नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव में लगभग 6 महीने का समय बचा है. बीजेपी ने शनिवार को ऐलान किया कि वह अमित शाह की अगुवाई में ही चुनाव लड़ेगी. पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. दूसरी ओर कांग्रेस गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने जा रही है. मीडिया में लंबे समय से ऐसी खबरें चल रही हैं कि भारत की सबसे पुरानी पार्टी के पास पैसे नहीं हैं और वह फंड की कमी से जूझ रही है. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि कुछ राज्यों में सरकार नहीं बना पाने की एक वजह ये भी है. कांग्रेस ने फंड जुटाने के लिए घर-घर जाने का प्लान तैयार किया है. यानी कांग्रेस घर-घर जाकर वोट तो मांगेगी ही साथ ही चंदे भी मांगेगी जिससे चुनाव लड़ने के लिए जरूरी वित्तीय इंतजाम किए जा सकें.

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कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि पार्टी को यह स्वीकार करने में गुरेज नहीं करना चाहिए कि कॉरपोरेट समूहों से उसे चंदा नहीं मिल रहा और वह आम जनता की मदद से चुनाव लड़ना चाहती है.पार्टी के कार्यकर्ता आने वाले दिनों में घर-घर जाकर वोट के साथ चंदा भी मांगेगे. पार्टी के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल और संगठन महासचिव अशोक गहलोत ने शनिवार को कांग्रेस महासचिवों, प्रभारियों, प्रदेश इकाइयों के अध्यक्षों और कोषाध्यक्षों के साथ बैठक की जिसमें कई अन्य मुद्दों के साथ आगामी चुनावों के लिए वित्तीय इंतजामों को लेकर भी चर्चा हुई.

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बैठक में मौजूद रहे कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने को बताया, ‘बैठक में डोर टू डोर प्रचार अभियान, बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और सीधे जनता से चंदा इकट्ठा करने की बात की गई. सीधे जनता से चंदा मांगना एक बेहतरीन योजना है. इससे पार्टी सीधे आम लोगों से जुड़ेगी. पार्टी की इस बैठक में शामिल रहे एक अन्य नेता ने कहा, ‘सबको पता है कि कॉरपोरेट जगत सत्तारूढ़ पार्टी के साथ है. कांग्रेस हमेशा से गरीबों और आम जनता की पार्टी रही है. अगर हम वोट के साथ चंदा मांगने के लिए भी सीधे आम लोगों तक जाएंगे तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है. उन्होंने कहा, ‘इस कदम से जनता के बीच यह भी संदेश जाएगा कि हम चुनावी चंदे को लेकर ईमानदार हैं और जीतने के बाद हम आम लोगों के लिए ही काम करेंगे.’

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गौरतलब है कि वर्ष 2016-17 में पांच राष्ट्रीय पार्टियों को जितना चंदा मिला उस पूरी राशि का नौ गुणा ज्यादा चंदा अकेले बीजेपी को मिला. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट से यह बात सामने आई है. 20 हजार रुपए से अधिक चंदा पाने वाली सात राष्ट्रीय पार्टियों द्वारा घोषित चंदे की कुल राशि 589.38 करोड़ रुपए है. राजनीतिक चंदे की यह भारी-भरकम राशि 2,123 निजी और कॉर्पोरेट घरानों के द्वारा दिया गया.

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एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार भाजपा ने 1,194 चंदों के जरिए प्राप्त 532.27 करोड़ रुपए की घोषणा की, जबकि कांग्रेस ने 599 चंदों के जरिए प्राप्त 41.90 करोड़ रुपए की घोषणा की है. रिपोर्ट के मुताबिक ‘एक ही समय में भाजपा द्वारा घोषित चंदा कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और तृणमूल कांग्रेस द्वारा मिलाकर घोषित किए गए चंदे का नौ गुणा ज्यादा है.