2026 Ka Pehla Supermoon India Wolf Moon Kya Hai Supermoon Kyon Dikhta Hai Bada Aur Zyaada Chamakdar
आसमान में दिखा साल 2026 का पहला सुपरमून, दिल्ली से कोलकाता तक भारत के जगहों पर दिखा ये शानदार नजारा
New Year Supermoon: साल 2026 का पहला सूपरमून दिख चुका है, जो समान्य चांद से गई गुना बड़ा और ज्यादा चमकदार दिखाई देता है. जानिए क्यों खास है ये चांद और क्यों इसे कहा जाता है वुल्फ मून?
नए साल का पहला सूपरमून आसमान में निकल चुका है, जिसे देखने के लिए लोग अपनी-अपनी छतों पर खड़े हैं. ये चांद 2026 यानी नए साल के तीसरे दिन निकला है, जो इस वजह से भी काफी खास है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इसी सूपरमून को वुल्फ मून भी कहा जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, सूपरमून दिल्ली, यूपी, बिहार, कोलकाता, रांची समेत देश के कई राज्यों में दिखाई दिया है. अगर आप सोच रहे हैं कि इसे देखने के लिए आपको किसी खास उपकरण की जरूरत पड़ेगी तो ऐसा नहीं है, इसे आप अपनी नंगी आंखों से देख सकते हैं. आपको चांद आसमान में एक अलग खूबसूरती के साथ, ज्यादा रोशनी और ज्यादा बड़े आकार में दिखाई देगा.
क्यों खास है सूपरमून
सवाल उठता है कि आखिर सूपरमून आम चांद से कितना खास है? सुपरमून तब होता है जब चांद अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है. इस वजह से यह सामान्य पूर्णिमा के चांद से करीब 14% बड़ा और 30% ज्यादा चमकदार दिखाई देता है. इसकी दूधिया रोशनी इतनी तेज होती है कि रात में आसमान में अलग खूबसूरती नजर आती है, जो इसे बेहद खास बनाता है.
#WATCH | झारखंड: रांची में 2026 का पहला ‘सुपरमून’ देखा गया, इसे ‘वुल्फ मून’ के नाम से भी जाना जाता है।
इस खगोलीय घटना के दौरान, चांद एक आम पूर्णिमा के चांद से 30% ज़्यादा चमकदार दिखेगा। pic.twitter.com/EQvLLhtYjX
पुरानी मान्यताओंके अनुसार, जनवरी की कड़कड़ाती ठंड में जब चारों तरफ बर्फ जमी होती थी, तब भूखे भेड़िये खाने की तलाश में इंसानी बस्तियों के आसपास आ जाते थे. वे चांद की रोशनी में रात भर जोर-जोर से हुआं-हुआं (आवाज) निकालते थे. भेड़ियों की इसी आवाज और जनवरी के महीने के गहरे जुड़ाव के कारण इस समय के चांद का नाम ‘वुल्फमून‘ पड़ गया.
आखिर कैसे बनता है सूपरमून
सुपरमून तब बनता है जब चांद अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे करीब वाले बिंदु, जिसे पेरिजी कहा जाता है, पर पूर्णिमा के दिन पहुंचता है. इस स्थिति में चांद सामान्य से बड़ा और ज्यादा चमकीला दिखाई देता है. क्योंकि चांद की कक्षा पूरी तरह गोल नहीं होती, इसलिए कभी वह पृथ्वी के पास आता है और कभी दूर चला जाता है. लेकिन जब पूर्णिमा और पेरिजी एक साथ होते हैं, तो यही खगोलीय घटना सुपरमून कहलाती है, जिसे लोग नंगी आंखों से भी आसानी से देख सकते हैं. इस घटना के दौरान चांद धरती से सिर्फ 3 लाख 62 हजार किमी. की दूरी पर होता है.
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