय है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने आक्रामक प्रचार शैली अपनाई थी. इसमें खास तौर पर सूचना तकनीक माध्यम का उपयोग किया गया था. इसका खास आकर्षण 3-डी रैलियों का आयोजन था. इन 3-डी रैलियों में एक ही समय में कई स्थानों पर बैठे लोगों के साथ एक साथ जुड़ने की पहल की गई थी. सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जोड़ने और चाय पे चर्चा की पहल भी की गई थी.