रूस की सेना में शामिल कितने भारतीय मारे गए, कितने लापता? सरकार ने संसद को दी जानकारी, फंसे लोगों की वापसी के लिए प्रयास जारी

संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विदेश मंत्रालय से उन भारतीय नागरिकों की संख्या के बारे में पूछा गया जिनके बारे में माना जाता है कि उन्हें रूसी सेना में अवैध रूप से भर्ती किया गया था. साथ ही 2022 से हुई मौतों और लापता लोगों के बारे में भी सवाल पूछा गया था.

Published date india.com Published: December 19, 2025 2:14 PM IST
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

Indians in Russian armed forces: भारत सरकार ने एक सवाल के जवाब में संसद को जानकारी दी है कि रूसी सेना में काम कर रहे 26 भारतीय नागरिकों की दुखद मौत हो गई है. केंद्र सरकार ने ये भी बताया है कि सात अन्य अभी भी लापता हैं. राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि 50 लोगों की जल्द वापसी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं.

10 मृत भारतीय नागरिकों के शव वापस आए

विदेश मंत्रालय (MEA) ने 10 मृत भारतीय नागरिकों के शवों को वापस लाने में सफलतापूर्वक मदद की है और दो अन्य का स्थानीय स्तर पर अंतिम संस्कार करवाया है. मृतकों की पहचान में मदद के लिए 18 भारतीयों के परिवार के सदस्यों के DNA सैंपल रूसी अधिकारियों को सौंपे गए हैं.

बता दें कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विदेश मंत्रालय से उन भारतीय नागरिकों की संख्या के बारे में पूछा गया जिनके बारे में माना जाता है कि उन्हें रूसी सेना में अवैध रूप से भर्ती किया गया था. साथ ही 2022 से हुई मौतों और लापता लोगों के बारे में भी सवाल पूछा गया था.

सरकार से रूसी सेना में अभी भी काम कर रहे भारतीय नागरिकों की अनुमानित संख्या और उनकी वापसी के संबंध में रूस के साथ किए गए संचार की समय-सीमा के बारे में भी पूछा गया. रूस-यूक्रेन संघर्ष में मारे गए भारतीयों के शवों को वापस लाने में किसी भी देरी के बारे में भी जानकारी मांगी गई थी.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 202 भारतीय नागरिकों को रूसी सशस्त्र बलों में शामिल किया गया था. इसमें से सरकार ने 119 लोगों को जल्द रिहा करवाने में सफलता हासिल की है. 26 की मौत हो गई है, सात लापता हैं, जबकि 50 और लोगों को रिहा करवाने के प्रयास जारी हैं.

रूस में भारतीय दूतावास रूसी सेना से डिस्चार्ज हुए लोगों को सभी जरूरी मदद मुहैया करा रहा है. दूतावास ने इन लोगों को ट्रैवल डॉक्यूमेंटेशन और एयर टिकट लेने में भी मदद की है. मिशन ने पार्थिव शरीर को निकालने में भी भूमिका निभाई है.

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सरकार के अनुसार, युद्ध के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के पार्थिव शरीर को सुरक्षित जगह पर ले जाया जाता है और पहचान की प्रक्रिया में DNA सैंपल का रिश्तेदारों के साथ मिलान किया जाता है. हचान कन्फर्म होने पर भारतीय दूतावास परिवारों के साथ मिलकर स्थानीय स्तर पर अंतिम संस्कार या पार्थिव शरीर को भारत वापस लाने के लिए जरूरी कागजात पूरे करने में मदद करता है. केंद्र सरकार रूसी सशस्त्र बलों में शामिल किए गए सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और जल्द वापसी सुनिश्चित करने के लिए रूसी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है.

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