हिसार: हरियाणा के हिसार जिले के भाटला गांव में अन्य जातियों द्वारा एक साल से अधिक समय से सामाजिक बहिष्कार का सामना कर रहे करीब 300 दलितों ने गांव के गुरू रविदास मंदिर में आयोजित एक कार्यक्रम में बौद्ध धर्म अपना लिया. इससे पहले, हरियाणा के जींद जिले के करीब 500 दलितों ने मांगें पूरी नहीं होने पर बौद्ध धर्म अपनाया था. Also Read - मायावती की बसपा नहीं है दलितों की शुभचिंतक: भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर

‘नेशनल एलायंस ऑफ दलित फॉर ह्यूमन राइट्स’ के संयोजक रजत कालसन इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे जबकि सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश खापर ने इसकी अध्यक्षता की. रीति रिवाज और धर्मांतरण के कागजात पूरे कराने के लिए इस मौके पर यमुनानगर और बल्लभगढ के बौद्ध मौजूद थे. Also Read - कोरेगांव-भीमा केस: पुलिस का दावा, सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए दलितों को कर रहे थे लामबंद सामाजिक कार्यकर्ता

इस मौके पर कालसन ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में दलितों के साथ बड़े पैमाने पर भेदभाव किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार भाटला में दलितों द्वारा सहे जाने वाले कथित भेदभाव को खत्म करने के लिए उचित कदम नहीं उठाए.
15 अगस्त को 500 दलितों ने हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपनाया था Also Read - दलाई लामा मुंबई में छात्रों को करेंगे संबोधित, बुद्धिज्म पर होगी बात

हरियाणा के जींत जिले में दलित ज्वाइंट एक्शन कमेटी के धरनास्थल पर बीते 15 अगस्त को 300 से ज्यादा दलित परिवारों के करीब 500 दलितों ने हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया था. कमेटी के संयोजक और धरना संचालक दिनेश खापड़ ने मुताबिक उत्तर प्रदेश और दिल्ली से आए छह बौद्ध भिक्षुओं ने धरनास्थल पर ही इन परिवारों को दीक्षा देकर धर्म परिवर्तन कराया.  187 दिनों से दलित ज्वाइंट एक्शन कमेटी के तत्वावधान में अपनी मांगों को लेकर जींद के लघु सचिवालय में धरने पर बैठे  रहें.

येे थी मांंगे

दलितों की  मांगों में कुरूक्षेत्र के एक गांव की दलित बेटी से हुई दरिंदगी की जांच कराना, हिसार के भटला में दलितों का सामाजिक बहिष्कार करने वालों के खिलाफ मामले दर्ज करने और दलितों पर किए गए झूठे मामले खारिज करना, दलितों पर हो रहे अत्याचार पर अंकुश लगाना आदि शामिल रहे थे. खापड़ ने कहा, ” जब से देश और हरियाणा में भाजपा की सरकार बनी है तब से दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक गुलामी की जिंदगी जीने को मजबूर है. सरकार ने हर मामले में दलितों की अनदेखी करके दलितों के साथ विश्वासघात किया है.”