ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, भारत भी प्रभावित देशों में शामिल
अमेरिका के 25 राज्यों ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा कई देशों पर लगाए गए टैरिफ को अदालत में चुनौती दी है. राज्यों का कहना है कि यह फैसला गैरकानूनी है और इससे उपभोक्ताओं व कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा.
- अमेरिका के 25 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के नए टैरिफ को अदालत में चुनौती दी है.
- भारत सहित 60 देशों पर सेक्शन 301 के तहत आयात शुल्क लागू किया गया है.
- राज्यों का दावा है कि टैरिफ कानून और संविधान के अनुरूप नहीं हैं.
- मामले का फैसला भारत-अमेरिका व्यापार समेत वैश्विक कारोबार पर असर डाल सकता है.
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति को लेकर बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है. देश के 25 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में याचिका दायर कर इन टैरिफ को अवैध घोषित करने की मांग की है. राज्यों का कहना है कि इस फैसले से आम उपभोक्ताओं, व्यापारियों और उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा. इस पूरे विवाद का असर भारत समेत कई देशों पर भी पड़ रहा है.
मामला उन टैरिफ से जुड़ा है जो ट्रंप प्रशासन ने सेक्शन 301 के तहत करीब 60 देशों पर लगाए हैं. इन देशों में भारत भी शामिल है. फिलहाल भारत पर 10 प्रतिशत टैरिफ लागू है, जबकि भविष्य में अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की संभावना से जुड़ी जांच अभी भी जारी है. याचिका दायर करने वाले राज्यों का आरोप है कि प्रशासन ने कानून में तय प्रक्रिया का पालन किए बिना व्यापक स्तर पर टैरिफ लागू कर दिए. उनका कहना है कि सरकार ने इन शुल्कों को जबरन श्रम (Forced Labour) के खिलाफ कार्रवाई का नाम दिया है, लेकिन वास्तव में इनका उस मकसद से सीधा संबंध नहीं दिखता.
कोर्ट के सामने रखी ये मांग
न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स और अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों ने अदालत से अनुरोध किया है कि इन टैरिफ को असंवैधानिक और गैरकानूनी घोषित किया जाए. उनका तर्क है कि राष्ट्रपति के पास अपनी इच्छा से इतने व्यापक स्तर पर आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है. राज्यों का कहना है कि इस नीति का सीधा असर अमेरिकी परिवारों और व्यवसायों की जेब पर पड़ेगा क्योंकि आयातित सामान महंगे हो जाएंगे.
भारत पर टैरिफ का कितना असर?
भारत के संदर्भ में देखें तो पहले अमेरिका भारत पर 12.5 प्रतिशत टैरिफ लगाने की योजना बना रहा था. हालांकि बाद में भारत के विदेशी व्यापार नीति में बदलाव और जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने के बाद इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया. इसके बावजूद भारत अभी भी प्रभावित देशों की सूची में शामिल है.
याचिका में ये भी कहा गया है कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने टैरिफ लागू करने से पहले संबंधित देशों और हितधारकों की आपत्तियों पर पर्याप्त विचार नहीं किया. राज्यों का दावा है कि प्रशासन ने जिन उत्पादों का हवाला देकर यह कार्रवाई की, उनकी संख्या बेहद सीमित थी, जबकि टैरिफ का दायरा कई देशों और हजारों उत्पादों तक फैला दिया गया.
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