India-China Standoff: भारत-चीन सीमा पर दोनों देशों के बीच हुई मुठभेड़ में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए. इस घटना के बाद से ही देश में गुस्से का माहौल है.  भारत-चीन के बीच हुई इस हिंसक झड़प में पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रहने वाले राजेश ओरांग भी शहीद हो गए. जैसे ही राजेश ओरांग के इस हमले में शहीद होने की खबर उनके घर तक पहुंची, घर में शोक की लहर दौड़ गई. शहीद राजेश ओरांग के परिवारवालों का रो-रो कर बुरा हाल है. ऐसे में शहीद का परिवार भी सरकार से चीन को उचित जवाब देने की मांग कर रहा है. शहीद राजेश के चचेर भाई राजेश ने बताया कि इसी महीने राजेश की शादी होने वाली थी. Also Read - बीजेपी को पूरा भरोसा, पश्चिम बंगाल में 2021 में बनकर रहेगी सरकार

शहीद राजेश ओरांग को साल 2015 में भारत चीन बॉर्डर पर पोस्टिंग दी गई थी. ऐसे में जैसे ही सोमवार को भारत-चीन के सैनिकों के बीच हुए खूनी संघर्ष में राजेश ओरांग की शहादत की खबर उनके परिजनों को मिली, वह बिखर गए. राजेश ओरांग ने अपने देश के लिए इस दुनिया को और अपने परिवार को अलविदा कह दिया. राजेश की शहादत पर उनके परिवार समेत पूरे गांव वालों को गर्व है. Also Read - West Bengal Lockdown Extension: पश्चिम बंगाल के इन इलाकों में 9 जुलाई से होगा सख्त लॉकडाउन, जानें क्या खुलेगा, क्या रहेगा बंद

राजेश ओरांग ने 26 साल की उम्र में साल 2015 में भारतीय सेना में योगदान दिया, जिसके बाद उन्हें लद्दाख में तैनात कर दिया गया. जिसके बाद बुधवार को पश्चिम बंगाल के बीरभूम में उनका अंतिम संस्कार किया गया. उनके परिजनों के मुताबिक, वह सितंबर 2019 में आखिरी बार घर आए थे और करीब 2 हफ्ते पहले फोन पर आखिरी बार बात की थी. Also Read - Lockdown in West Bengal: पश्चिम बंगाल में 9 जुलाई से फिर लागू होगा सख्त लॉकडाउन, केवल ग्रीन जोन में मिलेगी छूट

तब राजेश ने कहा था कि वह जल्दी ही छुट्टी लेकर घर आएंगे. लेकिन, किसे पता थी कि राजेश नहीं उनका पार्थिव देह अपने अंतिम पड़ाव के लिए घर पहुंचेगा. राजेश के पिता पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे हैं, ऐसे में जैसे ही उन्हें बेटे के चीनी सेना के साथ हुए संघर्ष में घायल होने और आर्मी अस्पताल में भर्ती किए जाने की खबर मिली, उनके पिता भी बेहाल हो गए.

इसके बाद राजेश ओरांग के परिजनों को उनकी शहादत की सूचना दी गई. जिससे पूरे परिवार में मातम पसर गया. शहीद राजेश ओरांग अपने पीछे अपने बूढ़े माता-पिता को छोड़ गए हैं, जो अभी भी बेटे की शहादत पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं.