श्रीनगर: उच्चतम न्यायालय में अनुच्छेद 35ए की वैधता को दी गई चुनौती के खिलाफ अलगाववादियों के दो दिवसीय बंद के आह्वान के चलते लगातार दूसरे दिन सोमवार को भी कश्मीर और चेनाब घाटी में जनजीवन प्रभावित रहा. हालांकि सुप्रीम कोर्ट में आज इस मसले पर होने वाली सुनवाई स्थगित हो गई. Also Read - दिल्ली में कोरोना क्यों बना काल? केंद्र सरकार ने दिया जवाब- केजरीवाल सरकार की बताई गलती

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अलगाववादियों के बंद के आह्वान को देखते हुए एहतियातन कश्मीर घाटी में अतरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. रविवार और सोमवार के लिए ट्रेन सेवा भी निलंबित रखी गई. वहीँ प्रशासन ने रविवार को अमरनाथ यात्रा को भी दो दिन के लिए रद्द करने का फैसला किया था. Also Read - Loan Moratorium Case: सुप्रीम कोर्ट का सरकार को निर्देश, ऋण पर ब्याज के मामले में अपना निर्णय लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाएं

35-A: अलगाववादियों के बंद के आह्वान के चलते कश्मीर घाटी में पसरा सन्नाटा

बता दें कि अलगाववादियों ने घाटी में बंद का आह्वान अनुच्छेद 35-ए को समर्थन देने के लिए किया है. अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और यासीन मलिक ने ‘संयुक्त प्रतिरोध नेतृत्व’ के बैनर तले पूरे प्रदेश में रविवार और सोमवार को बंद का एलान किया था. साथ ही कई संगठनों ने धमकी दी है कि अगर कोर्ट इस अनुच्छेद को हटा देती है तो वे जन आंदोलन करेंगे.

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जस्टिस चन्द्रचूड़ के अवकाश पर रहने के चलते टली सुनवाई

हालांकि उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को यह कहकर अनुच्छेद 35-A की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित कर दी कि पीठ के तीन सदस्यों में से एक न्यायाधीश मौजूद नहीं हैं. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की पीठ ने कहा कि इस मामले की सुनवाई तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ को करनी है लेकिन इसके तीसरे सदस्य न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ उपस्थित नहीं हैं.

अनुच्छेद 35ए को लेकर अलगाववादियों के बंद से कश्मीर में जनजीवन प्रभावित

मामले को वृहद् पीठ को सौंपे जाने पर भी विचार

पीठ ने यह भी कहा कि इस मामले की सुनवाई तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ कर रही थी और अब यह विचार किया जाएगा कि क्या इसे वृहद पीठ को सौंप दिया जाए ? शीर्ष न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई 27 अगस्त को शुरू हो रहे सप्ताह के लिए सूचीबद्ध कर दी है.

सन 1954 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा संविधान में शामिल किया गया अनुच्छेद 35-A जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों को विशेष दर्जा देता है और राज्य से बाहर के किसी भी व्यक्ति को राज्य में कोई भी अचल संपत्ति खरीदने से रोकता है.

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अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारुक और मोहम्मद यासिन मलिक के संयुक्त प्रतिरोध नेतृत्व (जेआरएल) ने दो दिन के बंद का आह्वान किया था. राज्य बार एसोसियेशन, ट्रांसपोर्टर और व्यवसायी संघों सहित विभिन्न संगठनों ने बंद के आह्वान का समर्थन किया है.

मुख्य धारा की पार्टियां भी 35-A के समर्थन में

पिछले कुछ दिनों में कश्मीर के कई हिस्सों में इसे लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं. नेशनल कांफ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) जैसी मुख्यधारा की पार्टियां भी अनुच्छेद 35-A को बनाए रखने के पक्ष में रैलियां कर रही हैं. हड़ताल के चलते घाटी भर में शैक्षणिक संस्थान, दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे.

जबकि सभी तरह के वाहन सड़कों से नदारद रहने के चलते सन्नाटा पसरा रहा. अधिकारियों ने बताया कि कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए संवदेनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है हालांकि अभी तक किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है घाटी में तनावपूर्ण शांति कायम है.