नई दिल्ली: उत्तर भारत में हुए ट्रांजिस्टर बम विस्फोटों के लगभग 35 साल बाद दिल्ली की एक अदालत ने दोषपूर्ण, एकतरफा, अनुचित और दोषपूर्ण जांच के कारण 49 आरोपियों में से 30 को बरी कर दिया. इन विस्फोटों में केवल दिल्ली में ही 49 लोगों की मौत हो गई थी और 127 अन्य घायल हुए थे. Also Read - दिल्ली में निजामुद्दीन कार्यक्रम पर शरद पवार ने उठाए सवाल, पूछा -'अनुमति किसने दी?'

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने कहा कि जांच में विभिन्न खामियां रहीं और इस तरह की दोषपूर्ण जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूत के आधार पर 35 साल पुराने मामले में आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. Also Read - लॉकडाउन: दिल्ली में बिना राशन कार्ड वालों को भी मिलेगा 5 किलो राशन, केजरीवाल सरकार का बड़ा फैसला

बता दें दिल्ली में बसों तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों और उत्तर प्रदेश और हरियाणा के आसपास के क्षेत्रों में 10 मई, 1985 को ट्रांजिस्टर में लगाए गए बमों में विस्फोट हुए थे. इन विस्फोटों में केवल दिल्ली में ही 49 लोगों की मौत हो गई थी और 127 अन्य घायल हुए थे. Also Read - Coronavirus: दिल्‍ली में अब तक कुल 384 लोग संक्रमित, 24 घंटे में 91 केस बढ़े

दिल्ली पुलिस के तत्कालीन डीसीपी (मध्य) के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल ने आरोप पत्र में 59 आरोपियों के नामों को शामिल किया था. इनमें से पांच घोषित अपराधी हैं और वे कभी भी सुनवाई के दौरान पेश नहीं हुए.

निचली अदालत ने जुलाई 2006 में पांच आरोपियों को अपर्याप्त सबूत के कारण आरोप मुक्त कर दिया था. शेष 49 आरोपियों में से 19 की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी जबकि 30 आरोपी 1986 से जमानत पर हैं.

अदालत ने अपने 120 पृष्ठ के फैसले में कहा, ‘‘कुछ मामलों में सरकारी गवाह जांच से जुड़े थे, लेकिन अदालत में उनसे जिरह नहीं की गई. निर्विवाद निष्कर्ष यह है कि इन मामलों में जांच दोषपूर्ण, एकतरफा, अनुचित और विभिन्न खामियों से पूर्ण थी. आरोपियों को इस तरह की दोषपूर्ण जांच के दौरान एकत्र किए गए सबूत के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता है.

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोपों को साबित करने में विफल रहा है और सुरजीत कौर, मनमोहन सिंह, गुरदेव सिंह, बूटा सिंह, कुलबीर सिंह उर्फ भोला, इंद्रजीत सिंह उर्फ हैप्पी, हरदीप सिंह, तीरथ सिंह, मुख्तियार सिंह, भूपिंदर सिंह उर्फ भिंडा, अरविंदर सिंह उर्फ नीटू, अनूप सिंह और मनजीत सिंह को बरी किया जाता है.

अदालत ने कहा कि जोगिंद्रपाल सिंह भाटिया, तर्जित सिंह, सर्वजीत सिंह, सुरिंदरपाल सिंह, दलजीत सिंह, राजिंदर सिंह, सेवा सिंह, सुरिंदरपाल सिंह उर्फ डॉली, शाहबाज सिंह, सुखदेव सिंह, जसपाल सिंह, दलविंदर सिंह उर्फ पप्पा, नरेंद्र सिंह, गुरमीत सिंह, हरचरण सिंह गुरदीप सिंह सहगल और गुरमीत सिंह उर्फ हैप्पी को भी बरी किया जाता है.

कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने ऐसे सबूत इकट्ठा नहीं किए, जिससे वह यह स्पष्ट कर सकती कि आरोपियों द्वारा बस में लगाये गये बमों में विस्फोट हुआ था या वे बिना विस्फोट के रहे और यदि उनमें विस्फोट नहीं हुआ तो उन्हें निष्क्रिय किया गया या नहीं.

जांच पूरी होने और मुकदमा समाप्त होने पर हाल में यह आदेश आया. मामले की सुनवाई में आठ प्राथमिकियां, 14 आरोप पत्र, 1,399 गवाहों और लगभग 24 न्यायाधीश शामिल रहे. इस मामले में 30 आरोपियों को हत्या, हत्या का प्रयास, भारत सरकार के खिलाफ जंग छेड़ने समेत आईपीसी के तहत विभिन्न आरोपों से बरी कर दिया गया. उत्तर प्रदेश और हरियाणा के मामलों को बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया था.