नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच गुरूवार को पहली टू प्लस टू वार्ता हुई. इसका उद्देश्य द्विपक्षीय रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को और मजबूत करना और भारत-प्रशांत क्षेत्र में वैश्विक रणनीतिक सहयोग को विशेषतौर पर बढ़ाना है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने टू प्लस टू वार्ता के तहत अमेरिकी विदेश मंत्री माइकल आर पोम्पिओ और रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस से बातचीत की. बता दें कि अमेरिका भारत के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने का प्रयास कर रहा है, जिसे क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य प्रभुत्व के संतुलन के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है. Also Read - भारत-अमेरिका के बीच आज हो सकते हैं तीन अरब डॉलर के दो रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर

स्वराज ने प्रारंभिक बयान में कहा कि उन्हें विश्वास है कि वार्ता के परिणाम से दोनों देशों के बीच अप्रयुक्त क्षमता का लाभ उठाने में मदद मिलेगी और साझेदारी के स्तर को और बढ़ाया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग के सभी प्रमुख क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है.

पोम्पिओ ने अपने बयान में कहा कि दोनों पक्षों को समुद्री क्षेत्र की आजादी सुनिश्चित करनी चाहिए और समुद्री विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में काम करना चाहिए. उनका इशारा दक्षिण चीन सागर में चीन के विस्तारवादी रवैये की ओर था. उन्होंने बाजार आधारित अर्थशास्त्र और सुशासन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया.

अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कहा, हम लगातार साथ काम करते रहेंगे और प्रमुख डिफेंस पार्टनर के रूप में भारत की भूमिका बढ़ेगी. अपने सहयोगियों और भागीदारों से रिश्तों को एक बढ़ाएंगे.

– सूत्रों ने कहा कि अमेरिका भारत-प्रशांत क्षेत्र में भारत की साझेदारी को बहुत महत्व देता है और यह विषय प्रमुखता के साथ वार्ता में रहा.

– ईरान से कच्चे तेल के आयात पर अमेरिकी पाबंदी और रूस से एस-400वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली खरीदने की भारत की योजना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है.

– गुरुवार सुबह स्वराज ने अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पिओ और सीतारमण ने यूएस डिफेंस मिनिस्टर मैटिस से अलग-अलग मुलाकात की.

– आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि बैठकों में कई प्रमुख द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई.

– विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने स्वराज और पोम्पिओ की बैठक को लाभकारी बताया.

– रवीश कुमार ने कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में प्रभावशाली प्रयासों की समीक्षा की और रिश्तों को और अधिक ऊंचे स्तर पर ले जाने के कदमों पर चर्चा की.

राजनयिक सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्ष कुछ रक्षा समझौतों को अंतिम रूप देने का प्रयास करेंगे, जिससे उनकी सेना और निजी क्षेत्र दोनों रक्षा अधिग्रहण एवं साझेदारियों के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया कि बातचीत दोनों देशों की अपनी रणनीतिक साझेदारी को सकारात्मक, आशावादी दृष्टिकोण प्रदान करने तथा महत्वपूर्ण विषयों पर एक ओर ही झुकाव रखने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है.